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यूपी: छह साल की मूक बधिर से दुष्कर्म, 23 दिन की सुनवाई में दोषी को आजीवन कारावास

Mon, 15 Feb 2021 09:54 PM IST
हरि User अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: हरि User Updated Mon, 15 Feb 2021 09:54 PM IST
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Crime in Mirzapur court order Six year old mute deaf molested life imprisonment
court Order

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के मड़िहान थाना क्षेत्र स्थित एक गांव की छह साल की मूक बधिर बालिका से दुष्कर्म के मामले में महज 23 दिन की सुनवाई में सोमवार को सजा सुनाई गई। न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अच्छे लाल सरोज ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी को मौत होने तक जेल में ही रहना पड़ेगा। उस पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।

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आरोप के अनुसार, सात जनवरी की रात मूक बधिर बालिका को जंगल में ले जाकर युवक ने दुष्कर्म किया था। परिजनों को बालिका ने इशारे से घटना के बारे में जानकारी दी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी राकेश यादव के खिलाफ पॉक्सो, दुष्कर्म और एससीएसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।

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19 जनवरी को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया

 

Crime in Mirzapur court order Six year old mute deaf molested life imprisonment

विवेचक सीओ प्रभात राय ने 19 जनवरी को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। फिर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। विशेष लोक अभियोजक सुनीता गुप्ता ने लगातार चली सुनवाई में पीड़िता, उसकी मां, मूक बधिर एक्सपर्ट और मेडिकल करने वाले डॉक्टर समेत 10 गवाह का परीक्षण कराया। न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने साक्ष्य, गवाहों के बयान और अधिवक्ताओं की दलील के आधार पर दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 

छुट्टी के चलते तीन दिन बंद थी अदालत

बालिका से दुष्कर्म मामले में 23 दिन की सुनवाई में फैसला सुनाकर अदालत ने नजीर पेश की है। सात जनवरी को बालिका के साथ दुष्कर्म हुआ था। 19 जनवरी को आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत होने के बाद लगातार सुनवाई हुई। आरोप पत्र दाखिल होने के 26 दिन बाद फैसला आया। इन 26 दिनों में तीन दिन छुट्टी होने के चलते अदालत बंद थी। 

पीड़ित बालिका को त्वरित न्याय मिले, इसके लिए विवेचना पूरी कर आरोप पत्र जल्द न्यायालय में पेश करने की कोशिश की गई। सात जनवरी की घटना के बाद 19 जनवरी को विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मुकदमा दर्ज होने पर पीड़ित परिवार के खाते में ढाई लाख भेजा गया था। अब फैसला आने के बाद ढाई लाख खाते में भेजवाया जाएगा। - महेश सिंह अत्री, एएसपी नक्सल

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