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विभाग की सुस्ती, सर्वर में समस्या से सत्यापन अटका
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पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों और बेेसिक शिक्षा विभाग की सुस्ती की वजह से परिषदीय स्कूलों के बच्चों को इस बार बिना यूनिफॉर्म यानी सादे कपड़ों में स्कूल जाना पड़ सकता है। ड्रेस, जूते और मोजे खरीदने के लिए अभिभावकों के खाते में 15 जुलाई से 1046 रुपये भेजे जाएंगे। जिले में करीब दो लाख अभिभावकों का चयन किया गया है। विभाग ने योजना तो शुरू कर दी, लेकिन अब तक महज दस प्रतिशत यानी दस हजार अभिभावकों के बैंक खाते और आधार कार्ड का ही सत्यापन हो सका है। अगर यही हाल रहा और स्कूल खोलने का आदेश जारी हुआ तो बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेरणा पोर्टल छात्र-छात्राओं के माता-पिता के शैक्षिक सत्र 2021-22 का प्रामाणिक डाटा उपलब्ध है। वहीं, अब डीबीटी मॉड्यूल के माध्यम से आधार और बैंक पासबुक का डाटा जुटाया जा रहा है। वहीं, पोर्टल पर डाटा अपलोड के दौरान तकनीकी दिक्कतों की वजह से काम की रफ्तार सुस्त है। कई विद्यालयों में पांच से छह बच्चों के ही डाटा का सत्यापन हो पा रहा है। कुछ विद्यालयों में शिक्षक पूरे दिन लैपटॉप के सामने बैठे रहते हैं पर सर्वर ही नहीं खुलता।
पोर्टल में रोज हो रहे बदलाव
विभाग ने जो पोर्टल तैयार किया है। उसमें हर दिन बदलाव कर दिया जाता है। इससे शिक्षक भी परेशान हैं। पहले पोर्टल पर बच्चों और अभिभावकों का डाटा अपलोड करने के बाद वैरिफिकेशन का विकल्प दिया गया था। अब विभाग ने इसे हटा दिया है। इससे अपलोड डाटा भी पेंडिंग दिख रहा है। जिसकी वजह से बच्चों के सत्यापन की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
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पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों की वजह से डाटा फीडिंग में कुछ समस्या आ रही है। राज्य परियोजना कार्यालय में गणित पीएफएमएस सेल को सूचना दी गई है। जल्द ही समस्या का समाधान कर अभिभावकों को खाते में पैसे भेजे जाएंगे।
- राकेश सिंह, बीएसए
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प्रेरणा पोर्टल छात्र-छात्राओं के माता-पिता के शैक्षिक सत्र 2021-22 का प्रामाणिक डाटा उपलब्ध है। वहीं, अब डीबीटी मॉड्यूल के माध्यम से आधार और बैंक पासबुक का डाटा जुटाया जा रहा है। वहीं, पोर्टल पर डाटा अपलोड के दौरान तकनीकी दिक्कतों की वजह से काम की रफ्तार सुस्त है। कई विद्यालयों में पांच से छह बच्चों के ही डाटा का सत्यापन हो पा रहा है। कुछ विद्यालयों में शिक्षक पूरे दिन लैपटॉप के सामने बैठे रहते हैं पर सर्वर ही नहीं खुलता।
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पोर्टल में रोज हो रहे बदलाव
विभाग ने जो पोर्टल तैयार किया है। उसमें हर दिन बदलाव कर दिया जाता है। इससे शिक्षक भी परेशान हैं। पहले पोर्टल पर बच्चों और अभिभावकों का डाटा अपलोड करने के बाद वैरिफिकेशन का विकल्प दिया गया था। अब विभाग ने इसे हटा दिया है। इससे अपलोड डाटा भी पेंडिंग दिख रहा है। जिसकी वजह से बच्चों के सत्यापन की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
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पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों की वजह से डाटा फीडिंग में कुछ समस्या आ रही है। राज्य परियोजना कार्यालय में गणित पीएफएमएस सेल को सूचना दी गई है। जल्द ही समस्या का समाधान कर अभिभावकों को खाते में पैसे भेजे जाएंगे।
- राकेश सिंह, बीएसए