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मऊ से गाजीपुर आ रही रोडवेज बस में भरा धुंआ, यात्रियों में अफरा-तफरी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/गाजीपुर
Updated Sun, 12 Feb 2017 07:14 PM IST
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परिवहन विभाग की ओर से खटरा बसों के संचालन के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। रविवार को मऊ से गाजीपुर आ रही मऊ डिपो की रोडवेज बस में शार्ट सर्किट होने से धुंआ भर गया। स्टेशन रोड पर हुई इस घटना से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
बस रूकते ही यात्री दरवाजे और खिड़की के शीशे को तोड़कर बाहर निकल गए। बस के बंद हो जाने के बाद धुंआ खत्म हुआ। विधान सभा चुनाव के मद्देनजर रोडवेज की बसों के अन्य जनपदों में चले जाने पर परिवहन विभाग की ओर से खटरा बसों को दौड़ाने का काम सड़कों पर किया जा रहा है।
यहीं नहीं इन खटरा बसों को दौड़ाने के लिए विभाग की ओर से किलोमीटर का निर्धारण भी किया गया है।
खटारा बस संचालन का ही नतीजा रहा कि मऊ डिपो की बस में तकनीकी गड़बड़ी के चलते धुंआ भर गया।
किसी हादसे की आशंका से घबराए यात्री बस से कूद पड़े। यात्रियों में मची अफरा-तफरी को देख स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई। चालक और परिचालक ने बताया कि मऊ से गाजीपुर की दूरी 40 किलोमीटर हैं।
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40 किलोमीटर की दूरी तय करने पर जब यह स्थिति है तो डिपो की ओर से मिले 236 किलोमीटर के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि विधान सभा चुनाव में रोडवेज की बसें लग जाने से डिपो की ओर से निलामी के लिए खड़ी बसों को ही चलाया जा रहा है। यहीं नहीं निर्धारित किलोमीटर तक बस का संचालन नहीं होने से वेतन में से कटौती कर ली जाती है। अधिकांश बसें खटारा हैं।
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बस रूकते ही यात्री दरवाजे और खिड़की के शीशे को तोड़कर बाहर निकल गए। बस के बंद हो जाने के बाद धुंआ खत्म हुआ। विधान सभा चुनाव के मद्देनजर रोडवेज की बसों के अन्य जनपदों में चले जाने पर परिवहन विभाग की ओर से खटरा बसों को दौड़ाने का काम सड़कों पर किया जा रहा है।
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यहीं नहीं इन खटरा बसों को दौड़ाने के लिए विभाग की ओर से किलोमीटर का निर्धारण भी किया गया है।
खटारा बस संचालन का ही नतीजा रहा कि मऊ डिपो की बस में तकनीकी गड़बड़ी के चलते धुंआ भर गया।
किसी हादसे की आशंका से घबराए यात्री बस से कूद पड़े। यात्रियों में मची अफरा-तफरी को देख स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई। चालक और परिचालक ने बताया कि मऊ से गाजीपुर की दूरी 40 किलोमीटर हैं।
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40 किलोमीटर की दूरी तय करने पर जब यह स्थिति है तो डिपो की ओर से मिले 236 किलोमीटर के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि विधान सभा चुनाव में रोडवेज की बसें लग जाने से डिपो की ओर से निलामी के लिए खड़ी बसों को ही चलाया जा रहा है। यहीं नहीं निर्धारित किलोमीटर तक बस का संचालन नहीं होने से वेतन में से कटौती कर ली जाती है। अधिकांश बसें खटारा हैं।