{"_id":"59441bad4f1c1b6b3e8b4746","slug":"abu-salem-case-of-murder-in-azamgarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आजमगढ़ में अबू सलेम पर हत्या की साजिश का दर्ज है मुकदमा ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आजमगढ़ में अबू सलेम पर हत्या की साजिश का दर्ज है मुकदमा
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:25 PM IST
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अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम
- फोटो : self
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अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम के विरुद्ध मुंबई, दिल्ली समेत अन्य बड़े महानगरों में भले कई बड़े आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं लेकिन आजमगढ़ में उसके विरुद्ध सिधारी थाने में हत्या की साजिश रचने का सिर्फ एक मामला दर्ज है।
अबू सलेम ने इजराइल में हुई पंचायत के दौरान नोंकझोंक के बाद चेतावनी देने के बाद सिधारी थाना क्षेत्र के छतवारा गांव निवासी पठान की हत्या कराई थी। घटना के बाद सिधारी थाने की पुलिस ने शूटरों को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन सलेम की गिरफ्तारी शेष रह गई। समय के साथ-साथ मुकदमे की कार्रवाई भी शिथिल हो गई।
घटनाक्रम पर गौर करें तो आजमगढ़ जिले के रहने वाले दो लोगों की इजराइल में कंपनी थी। जिसमें क्षेत्र के तमाम मजदूर काम करते थे। जानकारों के मुताबिक एक कंपनी मालिक ने दूसरी कंपनी के सारे मजदूरों को अपने यहां काम पर रख लिया।
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इस बात को लेकर दोनों कंपनी मालिकों में विवाद सुलझाने के लिए इजराइल में पंचायत आयोजित की गई। इसमें एक कंपनी की मालिक की तरफ से सिधारी थाना क्षेत्र के छतवारा गांव निवासी एक पठान और दूसरी तरफ से अबू सलेम गया हुआ था।
बातचीत के दौरान पठान और अबू सलेम में नोंकझोंक हुई थी। इस दौरान पठान ने अबू सलेम पर तंज कसा कि अब पठानों की पंचायत को जुलाहा तय करेगा। इस पर सलेम ने पठान को चेतावनी दी थी कि यह जुलाहा तुम्हें तुम्हारे घर में घुसकर मारेगा। हालांकि यह बात वहीं पर शांत हो गई।
लेकिन वर्ष 1996-97 में पठान जब अपने घर आया हुआ था और बाजार में सैलून में दाढ़ी बनवा रहा था। तभी सलेम के दो शूटर बाइक से पहुंचे और ताबड़तोड़ गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में पठान के घर वालों ने दो शूटरों के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस मामले में अबू सलेम के विरुद्ध आईपीसी की धारा 120 बी के तहत साजिश रचने का केस दर्ज हुआ। हालांकि इस मामले में पुलिस ने शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया लेकिन सलेम तक नहीं पहुंच पाई। समय बीतने के साथ-साथ मामला भी दब गया।
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अबू सलेम ने इजराइल में हुई पंचायत के दौरान नोंकझोंक के बाद चेतावनी देने के बाद सिधारी थाना क्षेत्र के छतवारा गांव निवासी पठान की हत्या कराई थी। घटना के बाद सिधारी थाने की पुलिस ने शूटरों को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन सलेम की गिरफ्तारी शेष रह गई। समय के साथ-साथ मुकदमे की कार्रवाई भी शिथिल हो गई।
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घटनाक्रम पर गौर करें तो आजमगढ़ जिले के रहने वाले दो लोगों की इजराइल में कंपनी थी। जिसमें क्षेत्र के तमाम मजदूर काम करते थे। जानकारों के मुताबिक एक कंपनी मालिक ने दूसरी कंपनी के सारे मजदूरों को अपने यहां काम पर रख लिया।
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इस बात को लेकर दोनों कंपनी मालिकों में विवाद सुलझाने के लिए इजराइल में पंचायत आयोजित की गई। इसमें एक कंपनी की मालिक की तरफ से सिधारी थाना क्षेत्र के छतवारा गांव निवासी एक पठान और दूसरी तरफ से अबू सलेम गया हुआ था।
बातचीत के दौरान पठान और अबू सलेम में नोंकझोंक हुई थी। इस दौरान पठान ने अबू सलेम पर तंज कसा कि अब पठानों की पंचायत को जुलाहा तय करेगा। इस पर सलेम ने पठान को चेतावनी दी थी कि यह जुलाहा तुम्हें तुम्हारे घर में घुसकर मारेगा। हालांकि यह बात वहीं पर शांत हो गई।
