{"_id":"5b6485f94f1c1bac7d8b6265","slug":"construction-cost-increased-after-flyover-accident-in-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बनारसः फ्लाईओवर हादसे के बाद बढ़ी लागत, अब पुल बनाने में इतने रुपए होंगे खर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारसः फ्लाईओवर हादसे के बाद बढ़ी लागत, अब पुल बनाने में इतने रुपए होंगे खर्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 04 Aug 2018 11:30 AM IST
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बनारस के चौकाघाट फ्लाईओवर को बनाने में अब पहले से ज्यादा रुपये खर्च होंगे। दरअसल पूर्व में जो डिजाइन थी उसके हिसाब से 130 करोड़ रुपये में बनना था। 15 मई को हादसे के बाद सुरक्षा के बाकी बंदोबस्त करने और काम जल्द समाप्त करने के लिए कंक्रीट के बजाय लोहे की बीम लगाई जानी है। इससे अब इसकी लागत 207 करोड़ हो जाएगी। इसका इस्टीमेट सेतु निगम ने बना लिया है। पहले की अपेक्षा अब इसकी लागत में 77 करोड़ रुपये की बढ़ गई है।
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि पूर्व की डिजाइन के अनुसार काम होता तो मार्च 2020 तक तैयार होता। अब इसे मार्च 2019 तक तैयार करना है। इस काम को जल्द निबटाने के लिए लोहे के 163 बीम लगाई जाएंगी।
पहले कंक्रीट की बीम का वजन 55 टन था। लोहे की बीम का वजन 15 टन होगा और मजबूती चार गुना होगी। कंक्रीट के निर्माण का कोई मूल्य नहीं होता है जबकि लोहे का स्क्रैप मूल्य होगा। इसके अलावा सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे। बरसाती पानी की निकासी का प्राविधान नहीं था उसे इसमें जोड़ा गया है।
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सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि पूर्व की डिजाइन के अनुसार काम होता तो मार्च 2020 तक तैयार होता। अब इसे मार्च 2019 तक तैयार करना है। इस काम को जल्द निबटाने के लिए लोहे के 163 बीम लगाई जाएंगी।
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पहले कंक्रीट की बीम का वजन 55 टन था। लोहे की बीम का वजन 15 टन होगा और मजबूती चार गुना होगी। कंक्रीट के निर्माण का कोई मूल्य नहीं होता है जबकि लोहे का स्क्रैप मूल्य होगा। इसके अलावा सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे। बरसाती पानी की निकासी का प्राविधान नहीं था उसे इसमें जोड़ा गया है।
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पुलिस की कार्रवाई से भाग गए 250 मजदूर
मामले की जांच के लिए तीन टीमें पहुंचीं
- फोटो : file photo
पुलिस की कार्रवाई के डर से चौकाघाट फ्लाईओवर निर्माण कार्यस्थल से 250 मजदूर भाग गए। सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस समय मात्र 20 मजदूर काम कर रहे हैं। उनकी भी गारंटी नहीं है कि वे आगे काम करेंगे। पुलिस की कार्रवाई के डर से सभी मजदूर भाग गए हैं। मजदूर नहीं मिले तो आगे काम कराने में दिक्कत होगी।
वहीं गिरफ्तारी के बाद सेतु निगम के इंजीनियरों के परिवारों में गुस्सा है। उनका कहना है कि जब सेतु निगम ने डायवर्जन का पत्र भेजा तो रूट डायवर्ट क्यों नहीं किया गया। जहां बीम गिरी थी वह कंस्ट्रक्शन जोन है। इसके पहले भी निर्माण कार्य स्थल पर बीम गिरे हैं लेकिन हादसा नहीं हुआ।
हादसे के लिए पुलिस प्रशासन, यातायात, नगर निगम और अन्य विभाग जिम्मेदार हैं। इन विभागों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। सेतु निगम के इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाकर दूसरे बड़े जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने की साजिश रची गई है।
वहीं गिरफ्तारी के बाद सेतु निगम के इंजीनियरों के परिवारों में गुस्सा है। उनका कहना है कि जब सेतु निगम ने डायवर्जन का पत्र भेजा तो रूट डायवर्ट क्यों नहीं किया गया। जहां बीम गिरी थी वह कंस्ट्रक्शन जोन है। इसके पहले भी निर्माण कार्य स्थल पर बीम गिरे हैं लेकिन हादसा नहीं हुआ।
हादसे के लिए पुलिस प्रशासन, यातायात, नगर निगम और अन्य विभाग जिम्मेदार हैं। इन विभागों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। सेतु निगम के इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाकर दूसरे बड़े जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने की साजिश रची गई है।