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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Chaiti Chhath 2025 great festival of Surya worship started with Nahai Khay Arghya offered

Chaiti Chhath 2025: नहाय खाय के साथ शुरू हुआ सूर्य उपासना का महापर्व, तीन अप्रैल को देंगे अर्घ्य; जानें महत्व

Wed, 02 Apr 2025 04:35 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 02 Apr 2025 04:35 PM IST
सार

चैत्र छठ को लेकर घर में तैयारियां होने लगी हैं। इस व्रत को रखने के बाद महिलाएं विधि-विधान से भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसमें भी 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।

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Chaiti Chhath 2025 great festival of Surya worship started with Nahai Khay Arghya offered
चैती छठ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

Chaiti Chhath Puja 2025: सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चैत्र छठ का महापर्व मंगलवार से आरंभ हो गया। नहाय खाय के साथ व्रतियों ने व्रत शुरू किया। परिवार की सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना से चार दिनों के अनुष्ठान भी हो गए। व्रतियों ने भगवान सूर्य व कुल देवता की पूजा की। 

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प्रसाद के रूप में चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण की। दो अप्रैल को खरना मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ और चावल की खीर, रोटी और फलाहार का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। तीन अप्रैल को संध्या अर्घ्य का अनुष्ठान होगा। 
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इस दिन डूबते सूर्य देव को दूध और जल चढ़ाकर छठी मैया की पूजा की जाती है। इस बार संध्या अर्घ्य शाम 6 बजकर 40 मिनट पर दी जाएगी।  चैती छठ का समापन चौथे दिन चार अप्रैल को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इस बार यह अनुष्ठान सुबह 6 बजकर 8 मिनट पर संपन्न होगा। 

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चैती छठ का महत्व
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पंडित दीपक मालवीय का कहना है कि छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन शैली और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का उत्सव है। 36 घंटे का निर्जला व्रत शारीरिक और मानसिक संयम को परखता है, इससे आत्मिक शुद्धि होती है। मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से रोग-कष्ट दूर होते हैं और छठी मैया संतान सुख प्रदान करती हैं।

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