Education: मिनी साइंस सेंटर में बाल वैज्ञानिक सुलझाएंगे रहस्य, वाराणसी के 220 कंपोजिट विद्यालयों में तैयार होंगे सेंटर
विद्यार्थियों की विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए वाराणसी जिले के कंपोजिट स्कूलों में जल्द ही मिनी साइंस सेंटर तैयार होंगे। सीडीओ की पहल पर आठ ब्लॉक व नगर क्षेत्र के स्कूलों में जून मध्य से निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बड़े शहरों में नॉलेज पार्क के तर्ज पर अब परिषदीय स्कूलों में मिनी साइंस सेंटर का निर्माण किया जाएगा। विद्यार्थियों की विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए वाराणसी जिले के कंपोजिट स्कूलों में जल्द ही मिनी साइंस सेंटर तैयार होंगे। सीडीओ की पहल पर आठ ब्लॉक व नगर क्षेत्र के 220 स्कूलों में जून मध्य से निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। निर्माण की जिम्मेदारी स्टेम को दी गई है।
सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों को भी निर्देशित किया है। काशी विद्यापीठ ब्लॉक में इसकी शुरुआत कंपोजिट विद्यालय कोटवां से होगी। खंड विकास अधिकारी रक्षिता सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों में अपार प्रतिभाएं हैं। जरूरत है उनकी प्रतिभा को तराशने की।
मिनी साइंस सेंटर से बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित कर उन्हें बाल वैज्ञानिक के रूप में तैयार किया जाएगा। स्टेम की ओर से शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शिक्षकों को विज्ञान से जुड़ी नई चीजों के बारे में बताया जाएगा। ताकि वह बच्चों को इंस्पायर प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर सके। बीएसए राकेश सिंह ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में मजबूती के लिए जिले के स्कूलों में साइंस सेंटर तैयार किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान की बुनियादी जानकारी देने में आसानी होगी।
एक स्कूल में होंगे 75 मॉडल
साइंस सेंटर बनाने के लिए जिले के 220 कंपोजिट विद्यालयों का चयन किया गया। एक स्कूल में मिनी साइंस सेंटर के निर्माण के लिए साढ़े तीन लाख रुपये खर्च होंगे। सभी सेंटरों को बनाने में छह करोड़ 74 हजार की लागत आएगी। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को कमरों की सुविधा दी जाएगी।
सभी स्कूलों में विज्ञान के 75-75 मॉडल की सुविधा दी जाएगी। ये मॉडल छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे। मॉडल के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विज्ञान के कठिन विषय सरलता से सिखाए जा सकेंगे। वहीं, बच्चे वैज्ञानिक सोच मॉडल भी तैयार कर सकेंगे।