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गंगा तट पर महाश्मशान के सामने मिले दो रामभक्त, दोनों ने किया एक-दूसरे के रामकाज का गुणगान

Thu, 26 Oct 2017 02:26 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 26 Oct 2017 02:26 PM IST
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CM Yogi and Morari Bapu meet on the Ganga coast
सीएम योगी और मोरारी बापू - फोटो : अमर उजाला
गंगा किनारे महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की चिताओं पर एक ओर प्रकृति के यज्ञ कुंड में पंचतत्व की आहुतियां डाली जा रही थीं तो गंगा पार डोमरी में रामजन्म के प्रसंग के अवसर पर दो रामभक्त मिल रहे थे।
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बुधवार को मानस मसान की व्यास पीठ से संत मोरारी बापू रामजन्म की कथा कह रहे थे, गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पहुंच गए। दोनों ने एक-दूसरे को गेरुआ अंगवस्त्र पहनाए।
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इस दौरान मंद-मंद मुस्कुराहट के बीच दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हजारों श्रद्धालुओं के बीच बोले बगैर बहुत कुछ संकेत दे दिए। जिस प्रकार भगवान शिव और भगवान राम एक-दूसरे की पूजा और आदर करते थे, ठीक उसी प्रकार बापू और योगी ने एक-दूसरे का सत्कार किया।
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एक ओर नाथ संप्रदाय के गोरक्ष पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहे तो दूसरी ओर मानस प्रवचन के जरिए रामकथा को घर-घर पहुंचाने वाले संत मोरारी बापू थे। दोनों ने एक-दूसरे के राम काज का गुणगान किया। अयोध्या में त्रेता युग जैसी दीपावली मनाने के बाद योगी काशी में बापू की रामकथा सुनने आए थे। 

 

बापू की कथा में बजरंग बली विराजमान होते हैं

CM Yogi and Morari Bapu meet on the Ganga coast
सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि ठीक कहते हैं बापू। मिलते हैं तो राम राम, विदा होते हैं तो भी राम राम और किसी अभियान में निकलते हैं तो जय श्रीराम और अंतिम यात्रा में निकलते हैं तो रामनाम सत्य है बोला जाता है।

दुनिया के अनेक देश मर्यादा पुरुषोत्तम राम की लीला के माध्यम से देख-समझ सकते हैं। बोले-बापू की कथा में बजरंग बली विराजमान होते हैं। एक न्यायाधीश ने भी उन्हें बताया था कि रामकथा में बजरंग बली और हनुमान चालीसा में अद्भुत शक्ति है।

इसके बाद बापू ने कहा कि मैं व्यास पीठ से राजपुरुष के चरणों में गोरक्ष पीठ को प्रणाम करता हूं। शास्त्र सम्मत चार मत होते हैं और इसमें पहला है साधु मत।

अयोध्या में दीपावली मनाने की प्रशंसा करते हुए कहा कि योगी यहां पधारे हैं। व्यास पीठ से आशीर्वाद तो नहीं दे सकता हूं लेकिन हृदय की प्रसन्नता के साथ भगवान के प्रसाद के रूप साथ भगवा दे दिया है। कहा-रामकथा मानस मसान का मंगलाचरण गोरखपुर में हुआ और रामकथा काशी में हो रही है। 
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