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नक्सलियों को मुहैया कराए जाते थे कारतूस
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 23 Jul 2016 02:18 AM IST
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बरामद कारतूस
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कैंट रेलवे स्टेशन से 1250 कारतूस के साथ गिरफ्तार दोनों आरोपियों का गुरुवार रात चालान कर दिया गया। वहीं कारतूस बरामदगी मामले में मुरादाबाद और आरा (बिहार) में जीआरपी की टीमों ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि ये कारतूस बिहार के नक्सलियों को मुहैया कराए जाते थे। सीआरपीएफ भी मामले की जांच में जुट गई है। सीआरपीएफ की 95वीं बटालियन के इंस्पेक्टर एसके मिश्रा ने जीआरपी थाना से पूरी जानकारी हासिल की। पूरा मामला इस रैकेट में पेशेवर अपराधियों के शामिल होने और बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों में राजनयन कुमार और राजा बाबू नालंदा (बिहार) के हरनौत थाना के पुआरी के रहने वाले हैं। जीआरपी इंस्पेक्टर शिव प्रकाश सोनकर ने बताया कि राजनयन से इंसास रायफल में इस्तेमाल होने वाले 5.56 एमएम बोर के 1000 और राजा बाबू से एसएलआर के 250 कारतूस बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपी इन कारतूसों की खरीद-फरोख्त कर उन्हें नक्सलियों को देते थे।
इस बीच जांच के लिए आरा पहुंची जीआरपी की टीम को पता चला है कि सीआरपीएफ की आरा स्थित 47वीं बटालियन में तैनात शैलेंद्र सिंह तीन-चार दिन से लापता है। टीम को सीआरपीएफ ने शैलेंद्र की गतिविधियां भी संदिग्ध बताई हैं। उधर, गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि शैलेंद्र ने उन्हें कारतूस लेने मुरादाबाद भेजा था। वहां पर विजय सिंह नाम के एक व्यक्ति से उनकी मुलाकात हुई थी। आरोपियों द्वारा मुहैया कराए गए विजय सिंह के फोन नंबर की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि वह सिम फर्जी आईडी से लिया गया था। उस नंबर से सिर्फ शैलेंद्र से बात की गई थी।
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मामला सामने आने के बाद से रामपुर सीआरपीएफ सेंटर और मुरादाबाद पुलिस अफसरों के होश उड़ गए हैं। सीआरपीएफ रामपुर, पुलिस लाइन मुरादाबाद, पीएसी, पुलिस अकादमी, पीटीसी और पीटीएस में शुक्रवार को अफसरों ने अपनी मौजूदगी में शस्त्रागारों में कारतूसों व हथियारों की गिनती कराई। दोनों स्थानों पर अफसरों ने शस्त्रागारों के इंचार्जों से पिछले एक साल का पूरा रिकार्ड तलब किया है। पूछा गया है कि कब, किसने और कितने कारतूस दागे हैं।
एसटीएफ गुरुवार रात वाराणसी से दोनों अभियुक्तों को लेकर मुरादाबाद आई थी। यहां देर रात तक टीम ने अफसरों की मौजूदगी में पुलिस लाइन के अलावा सभी पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में शिनाख्त परेड कराई थी। अभियुक्तों के सामने से एक-एक पुलिसकर्मी को गुजारा गया। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी पर अभियुक्तों की नजर ठहरी तो वह संदेह के घेरे में आ गया। इसके बाद टीम उस पुलिस वाले को अपने साथ ले गई।
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गिरफ्तार आरोपियों में राजनयन कुमार और राजा बाबू नालंदा (बिहार) के हरनौत थाना के पुआरी के रहने वाले हैं। जीआरपी इंस्पेक्टर शिव प्रकाश सोनकर ने बताया कि राजनयन से इंसास रायफल में इस्तेमाल होने वाले 5.56 एमएम बोर के 1000 और राजा बाबू से एसएलआर के 250 कारतूस बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपी इन कारतूसों की खरीद-फरोख्त कर उन्हें नक्सलियों को देते थे।
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इस बीच जांच के लिए आरा पहुंची जीआरपी की टीम को पता चला है कि सीआरपीएफ की आरा स्थित 47वीं बटालियन में तैनात शैलेंद्र सिंह तीन-चार दिन से लापता है। टीम को सीआरपीएफ ने शैलेंद्र की गतिविधियां भी संदिग्ध बताई हैं। उधर, गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि शैलेंद्र ने उन्हें कारतूस लेने मुरादाबाद भेजा था। वहां पर विजय सिंह नाम के एक व्यक्ति से उनकी मुलाकात हुई थी। आरोपियों द्वारा मुहैया कराए गए विजय सिंह के फोन नंबर की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि वह सिम फर्जी आईडी से लिया गया था। उस नंबर से सिर्फ शैलेंद्र से बात की गई थी।
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मामला सामने आने के बाद से रामपुर सीआरपीएफ सेंटर और मुरादाबाद पुलिस अफसरों के होश उड़ गए हैं। सीआरपीएफ रामपुर, पुलिस लाइन मुरादाबाद, पीएसी, पुलिस अकादमी, पीटीसी और पीटीएस में शुक्रवार को अफसरों ने अपनी मौजूदगी में शस्त्रागारों में कारतूसों व हथियारों की गिनती कराई। दोनों स्थानों पर अफसरों ने शस्त्रागारों के इंचार्जों से पिछले एक साल का पूरा रिकार्ड तलब किया है। पूछा गया है कि कब, किसने और कितने कारतूस दागे हैं।
एसटीएफ गुरुवार रात वाराणसी से दोनों अभियुक्तों को लेकर मुरादाबाद आई थी। यहां देर रात तक टीम ने अफसरों की मौजूदगी में पुलिस लाइन के अलावा सभी पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में शिनाख्त परेड कराई थी। अभियुक्तों के सामने से एक-एक पुलिसकर्मी को गुजारा गया। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी पर अभियुक्तों की नजर ठहरी तो वह संदेह के घेरे में आ गया। इसके बाद टीम उस पुलिस वाले को अपने साथ ले गई।