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सुर गंगा संगीत महोत्सवः शिव तांडव से राधा-कृष्ण के महारास तक थिरके पांव

Mon, 01 May 2017 12:57 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 01 May 2017 12:57 AM IST
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cultural dance performance at sur ganga music festival
कृष्ण महारास से सुर गंगा संगीत महोत्सव की शाम यादगार बनी - फोटो : अमर उजाला
गंगा के सुरम्य तट पर रविवार की रात गायन, वादन और नृत्य की अविरल त्रिवेणी में देर रात तक संगीत प्रेमियों ने गोता लगाया। ध्रुपद अंग के साथ ख्याल और ठुमरी की बंदिशें यादगार बनीं तो सरोद और गिटार के तारों पर भी तन-मन झंकृत हो उठा।
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यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में बनारस को संगीत के शहर के रूप में शामिल किए जाने के उपलक्ष्य में भैंसासुर घाट पर आयोजित सुर गंगा संगीत महोत्सव की शाम यादगार बन गई। सौरभ-गौरव मिश्र ने पारंपरिक बंदिशों पर कथक नृत्य पेश किया।
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गणेश वंदना के बाद शिव तांडव की अद्भुत प्रस्तुति रही। करमवीर सिंह के नेतृत्व में कृष्ण महारास में सबसे पहले पुष्पांजली हुई। इसके बाद राधा विरह और यमुना तट पर गोपी और राधा कृष्ण के साथ रास नृत्य यादगार रहा।
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आबिद जमाल ने सुरगंगा थीम सांग की प्रस्तुति की। बतौर मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कलकारों को सम्मानित किया। 

भवरा रे हम परदेशी लोग...

cultural dance performance at sur ganga music festival
गंगा को समर्पित बंदिश बजाकर तालियां बटोरीं। - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत हुई प्रो ऋत्विक सान्याल की ध्रुपद गायकी से। सबसे पहले राग जोग में आलाप के बाद शिव स्तुति की बंदिश- योगीवर जय शिव... की प्रस्तुति की। इसके बाद उन्होंने डागर घराने की परंपरा में राग अड़ाना में निबद्ध पारंपरिक ध्रुपद शिव शिव शिव शंकर आदि देव... पेश किया। उनके साथ तानपूरे पर आशीष जायसवाल एवं रूचि मिश्रा तथा पखावज पर अंकित पारिख ने संगत की। 

पं. विकास महाराज के सरोद के तार भी खूब झंकृत हुए। उन्होंने सबसे पहले राग पूरिया धनाश्री में तीन ताल मध्य लय और फिर द्रुत लय में गतकारी की। इसके बाद गंगा को समर्पित बंदिश बजाकर तालियां बटोरीं।

इनके बाद शास्त्रीय गायिका सुचरिता गुप्ता ने राग बागेश्री में तीन ताल में निबद्ध बंदिश- ऐ री  मैं कैसे घर जाऊं... की प्रस्तुति की। फिर राग मिश्र पीलू में ठुमरी- भवरा रे हम परदेशी लोग... पेश कर उन्होंने वाहवाही लूटी।

तबले पर ललित कुमार, वायलिन पर सुखदेव मिश्र और हारमोनियम पर सौरभ श्रीवास्तव ने संगत की। इनके बाद सितार सम्राट भारत रत्न पं. रविशंकर की शिष्या प्रो. कृष्णा चक्रवर्ती ने राग रागेश्री में अलाप, जोड़, झाला के बाद गत बजाकर मुग्ध कर दिया। तबले पर पं. कुबेरनाथ मिश्र ने संगत की। 
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