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सुर गंगा महोत्सव: हिंदुस्तानी शैली में पॉप, रॉक और जैज के संगम ने लूटी महफिल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 25 Apr 2017 09:52 PM IST
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पॉप संगीत संग रॉक-जैज बैंड का संगम
- फोटो : अमर उजाला
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रॉक स्टार बैंड की धुन का सम्मोहन सोमवार की रात हर किसी के सिर चढ़कर बोला। हिंदुस्तानी शैली में पॉप, रॉक और जैज के संगम ने भी महफिल लूट ली। सोमवार को सुर गंगा संगीत महोत्सव की चौथी निशा शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को समर्पित थी।
दिल्ली से आए द अय्यर प्रोजेक्ट के कलाकारों ने दक्षिण की कर्नाटक शैली में रॉक की प्रस्तुति से शुरुआत की। सुर साधक चंद्रमौलि इस समूह का नेतृत्व कर रहे थे।
पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित गीतों के बाद उन्होंने देशभक्ति पर आधारित ‘आजादी की गूंज’ नामक गीत पेश कर तालियां बटोरीं। उनके साथ गिटार पर अश्विन और अनंत, बेस पर हिमांशु और ड्रम पर समीरन ने साथ दिया।
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इनके बाद दिल्ली के ही शैडो एंड लाइट बैंड की ओर से पॉप, रॉक और जैज का मिलन हिंदुस्तानी शैली में पेश किया गया। बैंड का नेतृत्व गायिका पवित्रा चारी कर रही थीं। की-बोर्ड पर आनिंदो बोस थे।
उन्होंने सबसे पहले ‘धीमी-धीमी इक खुशी अब पास है खड़ी...’ की प्रस्तुति की। इसके बाद कई गीत पेश किए। ड्रम पर ऐवलियोन और बेस पर स्टीव ने साथ दिया।
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दिल्ली से आए द अय्यर प्रोजेक्ट के कलाकारों ने दक्षिण की कर्नाटक शैली में रॉक की प्रस्तुति से शुरुआत की। सुर साधक चंद्रमौलि इस समूह का नेतृत्व कर रहे थे।
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पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित गीतों के बाद उन्होंने देशभक्ति पर आधारित ‘आजादी की गूंज’ नामक गीत पेश कर तालियां बटोरीं। उनके साथ गिटार पर अश्विन और अनंत, बेस पर हिमांशु और ड्रम पर समीरन ने साथ दिया।
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इनके बाद दिल्ली के ही शैडो एंड लाइट बैंड की ओर से पॉप, रॉक और जैज का मिलन हिंदुस्तानी शैली में पेश किया गया। बैंड का नेतृत्व गायिका पवित्रा चारी कर रही थीं। की-बोर्ड पर आनिंदो बोस थे।
उन्होंने सबसे पहले ‘धीमी-धीमी इक खुशी अब पास है खड़ी...’ की प्रस्तुति की। इसके बाद कई गीत पेश किए। ड्रम पर ऐवलियोन और बेस पर स्टीव ने साथ दिया।
बंगलूरू से आए परवाज रॉक बैंड
- फोटो : अमर उजाला
अंत में बंगलूरू से आए परवाज रॉक बैंड ने लोक संगीत पर आधारित बेहतरीन गीतों की प्रस्तुति से संगीत प्रेमियों को झुमाया। बैंड का नेतृत्व गायक खालिद अहमद कर रहे थे। गिटार पर कासिफ इकबाल, ड्रम पर सचिन और बेस पर फिदेल डिसूजा ने संगत की।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बंदिश- ‘दिल का खिलौना हाय टूट गया...’ को शहनाई की धुन पर प्रस्तुत किया गया। उस्ताद के पौत्र नासिर अब्बास को महापौर राम गोपाल मोहले एवं नगर आयुक्त हरि प्रताप शाही ने सम्मानित किया।
इससे पहले गंगा आरती के बाद आबिद जमाल ने सुर गंगा का थीम सांग प्रस्तुत किया। संचालन अरविंद मिश्रा और शशांक मिश्र ने किया।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बंदिश- ‘दिल का खिलौना हाय टूट गया...’ को शहनाई की धुन पर प्रस्तुत किया गया। उस्ताद के पौत्र नासिर अब्बास को महापौर राम गोपाल मोहले एवं नगर आयुक्त हरि प्रताप शाही ने सम्मानित किया।
इससे पहले गंगा आरती के बाद आबिद जमाल ने सुर गंगा का थीम सांग प्रस्तुत किया। संचालन अरविंद मिश्रा और शशांक मिश्र ने किया।