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वाराणसी : गुरुजी का दामन दागदार, फर्जीवाड़े से पाई नौकरी
टीम डिजिटल, वाराणसी
Updated Fri, 03 Feb 2017 11:57 AM IST
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सेवापुरी विकास खंड के हरिहरपुर गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने अपने इकलौते पुत्र आशुतोष कुमार मिश्र को शिक्षा विभाग में नौकरी तो दिला दी लेकिन अब उनके फर्जीवाड़े की पोल खुलने लगी है। इसकी शिकायत एबीएसए से की गई है।
खंड शिक्षा अधिकारी बीके श्रीवास्तव का कहना है कि शिकायत की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। आशुतोष ने रामेश्वर स्थित श्री युगल बिहारी इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की रेगुलर पढ़ाई कर 1999 में तृतीय श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की थी। 2001 में यहीं से इंटरमीडिएट किया।
हाईस्कूल के प्रमाणपत्र में इनकी जन्मतिथि 02-02-1984 है। शासन ने जब शिक्षामित्र के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई तो उसमें आशुतोष की मेरिट कम थी।
इसके बाद आशुतोष ने अपना नाम बदलकर अनिरुद्ध कुमार मिश्र के नाम से श्री हनुमत संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, हाथी से 1999 में पूर्व मध्यमा (हाईस्कूल) प्रथम श्रेणी और उत्तर मध्यमा (इंटरमीडिएट) प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षा मित्र के पद पर अपना चयन करा लिया।
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पूर्व मध्यमा के प्रमाणपत्र में इनकी जन्मतिथि 05-07-1984 है। इन्हीं शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर अनिरुद्ध अपने गांव हरिहरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी कर रहे हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा जनसूचना के तहत कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने किया है।
मामले के शिकायतकर्ता त्रिभुवन नारायन पांडेय का दावा है कि राजेंद्र के एक ही पुत्र आशुतोष हैं। एक ही व्यक्ति यूपी बोर्ड और संस्कृत बोर्ड की रेगुलर परीक्षा कैसे दे सकता है? इस पर राजेंद्र का कहना है कि मेरे दो पुत्र थे, जिनमें एक बेटे आशुतोष की मृत्यु हो चुकी है और दूसरा अनिरुद्ध बेटा गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक है।
शिकायतकर्ता के आरोप बेबुनियाद हैं। जवाब में शिकायतकर्ता कहते हैं कि पांच माह तीन दिन में दूसरा बेटा अनिरुद्ध कैसे पैदा हो गया? ग्राम पंचायत अधिकारी विजय कुमार कन्नौजिया का दावा है कि कुटुंब रजिस्टर में आशुतोष नाम अंकित है।
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खंड शिक्षा अधिकारी बीके श्रीवास्तव का कहना है कि शिकायत की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। आशुतोष ने रामेश्वर स्थित श्री युगल बिहारी इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की रेगुलर पढ़ाई कर 1999 में तृतीय श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की थी। 2001 में यहीं से इंटरमीडिएट किया।
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हाईस्कूल के प्रमाणपत्र में इनकी जन्मतिथि 02-02-1984 है। शासन ने जब शिक्षामित्र के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई तो उसमें आशुतोष की मेरिट कम थी।
इसके बाद आशुतोष ने अपना नाम बदलकर अनिरुद्ध कुमार मिश्र के नाम से श्री हनुमत संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, हाथी से 1999 में पूर्व मध्यमा (हाईस्कूल) प्रथम श्रेणी और उत्तर मध्यमा (इंटरमीडिएट) प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षा मित्र के पद पर अपना चयन करा लिया।
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पूर्व मध्यमा के प्रमाणपत्र में इनकी जन्मतिथि 05-07-1984 है। इन्हीं शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर अनिरुद्ध अपने गांव हरिहरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी कर रहे हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा जनसूचना के तहत कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने किया है।
मामले के शिकायतकर्ता त्रिभुवन नारायन पांडेय का दावा है कि राजेंद्र के एक ही पुत्र आशुतोष हैं। एक ही व्यक्ति यूपी बोर्ड और संस्कृत बोर्ड की रेगुलर परीक्षा कैसे दे सकता है? इस पर राजेंद्र का कहना है कि मेरे दो पुत्र थे, जिनमें एक बेटे आशुतोष की मृत्यु हो चुकी है और दूसरा अनिरुद्ध बेटा गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक है।
शिकायतकर्ता के आरोप बेबुनियाद हैं। जवाब में शिकायतकर्ता कहते हैं कि पांच माह तीन दिन में दूसरा बेटा अनिरुद्ध कैसे पैदा हो गया? ग्राम पंचायत अधिकारी विजय कुमार कन्नौजिया का दावा है कि कुटुंब रजिस्टर में आशुतोष नाम अंकित है।