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ठेकेदार आत्महत्या : पूर्व अधिशासी अभियंता की पत्नी के नाम फर्म, जांच में खुलेंगे कई और राज

Mon, 02 Sep 2019 06:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 02 Sep 2019 06:30 PM IST
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ठेकेदार अवधेश की आत्महत्या मामले की कायदे से जांच हुई तो कई और फंसेंगे। साथ ही कई राज भी खुल जाएंगे। वहीं अब जांच से पीडब्ल्यूडी में हुए भ्रष्टाचारों की विभागीय परत खुलनी शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि इस मामले में विभागीय कार्रवाई तक बात सीमित नहीं होनी चाहिए। संपत्तियों की जांच होनी चाहिए और अवैध तरीके से हासिल की गई संपत्तियां अटैच करनी चाहिए।

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सूत्रों की मानें तो वाराणसी में हुए प्रवासी सम्मेलन के दौरान प्रांतीय खंड में तैनात रहे अधिशासी अभियंता और वर्तमान में जौनपुर के अधीक्षण अभियंता आरआर गंगवार ने पत्नी विमला गंगवार के नाम से फर्म बनाई थी। लखनऊ के गोमतीनगर के पते पर तवस एक्सप्रेसवेज लिमिटेड के नाम से फर्म पंजीकृत कराई गई थी। इसमें उन्होंने अपनी हैसियत 1.25 करोड़ रुपये दिखाई थी।
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पिछले साल दिसंबर-जनवरी में इस फर्म ने काम कराने के लिए आवेदन किया था। काम मिलता इससे पहले भेद खुला गया कि यह फर्म गंगवार की पत्नी की है। नियम है कि पीडब्ल्यूडी में वही फर्म काम करेगी, जिसका कोई रिश्तेदार या परिचित विभाग में न हो। इस मामले में कार्रवाई न हो, इसके लिए नीचे से लेकर ऊपर तक के कई खैरख्वाहों ने पैरवी की थी।

बीती 28 अगस्त को ठेकेदार अवधेश ने पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर के कार्यालय में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में दो जेई मनोज सिंह, यूएस पांडेय, तीन एई आशुतोष सिंह, एसडी मिश्रा, आरपी दूबे, चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह और बिजली विभाग के इंस्पेक्टर के खिलाफ नामजद मुकदमा कैंट थाने में दर्ज है।

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मुकदमा दर्ज होने के बाद जुगाड़ का खेल शुरू हो गया है और हर स्तर पर शह और मात का खेल चल रहा है। कुछ बड़े अधिकारी पीडब्ल्यूडी के चहेतों को बचाने में लग गए हैं। यही नहीं बिना ऑनलाइन टेंडर चहेते ठेकेदारों से काम कराया गया है।

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