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नदी में भैंस को नहलाने गए किसान की डूबने से मौत, हल्ला मचा- मगरमच्छ ने दबोच लिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंदौली
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:51 AM IST
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मौके पर जुटे ग्रामीण और रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
चंदौली जिले के पचफेड़ियां गांव के पास नदी में भैंस को नहलाने गए पशुपालक लाल जी यादव (55) की चंद्रप्रभा नदी में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद चर्चा रही कि अधेड़ को मगरमच्छ गहरे पानी में खींचकर ले गया होगा।
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से किसी प्रकार शव को नदी से बाहर निकाला। हालांकि मृतक के शरीर पर मगरमच्छ के प्रहार के कोई निशान नहीं मिले। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
पचफेड़िया गांव निवासी पशुपालक लालजी यादव रोज की तरह गुरुवार को भी अपने भैंसों को चराने के बाद उन्हें नहलाने के लिए गांव के पास स्थित चन्द्रप्रभा नदी में गए थे। दोपहर में नदी के किनारे गये लोगों ने उन्हें नदी में स्थित सेवार तथा झाड़ियों में फंसा हुआ देखकर शोर मचाने लगे।
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शोर सुनकर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए तथा मगरमच्छ के हमले में लालजी की मौत होने की आशंका जताने लगे। सूचना मिलने पर चकिया कोतवाल अरविंद सिंह सिसौदिया तथा चन्द्रप्रभा रेंजर ताराशंकर यादव पुलिस फोर्स एवं वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकाला।
शव पर लंगोट के अलावा कुछ नहीं था, लालजी का कपड़ा तथा छाता भी नदी में ही उतराया था। कोतवाल तथा रेंजर ने मगरमच्छ के हमले से इंकार कर रहे हैं। लेकिन दुर्घटना स्थल के आस-पास मगरमच्छ अक्सर देखे जाते हैं।
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सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से किसी प्रकार शव को नदी से बाहर निकाला। हालांकि मृतक के शरीर पर मगरमच्छ के प्रहार के कोई निशान नहीं मिले। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
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पचफेड़िया गांव निवासी पशुपालक लालजी यादव रोज की तरह गुरुवार को भी अपने भैंसों को चराने के बाद उन्हें नहलाने के लिए गांव के पास स्थित चन्द्रप्रभा नदी में गए थे। दोपहर में नदी के किनारे गये लोगों ने उन्हें नदी में स्थित सेवार तथा झाड़ियों में फंसा हुआ देखकर शोर मचाने लगे।
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शोर सुनकर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए तथा मगरमच्छ के हमले में लालजी की मौत होने की आशंका जताने लगे। सूचना मिलने पर चकिया कोतवाल अरविंद सिंह सिसौदिया तथा चन्द्रप्रभा रेंजर ताराशंकर यादव पुलिस फोर्स एवं वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकाला।
शव पर लंगोट के अलावा कुछ नहीं था, लालजी का कपड़ा तथा छाता भी नदी में ही उतराया था। कोतवाल तथा रेंजर ने मगरमच्छ के हमले से इंकार कर रहे हैं। लेकिन दुर्घटना स्थल के आस-पास मगरमच्छ अक्सर देखे जाते हैं।
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वन विभाग मगरमच्छों के हमले के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है। वन विभाग द्वारा मगरमच्छों की कालोनी के आस-पास बसे गांवों के लोगों को मगरमच्छ के हमले के दौरान बचाव के प्रति कोई जागरूकता अभियान तक नहीं चलाया जाता है, न ही विभाग द्वारा मगरमच्छों की कालोनी के आस-पास कोई खतरे का संकेत देने वाला बोर्ड ही लगाया गया है। वन विभाग के इस रवैये क्षेत्रीय लोगों में काफी नाराजगी है। वहीं पुलिस के पास भी मगरमच्छों के हमले से निपटने की न तो कोई ठोस योजना है न कोई रेस्क्यू टीम है। जिससे नागरिक भगवान भरोसे हैं।