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गंगा, यमुना नहीं बचीं तो उत्तर भारत बन जाएगा रेगिस्तान : योगी आदित्यनाथ
टीम डि़जिटल,वाराणसी
Updated Sat, 27 May 2017 08:25 PM IST
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योगी आदित्यनाथ
- फोटो : twitter
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां 1011 ग्राम पंचायतों से आए प्रधानों से नदी संस्कृति को पुनर्जीवित करने और गंगा की निर्मलता के लिए जन सहभागिता की अपील की।
गंगा में मूर्ति विसर्जन न करने का संकल्प दिलाने के साथ ही आह्वान किया कि पौधे सरकार उपलब्ध कराएगी, आप सब एकजुट होकर नदी तटों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाएं। ‘नमामि गंगे’ परियोजना का जिक्र करते हुए गंगा निर्मलता के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की।
कहा, गंगा हमारी मां हैं। हमारी संस्कृति का प्रतीक हैं। उनसे किसी भी तरह का द्रोह मानव संस्कृति से द्रोह जैसा है। आज नदी संस्कृति सूख रही है क्योंकि मनुष्य अपनी भौतिक प्यास बुझाने में लग गया है। दिल्ली से लेकर मथुरा, वृंदावन और आगरा में यमुना का जो हाल हुआ है, वो हमारे लिए खतरे की घंटी है। अगर गंगा और यमुना नहीं बचीं तो उत्तर भारत भी नहीं बचेगा। समूचा उत्तर भारत रेगिस्तान बन जाएगा।
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बीएचयू स्वतंत्रता भवन में आयोजित स्वच्छ गंगा सम्मेलन में गंगा किनारे के 25 जिलों से आए ग्राम प्रधानों से मुख्यमंत्री ने कहा कि पूजा सामग्रियां प्रवाहित करने से भी गंगा प्रदूषित हो रही हैं। पूजा सामग्री गंगा में प्रवाहित करने से बेहतर है कि हम गंगा किनारे छोटे-छोटे कुंड बनाएं।
इन कुंडों में पूजा की विधियां संपन्न करें। गंगा में सिर्फ आचमन कर उसे निर्मल बनाने में योगदान दें। कहा, नदी संरक्षण में जनप्रतिनिधियों का सहयोग बहुत जरूरी है। गंगा और यमुना दोनों नदियों के तटों पर सघन स्तर पर पौधरोपण किया जाए। प्रदेश सरकार आपको वृक्ष उपलब्ध कराएगी, आप उन्हें लगाने की तैयारी करिए।
मुख्यमंत्री ने तीन दशक पहले गंगा की सफाई के लिए बने गंगा एक्शन प्लान की नाकामी का जिक्र करते हुए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों को भी घेरा। गंगा संरक्षण के लिए महामना मदन मोहन मालवीय के प्रयासों और उनकी प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों के साथ प्रदेश सरकार मजबूती से खड़ी है। जन-जन की भागीदारी हो और नदी संरक्षण की मुहिम जनअभियान का रूप ले।
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गंगा में मूर्ति विसर्जन न करने का संकल्प दिलाने के साथ ही आह्वान किया कि पौधे सरकार उपलब्ध कराएगी, आप सब एकजुट होकर नदी तटों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाएं। ‘नमामि गंगे’ परियोजना का जिक्र करते हुए गंगा निर्मलता के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की।
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कहा, गंगा हमारी मां हैं। हमारी संस्कृति का प्रतीक हैं। उनसे किसी भी तरह का द्रोह मानव संस्कृति से द्रोह जैसा है। आज नदी संस्कृति सूख रही है क्योंकि मनुष्य अपनी भौतिक प्यास बुझाने में लग गया है। दिल्ली से लेकर मथुरा, वृंदावन और आगरा में यमुना का जो हाल हुआ है, वो हमारे लिए खतरे की घंटी है। अगर गंगा और यमुना नहीं बचीं तो उत्तर भारत भी नहीं बचेगा। समूचा उत्तर भारत रेगिस्तान बन जाएगा।
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बीएचयू स्वतंत्रता भवन में आयोजित स्वच्छ गंगा सम्मेलन में गंगा किनारे के 25 जिलों से आए ग्राम प्रधानों से मुख्यमंत्री ने कहा कि पूजा सामग्रियां प्रवाहित करने से भी गंगा प्रदूषित हो रही हैं। पूजा सामग्री गंगा में प्रवाहित करने से बेहतर है कि हम गंगा किनारे छोटे-छोटे कुंड बनाएं।
इन कुंडों में पूजा की विधियां संपन्न करें। गंगा में सिर्फ आचमन कर उसे निर्मल बनाने में योगदान दें। कहा, नदी संरक्षण में जनप्रतिनिधियों का सहयोग बहुत जरूरी है। गंगा और यमुना दोनों नदियों के तटों पर सघन स्तर पर पौधरोपण किया जाए। प्रदेश सरकार आपको वृक्ष उपलब्ध कराएगी, आप उन्हें लगाने की तैयारी करिए।