लेकिन वर्ष 1996-97 में पठान जब अपने घर आया हुआ था और बाजार में सैलून में दाढ़ी बनवा रहा था। तभी सलेम के दो शूटर बाइक से पहुंचे और ताबड़तोड़ गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में पठान के घर वालों ने दो शूटरों के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस मामले में अबू सलेम के विरुद्ध आईपीसी की धारा 120 बी के तहत साजिश रचने का केस दर्ज हुआ। हालांकि इस मामले में पुलिस ने शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया लेकिन सलेम तक नहीं पहुंच पाई। समय बीतने के साथ-साथ मामला भी दब गया।
एसपी के परिवार को उड़ाने की दी थी धमकी
abu salem
- फोटो : अमर उजाला
मुबारकपुर थाने की पुलिस ने अंडरवर्ड डान अबू सलेम के भाई को दहेज हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। भाई को छुड़ाने के लिए अबू सलेम ने ना केवल एड़ीचोटी का जोर लगा दिया बल्कि तत्कालीन एसपी के परिवार को उड़ाने की धमकी तक दे डाली। पुलिस ने उसकी धमकी की परवाह किए बगैर ही आगे की कार्रवाई जारी रखी।
जानकारों के मुताबिक अबू सलेम के बड़े भाई अबूजैस की शादी मुबारकपुर कस्बे में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद अबूजैस की पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में अबूजैस के विरुद्ध मुबारकपुर थाने में दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
वर्ष 1998 में मुबारकपुर थाने के एसओ रहे उमेश जायसवाल ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उधर, भाई की गिरफ्तारी होने के बाद अबू सलेम ने तत्कालीन एसपी सुनील कुमार गुप्ता पर अपने भाई को छोड़ने का दबाव बनाया।
एसपी ने जब रिहा करने से इंकार कर दिया तो वह फोन कर एसपी को परिवार सहित बम से उड़ाने की धमकी दी थी।
जानकारों के मुताबिक अबू सलेम के बड़े भाई अबूजैस की शादी मुबारकपुर कस्बे में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद अबूजैस की पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में अबूजैस के विरुद्ध मुबारकपुर थाने में दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
वर्ष 1998 में मुबारकपुर थाने के एसओ रहे उमेश जायसवाल ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उधर, भाई की गिरफ्तारी होने के बाद अबू सलेम ने तत्कालीन एसपी सुनील कुमार गुप्ता पर अपने भाई को छोड़ने का दबाव बनाया।
एसपी ने जब रिहा करने से इंकार कर दिया तो वह फोन कर एसपी को परिवार सहित बम से उड़ाने की धमकी दी थी।
डॉन के नाम पर अब तक हो रही थी वसूली
अबु सलेम
अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम के नाम पर आजमगढ़ के रहने वाले उसके गुर्गे व्यापारियों और विदेश में रहने वालों से वसूली करते थे। इसमें देवगांव कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले कुछ लोगों का नाम शामिल है।
ये लोग अपने आपको अबू सलेम का रिश्तेदार बताकर ना केवल क्षेत्र के धनाड्य लोगों से धनउगाही करते, बल्कि विदेश से कमाकर घर आने वालों से भी रुपये वसूलते थे। अबू सलेम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके गुर्गे लोगों से यह कहकर धन उगाही कर रहे थे कि भाई ने कहा है।
क्योंकि जमानत कराने और वकील को फीस देने में अधिक रुपये लग रहे हैं। गुर्गों की धमकी पर व्यापारियों को लगता था कि यदि रुपये नहीं दिए और अबू सलेम जेल से छुट गया तो उनकी और परिवार की खैर नहीं होगी।
इसी भय के चलते लोग गुर्गों को रुपये दे दिया करते थे। जबकि कुछ लोग यह मानकर रुपये देते थे कि उसके जेल से छूट जाने के बाद पुन: उन्हें संरक्षण मिलने लगेगा।
ये लोग अपने आपको अबू सलेम का रिश्तेदार बताकर ना केवल क्षेत्र के धनाड्य लोगों से धनउगाही करते, बल्कि विदेश से कमाकर घर आने वालों से भी रुपये वसूलते थे। अबू सलेम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके गुर्गे लोगों से यह कहकर धन उगाही कर रहे थे कि भाई ने कहा है।
क्योंकि जमानत कराने और वकील को फीस देने में अधिक रुपये लग रहे हैं। गुर्गों की धमकी पर व्यापारियों को लगता था कि यदि रुपये नहीं दिए और अबू सलेम जेल से छुट गया तो उनकी और परिवार की खैर नहीं होगी।
इसी भय के चलते लोग गुर्गों को रुपये दे दिया करते थे। जबकि कुछ लोग यह मानकर रुपये देते थे कि उसके जेल से छूट जाने के बाद पुन: उन्हें संरक्षण मिलने लगेगा।