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नाटी इमली के मैदान में भरत मिलाप की छटा देख छलकीं आंखें, उमड़ा आस्था का जन सैलाब
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 02 Oct 2017 03:15 PM IST
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भरत मिलाप में जनता को दर्शन देते चारों भाई श्री राम,लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न।
- फोटो : अमर उजाला
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राम की भक्ति का रंग काशी पर रविवार को इस कदर चढ़ा कि नाटी इमली का हर कोना राममय हो गया। मौका था, ऐतिहासिक भरत मिलाप का। मिलन की बेला में सूरज बादलों की ओट से झांकता रहा तो छतों, बारजों से पुष्पवर्षा होती रही।
एक ओर चार हाथियों के बेड़े संग काशिराज थे तो उनके चारो तरफ आस्था का जन सैलाब। सिर्फ लोगों के सिर नजर आ रहे थे। शिव की नगरी में राम की अयोध्या वापसी पर डमरूनाद से अलग आनंद प्रस्फुटित हो रहा था।
दूसरी ओर राम के आगमन पथ पर बैंडबाजा की धुन पर संगीतमयी रसवर्षा हो रही थी। पहले से मंच पर साष्टांग लेटे भरत, शत्रुघ्न को दौड़कर पहुंचे राम-लक्ष्मण ने गले लगाया तो प्रेम के भावों ने हर किसी को उल्लास और आनंद से भर दिया।
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शाम 3:47 बजे चित्रकूट से पुष्पक विमान पर भगवान राम, लक्ष्मण, सीता, जामवंत बाजेगाजे के साथ चले। नाटी इमली में सबसे पहले हनुमान रथारूढ़ होकर पहुंचे। अयोध्या में भगवान राम के आने की खबर दी गई। इस बीच डमरू नाद से पूरा लीला स्थल गूंज उठा।
छतों, बारजों से लेकर हर कोने तक भीड़ अंटी रही। तिल रखने की जगह नहीं थी। इसी दौरान काशिराज की हाथियों के बेड़े ने हर हर महादेव के जयघोष के साथ लीला स्थल पर प्रवेश किया। हाथी पर भीड़ का अभिवादन स्वीकार करते काशिराज ने पुष्पक विमान की परिक्रमा की।
इस दौरान उन्होंने लीला के व्यवस्थापक पंडित बाल मुकुंद उपाध्याय को उपहार भेंट किया। इसके कुछ देर बाद ही रामायण मंडली ने भरत मिलाप के प्रसंगों की चौपाई का सस्वर पाठ आरंभ किया।
राम के आगमन पथ के दोनों तरफ कतारबद्ध भीड़ खड़ी रही। चारो भाइयों के मिलते ही नाटी इमली के मैदान में चहुंदिशि हर हर महादेव के जयघोष गूंज उठा।
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एक ओर चार हाथियों के बेड़े संग काशिराज थे तो उनके चारो तरफ आस्था का जन सैलाब। सिर्फ लोगों के सिर नजर आ रहे थे। शिव की नगरी में राम की अयोध्या वापसी पर डमरूनाद से अलग आनंद प्रस्फुटित हो रहा था।
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दूसरी ओर राम के आगमन पथ पर बैंडबाजा की धुन पर संगीतमयी रसवर्षा हो रही थी। पहले से मंच पर साष्टांग लेटे भरत, शत्रुघ्न को दौड़कर पहुंचे राम-लक्ष्मण ने गले लगाया तो प्रेम के भावों ने हर किसी को उल्लास और आनंद से भर दिया।
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शाम 3:47 बजे चित्रकूट से पुष्पक विमान पर भगवान राम, लक्ष्मण, सीता, जामवंत बाजेगाजे के साथ चले। नाटी इमली में सबसे पहले हनुमान रथारूढ़ होकर पहुंचे। अयोध्या में भगवान राम के आने की खबर दी गई। इस बीच डमरू नाद से पूरा लीला स्थल गूंज उठा।
छतों, बारजों से लेकर हर कोने तक भीड़ अंटी रही। तिल रखने की जगह नहीं थी। इसी दौरान काशिराज की हाथियों के बेड़े ने हर हर महादेव के जयघोष के साथ लीला स्थल पर प्रवेश किया। हाथी पर भीड़ का अभिवादन स्वीकार करते काशिराज ने पुष्पक विमान की परिक्रमा की।
इस दौरान उन्होंने लीला के व्यवस्थापक पंडित बाल मुकुंद उपाध्याय को उपहार भेंट किया। इसके कुछ देर बाद ही रामायण मंडली ने भरत मिलाप के प्रसंगों की चौपाई का सस्वर पाठ आरंभ किया।
राम के आगमन पथ के दोनों तरफ कतारबद्ध भीड़ खड़ी रही। चारो भाइयों के मिलते ही नाटी इमली के मैदान में चहुंदिशि हर हर महादेव के जयघोष गूंज उठा।