खनन हादसे में पांच लोगों ने गंवाई जान, चौथे दिन टूटी विभाग की नींद, खदान संचालक पर केस
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सोनभद्र जिले के खनन को वैध बताने के साथ मामले को मैनेज करने में जुटे खनन विभाग को आखिरकार चौथे दिन सुरक्षा मानकों की याद आ ही गई। खान निरीक्षक जीके दत्ता, सर्वेयर संतोष पाल की तरफ से दी गई संयुक्त तहरीर पर ओबरा पुलिस ने सोमवार को खदान संचालक सुरेश केशरी के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
उधर, पीड़ित पक्ष की तहरीर पर भी खदान संचालक सहित तीन के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस जांच जारी रखे हुए हैं। एसपी आशीष श्रीवास्तव की तरफ से सीओ ओबरा भाष्कर वर्मा को दोनों केस की नियमित निगरानी करने और उसकी प्रगति से अवगत कराते रहने के निर्देश दिए गए हैं।
शुक्रवार की शाम करीब चार बजे ओबरा क्षेत्र के शारदा मंदिर के पास स्थित खदान की चट्टान दरकने से काम कर रहे सात मजदूर दब गए थे। उसमें से दो को घायल अवस्था में कुछ घंटे बाद निकाल लिया गया लेकिन शेष पांच को बचाया नहीं जा सका। मलबा काफी मात्रा में जमा होने के कारण पांचों के शव निकालने में भी लगातार 34 घंटे तक रेस्क्यू आपरेशन चलाना पड़ा। घटना को लेकर जहां विपक्षी दल हमलावर रहे।
वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से संजीदगी दिखाते हुए प्रभारी मंत्री को मौके पर भेजा गया। जांच रिपोर्ट तलब करते हुए मृतकों के परिजनों को चार लाख, घायलों को 50-50 हजार मुआवजा भी दिया गया। दूसरी ओर खनन विभाग संबंधित खदान में खनन कार्य के लिए 12 मार्च तक की अनुज्ञा होने की बात कहते हुए खनन को वैध ठहराने और हादसे को मैनेज करने की कोशिश में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर रविवार तक चुप्पी साधे रहा।
प्रभारी मंत्री के दौरे के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अलिखेश यादव की तरफ से सवाल उठने शुरू हुए, तब जाकर हादसे के चौथे दिन सोमवार को विभाग को खनन सुरक्षा अधिनियम की याद आई और आनन-फानन में सोमवार को अनुमोदित खनन योजना की अनदेखी कर सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराया गया।
जब खुद लगे घिरने तब याद आया सुरक्षा मानक
हादसे के बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें खान अधिकारी केके राय सामने वाले व्यक्ति से 17 लाख में मामले को मैनेज करने और एफआईआर न कराने के लिए दबाव बनाते दिखे। रविवार को पूरे दिन इसको लेकर कमेंट, ट्रोल का दौर चला। प्रभारी मंत्री ने इस पर जांच का भरोसा दिया। कहा जा रहा है कि कहीं वायरल वीडियो गले की फांस न बन जाए, इसलिए हादसे के तीन दिन बाद अचानक से सुरक्षा मानकों की याद आ गई।
बारिश के चलते पत्थर हो गए थे ढीले, नहीं दिखाई संजीदगी
खनन से जुड़े जानकार बताते हैं कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां दो खदानों की सीमा लगती है। घटना से दो दिन पूर्व हुई बरसात के कारण सीमा वाली दिवार पर उपर की तरफ कई बड़े पत्थर ढीले हो गए थे, जिसे खदान संचालकों ने नजरअंदाज किया। खदान में कार्य करवा रहे मेठों ने भी इसको लेकर लापरवाही बरती। बताया जा रहा है कि अगर विस्फोट की तैयारी से पहले ढीले हो चुके पत्थरों को गिरवा दिया गया होता तो शायद यह घटना न घटती।