मुख्यमंत्री ने तीन दशक पहले गंगा की सफाई के लिए बने गंगा एक्शन प्लान की नाकामी का जिक्र करते हुए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों को भी घेरा। गंगा संरक्षण के लिए महामना मदन मोहन मालवीय के प्रयासों और उनकी प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों के साथ प्रदेश सरकार मजबूती से खड़ी है। जन-जन की भागीदारी हो और नदी संरक्षण की मुहिम जनअभियान का रूप ले।
अक्तूबर 2018 तक प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य
cm yogi in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा, गंगा को स्वच्छ रखने की नैतिक जिम्मेदारी हम सबकी है। कोशिश होनी चाहिए कि हम किसी भी स्थिति में गंदा पानी गंगा में न गिरने दें। कहा कि राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है कि प्रयाग अर्द्ध कुंभ (जनवरी 2018) से पहले गंगा में सीवेज या ड्रेनेज का गिरना पूरी तरह बंद हो जाएगा। किसी तरह का औद्योगिक कचरा भी गंगा में नहीं गिरेगा, सरकार इसके लिए भी पुख्ता इंतजाम करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने 25 ग्राम प्रधानों को गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच) से मुक्त करने पर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा किनारे के 1627 गांवों में 4,45,718 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। दो अक्तूबर 2018 तक पूरे प्रदेश को खुल में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
30 जिले साल के अंत तक ओडीएफ हो जाएंगे। अध्यक्षता पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने की। सीएम का स्वागत बीएचयू कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
दिलाया यह संकल्प....
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों को संकल्प दिलाया। संकल्प पत्र इस तरह था- ‘गंगा हमारी राष्ट्रीय नदी है। हम उसके प्रति पूर्व श्रद्धा ओर सम्मान रखेंगे और हमारा संकल्प है कि गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए हम गंगा में कूड़ा-कचरा और पॉलीथिन नहीं डालेंगे।
हम गंगा में पूजा सामग्री और मूर्तियां विसर्जित नहीं करेंगे। हम पूजा सामग्री को नदी में प्रवाहित करने की बजाय मिट्टी में गाड़ेंगे। हम खुले में शौच की बजाय शौचालय का प्रयोग करेंगे। अपने क्षेत्र के गंगा तट को साफ-सुथरा रखेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे। जय स्वच्छता, जय हिंद, जय भारत...’
मुख्यमंत्री ने 25 ग्राम प्रधानों को गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच) से मुक्त करने पर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा किनारे के 1627 गांवों में 4,45,718 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। दो अक्तूबर 2018 तक पूरे प्रदेश को खुल में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
30 जिले साल के अंत तक ओडीएफ हो जाएंगे। अध्यक्षता पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने की। सीएम का स्वागत बीएचयू कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
दिलाया यह संकल्प....
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों को संकल्प दिलाया। संकल्प पत्र इस तरह था- ‘गंगा हमारी राष्ट्रीय नदी है। हम उसके प्रति पूर्व श्रद्धा ओर सम्मान रखेंगे और हमारा संकल्प है कि गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए हम गंगा में कूड़ा-कचरा और पॉलीथिन नहीं डालेंगे।
हम गंगा में पूजा सामग्री और मूर्तियां विसर्जित नहीं करेंगे। हम पूजा सामग्री को नदी में प्रवाहित करने की बजाय मिट्टी में गाड़ेंगे। हम खुले में शौच की बजाय शौचालय का प्रयोग करेंगे। अपने क्षेत्र के गंगा तट को साफ-सुथरा रखेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे। जय स्वच्छता, जय हिंद, जय भारत...’