Cyber Crime: विदेशी साइबर अपराधियों को टेलीग्राम से बेचते थे बैंक खाते, 53 लाख के लेनदेन का खुलासा; जांच तेज
Varanasi News: साइबर ठगी गिरोह मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में चार दिनों में 53 लाख रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ। आरोपी लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनकी किट और मोबाइल एक्सेस विदेशी साइबर अपराधियों को टेलीग्राम के जरिए भेजते थे। बदले में उन्हें 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।
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साइबर ठगी से जुड़े गिरोह की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। पहले से गिरफ्तार पांच आरोपियों के अलावा मऊ के घोसी थाना क्षेत्र के भीखमपुर निवासी प्रशांत सिंह और कमलेश कुमार विश्वकर्मा के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में सामने आया कि 12 से 15 जनवरी के बीच महज चार दिनों में कमलेश और सुजल सिंह के कोटक महिंद्रा बैंक खातों में करीब 53 लाख रुपये का लेनदेन हुआ था।
पुलिस के अनुसार कमलेश, प्रशांत और सुजल सिंह आपस में करीबी मित्र थे। करीब छह माह पहले रुपयों के लेनदेन को लेकर तीनों के बीच विवाद हो गया था। जांच के दौरान पता चला कि इस गिरोह में मिर्जापुर निवासी आदर्श चौबे, आजमगढ़ निवासी आशीष यादव और वाराणसी के नरिया निवासी युवराज भी शामिल थे। पुलिस ने आदर्श चौबे की आई-20 कार और आशीष यादव की थार गाड़ी भी बरामद की है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शुरुआत में बैंक खाते उपलब्ध कराने पर उन्हें आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। इसी लालच में गिरोह लगातार नए लोगों को अपने जाल में फंसाता रहा।
आरोपियों आशीष यादव, आदर्श, सुजल, युवराज और पीयूष ने पुलिस को बताया कि वे भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर विभिन्न बैंकों में उनके खाते खुलवाते थे। खाते खुलवाने के दौरान मोबाइल नंबर की जगह अपने कब्जे वाले फर्जी नंबर लिंक कराते थे। इसके बाद खाताधारकों से डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की आईडी, पासवर्ड और सिम कार्ड लेकर उन्हें केवल पांच हजार रुपये दे देते थे।
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पुलिस के मुताबिक, इसके बाद इन बैंक खातों की पूरी जानकारी विदेशी साइबर अपराधियों को टेलीग्राम के माध्यम से भेजी जाती थी। विदेशी साथी आरोपियों को एक एपीके फाइल उपलब्ध कराते थे, जिसमें एसएमएस फॉरवर्डर एप्लिकेशन पहले से मौजूद रहता था। इस एप्लिकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल कर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को लॉगिन किया जाता था। इसके बाद ओटीपी और अन्य बैंकिंग संदेश सीधे विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचने लगते थे, जिससे वे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए करते थे। पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।