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रास्ते के लिए दी जान: यहां प्रसव के लिए मायके भेजनी पड़ती हैं गर्भवती महिलाएं, मजबूरी से परेशानी; जानें मामला

Fri, 28 Aug 2026 09:10 AM IST
Aman Vishwakarma हेमंत दुबे, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
हेमंत दुबे, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 28 Aug 2026 09:10 AM IST
सार

अहरक गांव में संकरे रास्ते के कारण करीब चार घरों के परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। एंबुलेंस और अन्य वाहन घर तक नहीं पहुंच पाते। गर्भवती महिलाओं को प्रसव से कुछ माह पहले मजबूरी में मायके भेजना पड़ता है। शादी में दूल्हा-दुल्हन को भी घर से कुछ दूर पहले वाहन से उतरकर पैदल जाना पड़ता है।

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dead sake of road in varanasi Pregnant women sent to maternal homes for delivery facing hardship compulsion
इसी रास्ते के लिए कविता ने दे दी जान। - फोटो : संवाद

विस्तार

अहरक गांव में करीब चार घरों के परिवारों के लिए संकरा रास्ता रोजमर्रा की बड़ी परेशानी बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता इतना संकरा है कि जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस समेत अन्य बड़े वाहन घर तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को उठाना पड़ता है। परिजनों के अनुसार, रास्ते की समस्या के कारण परिवारों को हर समय किसी अनहोनी की चिंता बनी रहती है।

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मृतका के बेटे विशाल ने बताया कि परिवार की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष परेशानी होती है। प्रसव के कुछ माह पहले ही गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में मायके भेजना पड़ता है। परिवार को आशंका रहती है कि प्रसव के समय अचानक अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी तो एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकेगी। ऐसे में समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है। इसी डर के कारण गर्भवती महिलाओं को पहले ही मायके भेजने का फैसला लेना पड़ता है।

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विशाल के मुताबिक, रास्ते की परेशानी केवल बीमारी या आपात स्थिति तक सीमित नहीं है। परिवार में शादी-विवाह होने पर भी इसका असर दिखाई देता है। दूल्हा-दुल्हन को वाहन से घर तक पहुंचाना संभव नहीं हो पाता। उन्हें घर से कुछ दूरी पहले ही वाहन से उतरना पड़ता है। इसके बाद संकरे रास्ते से पैदल घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शादी जैसे खुशी के मौके पर भी यह परेशानी अब परिवारों के लिए सामान्य हो गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि किसी बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की स्थिति में भी दिक्कत होती है। वाहन घर तक नहीं पहुंचने के कारण मरीज को कई बार चारपाई या अन्य साधन से संकरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है। इस दौरान परिवार के साथ आसपास के लोगों की मदद लेनी पड़ती है।

विशाल ने जिला प्रशासन से रास्ते से जुड़े विवाद का समाधान कराने और आवागमन सुचारु कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रास्ता चौड़ा होने से चार घरों के परिवारों को राहत मिलेगी और आपात स्थिति में एंबुलेंस व अन्य वाहन भी आसानी से घर तक पहुंच सकेंगे।

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