Varanasi News: कोटे से नौकरी की मांग को लेकर जहर खाने वाले युवक की मौत, कल हुआ था भारी हंगामा
वाराणसी के जाल्हूपुर स्थित श्रीकच्चा बाबा इंटर कॉलेज में मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्ति को लेकर शनिवार को एक युवक ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था। रविवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
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वाराणसी के जाल्हूपुर स्थित श्रीकच्चा बाबा इंटर कॉलेज जाल्हूपुर में शनिवार को नियुक्ति विवाद में विषाक्त पदार्थ खाने वाले बालेश्वर राम (35) की रविवार दोपहर मौत हो गई। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने चंद्रा-बलुआ मार्ग को जाम कर दिया। प्रधानाचार्य की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। चौबेपुर सहित कई थाने की पुलिस, पीएसी और एसडीएम न्यायिक ने लोगों को समझा बुझाकर रात में लोगों को शांत कराया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। प्रधानाचार्य समेत तीन के खिलाफ दर्ज मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाई गई।
चौबेपुर थाना अंतर्गत मिश्रपुरा निवासी बालेश्वर राम (35) ने स्वर्गीय पिता हीरा लाल की जगह पर नियुक्ति को लेकर पिछले तीन साल से चक्कर लगा रहा था। शनिवार की सुबह कॉलेज में बालेश्वर और प्रधानाचार्य विजय प्रताप सिंह के बीच विवाद में बालेश्वर अचेत हो गया। मुंह से झाग निकलने पर पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।
दोपहर 12 बजे बालेश्वर की मौत की सूचना मिलते ही मिश्रपुरा समेत कई गांवों लोग कच्चा बाबा मंदिर के पास जुट गए। सैकड़ों की भीड़ देख चौबेपुर, लोहता, चोलापुर थाने सहित तीन गाड़ी पीएसी तैनात हो गई। आक्रोशित लोगों ने प्रधानाचार्य की गिरफ्तारी को लेकर चंद्रा-बलुआ मार्ग को जाम कर दिया।
सीओ पिंडरा अभिषेक पांडेय और एसडीएम न्यायिक सदर ज्ञानप्रकाश ने आक्रोशित परिजनों और लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। वहीं, परिजनों ने मांग किया कि बालेश्वर की मां को पेंशन, पत्नी को पेंशन, आर्थिक मदद राशि 50 लाख और अन्य एक भाई को नौकरी दी जाए।
एसडीएम न्यायिक के आश्वस्त किया कि मांगपत्र उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा। उधर, शिवपुर में पोस्टमार्टम के बाद कड़ी सुरक्षा में बालेश्वर का शव परिजनों को सौंपा गया। एसपी ग्रामीण सूर्यकांत त्रिपाठी ने सीओ पिंडरा को मामले में उचित कार्रवाई को निर्देशित किया।
नौकरी मिली नहीं, चली गई जान
बालेश्वर की मौत पर परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो उठा। पत्नी ऊषा देवी, मां कलावती देवी और तीन बेटे त्रिदेव (9), अंशु (7) व छोटू (3) बेसुध रहे। वहीं, मौजूद लोगों ने कहा कि तीन साल से मृतक आश्रित कोटे की नौकरी के लिए चक्कर लगाते हुए बालेश्वर ने प्राण त्याग दिया।
स्वर्गीय हीरालाल कीछह संतान में बालेश्वर सबसे बड़ा था। विद्यालय में नौकरी कर अपने परिवार की माली हालत सुधारने का सपना सजोए बालेश्वर के हक में सिर्फ मौत ही मिली। पत्नी और बच्चे अनाथ हो गए। लोगों के मन में प्रधानाचार्य के प्रति काफी गुस्सा और उबाल था।
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