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काशी का अनूठा जलोत्सव: केवड़ा-इत्र की फुहारों से भीगी बुढ़वा मंगल की महफिल
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Wed, 22 Mar 2017 01:01 AM IST
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budhwa mangal
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा की सुरम्य लहरों के बीच सुर-लय-ताल के संगम पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसीं। केवड़ा, इत्र की फुहारों के बीच होरी, चैती, ठुमरी की बंदिशों की खुशबू में लोग जमकर भीगे। अस्सी घाट के सामने गंगा की धारा पर हिचकोले खाती बनारस की संगीत परंपरा को संजोए बुढ़वा मंगल की महफिल का नजारा मंगलवार की रात कुछ ऐसा ही था।
नाव-बजड़े शाम छह बजे तक घाट के सामने घेरा बनाकर सजा दिए गए। किसी नाव पर मलाईदार ठंडई तो किसी पर मघई पान सजाया गया। एक-दूसरे को गुलाबी दुपट्टा और दुपलिया टोपी पहनाते, हथेलियों पर इत्र लगाते लोग महफिल में पहुंच रहे थे।
घरों से ठसक अंदाज में सजधज कर निकले। महिलाएं गुलाबी साड़ी में तो पुरुष सफेद कुरता-पायजामा में।
चंदन-टीका लगाकर लोगों की अगवानी की जा रही थी। इसी के साथ काशी की उप शास्त्रीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया गया। शुरुआत हुई बनारस घराने के कलाकार संजीव शंकर और अश्विनी शंकर की शहनाई पर जुगलबंदी से।
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उन्होंने राग विहाग में आलाप के बाद मध्य लय तीन ताल में और फिर द्रुत तीन ताल में बंदिश बजाई। इसके बाद बनारस घराने की होरी- यमुना तट श्याम खेलत होरी.. और ब्रज मंदिर देश दिखाए रसिया पर बेजोड़ धुन बजाई। तबले पर संगत पंडित कुबेर मिश्र ने की।
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नाव-बजड़े शाम छह बजे तक घाट के सामने घेरा बनाकर सजा दिए गए। किसी नाव पर मलाईदार ठंडई तो किसी पर मघई पान सजाया गया। एक-दूसरे को गुलाबी दुपट्टा और दुपलिया टोपी पहनाते, हथेलियों पर इत्र लगाते लोग महफिल में पहुंच रहे थे।
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घरों से ठसक अंदाज में सजधज कर निकले। महिलाएं गुलाबी साड़ी में तो पुरुष सफेद कुरता-पायजामा में।
चंदन-टीका लगाकर लोगों की अगवानी की जा रही थी। इसी के साथ काशी की उप शास्त्रीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया गया। शुरुआत हुई बनारस घराने के कलाकार संजीव शंकर और अश्विनी शंकर की शहनाई पर जुगलबंदी से।
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उन्होंने राग विहाग में आलाप के बाद मध्य लय तीन ताल में और फिर द्रुत तीन ताल में बंदिश बजाई। इसके बाद बनारस घराने की होरी- यमुना तट श्याम खेलत होरी.. और ब्रज मंदिर देश दिखाए रसिया पर बेजोड़ धुन बजाई। तबले पर संगत पंडित कुबेर मिश्र ने की।
रसिया तोरे कारन ब्रज में भई बदनाम...।
music
- फोटो : अमर उजाला
चैत मासे चुनरी रंगइबे हो रामा... की प्रस्तुति से उन्होंने वाहवाही बटोरी। अंत में कोलकाता से आईं अवंतिका चक्रवर्ती ने मिश्र खमाज में ठुमरी पेश की। बोल थे- काहे करत बरजोरी...।
इसके बाद चैती- सब बन अमवा बौराए हो रामा... पेश किया। तबले पर संगत की पं. नंदकिशोर मिश्र ने। हारमोनियम पर साथ दिया अशोक झा ने।
इससे पहले बुढ़वा मंगल आयोजन समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, उपाध्यक्ष जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, पर्यटन निदेशक हरिओम और डॉ. राजेश्वर आचार्य, संस्कृति केंद्र प्रमुख रत्नेश वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन किया।
इस अवसर पर बुढ़वा मंगल 2017 की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। संचालन प्रीतेश आचार्य व अंकिता खत्री ने किया।
इसके बाद चैती- सब बन अमवा बौराए हो रामा... पेश किया। तबले पर संगत की पं. नंदकिशोर मिश्र ने। हारमोनियम पर साथ दिया अशोक झा ने।
इससे पहले बुढ़वा मंगल आयोजन समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, उपाध्यक्ष जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, पर्यटन निदेशक हरिओम और डॉ. राजेश्वर आचार्य, संस्कृति केंद्र प्रमुख रत्नेश वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन किया।
इस अवसर पर बुढ़वा मंगल 2017 की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। संचालन प्रीतेश आचार्य व अंकिता खत्री ने किया।