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काशी में धर्मगुरु दलाईलामा, सभी के लिए की खुशहाली की कामना, मिनी तिब्बत में तब्दील हुआ सारनाथ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:59 PM IST
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दलाई लामा का स्वागत करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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परमपावन दलाई लामा शुक्रवार को सारनाथ पहुंचे। धर्मगुरु दलाईलामा के आने से पूरा सारनाथ मिनी तिब्बत में तब्दील हो गया। बौद्ध धर्म को मानने वाले देशों के अलावा काफी संख्या में लामा भी सारनाथ पहुंचे। इसके अलावा तिब्बत से निर्वासित लोग भी अपने धर्मगुरु की झलक पाने के लिए सारनाथ पहुंचे। शुक्रवार को दलाईलामा के आने के दौरान पूरा वातावरण तिब्बत के रंग में रंगा नजर आया।
काशी पहुंचते ही तिब्बती धर्मगुरु ने ट्विट करके सभी के लिए खुशहाली की कामना की है। उन्होंने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है कि मुझे विश्वास है कि हम खुशहाल दिल के साथ खुशहाल व्यक्तियों, खुशहाल समुदायों संग खुशहाल मानवता निभा सकते हैं, जिससे बेहतर ढंग से अपने अस्तित्व को संवारा जा सके।
शांत रक्षित पुस्तकाल के पास स्वागत में खड़े पद्मश्री प्रो. रामाशंकर त्रिपाठी ने जब तिब्बती धर्मगुरु को खाता पहनाकर स्वागत किया तो उन्होंने प्रो. त्रिपाठी को गले से लगा लिया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि धर्मगुरु के दर्शन और उनका सानिध्य पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
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बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार दलाई लामा के आगमन के मद्देनजर तिब्बती संस्था के मुख्य द्वार से लेकर सभा स्थल तक सड़क पर शुभांकर बनाए गए थे।
इन शुभांकर के बारे में तिब्बती संस्थान के प्रोफेसर नवांग तेम्बिल ने बताया कि धर्म के अनुसार 8 वस्तुएं जिसमे शंख, फूल, चक्र, गदा, कलश एवं तीन अन्य कलाकृतियां मंगल कलाकृति मानी गई हैं।
जिसके बनाने से हर काम शुभ होता है। यही आठ कलाकृतियां परम पावन के मार्ग पर बनाई गई हैं ताकि उनका आगमन शुभ और शांति से सम्पन्न हो। उन्होंने बताया कि ये शुभांकर सिर्फ महापुरुषों के आगमन के समय बनाए जाते हैं।
कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने बताया कि तिब्बती सरकार के निर्वासित राष्ट्रपति लोबसंग सेगे, पूर्व प्रधानमंत्री समदोंग रिनपोछे, शिक्षा मंत्री और संस्कृति मंत्री भी स्वर्णजयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।
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काशी पहुंचते ही तिब्बती धर्मगुरु ने ट्विट करके सभी के लिए खुशहाली की कामना की है। उन्होंने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है कि मुझे विश्वास है कि हम खुशहाल दिल के साथ खुशहाल व्यक्तियों, खुशहाल समुदायों संग खुशहाल मानवता निभा सकते हैं, जिससे बेहतर ढंग से अपने अस्तित्व को संवारा जा सके।
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शांत रक्षित पुस्तकाल के पास स्वागत में खड़े पद्मश्री प्रो. रामाशंकर त्रिपाठी ने जब तिब्बती धर्मगुरु को खाता पहनाकर स्वागत किया तो उन्होंने प्रो. त्रिपाठी को गले से लगा लिया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि धर्मगुरु के दर्शन और उनका सानिध्य पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
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बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार दलाई लामा के आगमन के मद्देनजर तिब्बती संस्था के मुख्य द्वार से लेकर सभा स्थल तक सड़क पर शुभांकर बनाए गए थे।
इन शुभांकर के बारे में तिब्बती संस्थान के प्रोफेसर नवांग तेम्बिल ने बताया कि धर्म के अनुसार 8 वस्तुएं जिसमे शंख, फूल, चक्र, गदा, कलश एवं तीन अन्य कलाकृतियां मंगल कलाकृति मानी गई हैं।
जिसके बनाने से हर काम शुभ होता है। यही आठ कलाकृतियां परम पावन के मार्ग पर बनाई गई हैं ताकि उनका आगमन शुभ और शांति से सम्पन्न हो। उन्होंने बताया कि ये शुभांकर सिर्फ महापुरुषों के आगमन के समय बनाए जाते हैं।
कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने बताया कि तिब्बती सरकार के निर्वासित राष्ट्रपति लोबसंग सेगे, पूर्व प्रधानमंत्री समदोंग रिनपोछे, शिक्षा मंत्री और संस्कृति मंत्री भी स्वर्णजयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।
लगी 70 फीट लंबी टीवी स्क्रीन
सारनाथ पहुंचे दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
दो दिवसीय संगोष्ठी के लिए संस्थान के खेल मैदान में पंडाल बनकर तैयार हो चुका है। पंडाल में दो हजार से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इसमें 14 फीट ऊंचा और 70 फीट लंबा टीवी स्क्रीन लगाया गया है। इसके साथ ही मंच को फूलों से भी सजाया गया है। मंच के पीछे बने स्क्रीन पर तिब्बती धर्मगुरु, नालंदा, सारनाथ के खंडहर और तिब्बती के अनुवाद केंद्र की तस्वीरें लगाई गई हैं।
कुलपति ने बताया कि दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का पूरा प्रसारण एफएम रेडियो के माध्यम से हिंदी में भी किया जाएगा। इसे सारनाथ क्षेत्र के श्रोता आसानी से सुन सकेंगे।
बौद्ध, तिब्बती अनुयायियों और हिंदी भाषी लोगों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। तिब्बती संस्थान में दलाईलामा के स्वागत के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दो दिन पहले से ही धर्मगुरु के सुरक्षाकर्मियों ने पूरे गेस्ट हाउस को अपनी निगरानी में ले लिया था।
पुलिस के अलावा संस्थान के सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्तैद किया गया था। बिना पास के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं थी। खुफिया एजेंसियों ने भी परिसर में डेरा डाल रखा है।
कुलपति ने बताया कि दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का पूरा प्रसारण एफएम रेडियो के माध्यम से हिंदी में भी किया जाएगा। इसे सारनाथ क्षेत्र के श्रोता आसानी से सुन सकेंगे।
बौद्ध, तिब्बती अनुयायियों और हिंदी भाषी लोगों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। तिब्बती संस्थान में दलाईलामा के स्वागत के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दो दिन पहले से ही धर्मगुरु के सुरक्षाकर्मियों ने पूरे गेस्ट हाउस को अपनी निगरानी में ले लिया था।
पुलिस के अलावा संस्थान के सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्तैद किया गया था। बिना पास के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं थी। खुफिया एजेंसियों ने भी परिसर में डेरा डाल रखा है।