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Varanasi News: बुद्ध ने परवर्ती भारतीय साहित्य को बहुत प्रभावित किया
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तिब्बती संस्थान में धम्मपद कैसे पढ़े विषयक कार्यशाला
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। धम्मपद का पाठ करते हुए यह सोच होनी चाहिए कि ये महापुरुष के वचन हैं। इन वचनों के साथ कथाएं भी दी गई हैं। इन कथाओं से उस समय का संदर्भ भी आ जाता है। बुद्ध ने परवर्ती भारतीय साहित्य को बहुत प्रभावित किया है। ये बातें बृहस्पतिवार को प्रो. अवधेश प्रधान ने केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में आयोजित धम्मपद कैसे पढ़ें विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि हमारी भाषा की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह धम्मपद पढ़कर जाना जा सकता है। भारतीय साहित्य इसीलिए महान हुआ कि इसने सभी धर्मों के तत्वों को समाहित किया। दूसरे सत्र में धम्मपद के मूल तत्वों की व्याख्या करते हुए डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि धम्मपद की गाथाएं मूलमंत्र की तरह हैं जिनमें भारतीय संस्कृति एवं मानवीय जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों को समाहित किया है। इस दृष्टि से धम्मपद भारतीय उपनिषदों तथा श्रीमद्भागवत गीता के बहुत करीब है। शोध सहायक डॉ. दावा शेरपा ने कहा कि पालि भाषा में प्राप्त धम्मपद को समझने के लिए तिब्बती भाषा में लिखे बौद्ध साहित्य के ग्रंथों को पढ़ना आवश्यक है। तीसरे सत्र में प्रो. रमेश चंद्र नेगी ने पालि साहित्य में जातक कथा और धम्मपद के महत्व को समझाते हुए कहा कि धम्मपद सामान्य ग्रंथ नहीं है। ये बुद्ध के साक्षात वचन हैं। संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी व डॉ. ज्योति सिंह ने किया। स्वागत प्रो. सदानंद शाही ने किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। धम्मपद का पाठ करते हुए यह सोच होनी चाहिए कि ये महापुरुष के वचन हैं। इन वचनों के साथ कथाएं भी दी गई हैं। इन कथाओं से उस समय का संदर्भ भी आ जाता है। बुद्ध ने परवर्ती भारतीय साहित्य को बहुत प्रभावित किया है। ये बातें बृहस्पतिवार को प्रो. अवधेश प्रधान ने केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में आयोजित धम्मपद कैसे पढ़ें विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि हमारी भाषा की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह धम्मपद पढ़कर जाना जा सकता है। भारतीय साहित्य इसीलिए महान हुआ कि इसने सभी धर्मों के तत्वों को समाहित किया। दूसरे सत्र में धम्मपद के मूल तत्वों की व्याख्या करते हुए डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि धम्मपद की गाथाएं मूलमंत्र की तरह हैं जिनमें भारतीय संस्कृति एवं मानवीय जीवन के श्रेष्ठ मूल्यों को समाहित किया है। इस दृष्टि से धम्मपद भारतीय उपनिषदों तथा श्रीमद्भागवत गीता के बहुत करीब है। शोध सहायक डॉ. दावा शेरपा ने कहा कि पालि भाषा में प्राप्त धम्मपद को समझने के लिए तिब्बती भाषा में लिखे बौद्ध साहित्य के ग्रंथों को पढ़ना आवश्यक है। तीसरे सत्र में प्रो. रमेश चंद्र नेगी ने पालि साहित्य में जातक कथा और धम्मपद के महत्व को समझाते हुए कहा कि धम्मपद सामान्य ग्रंथ नहीं है। ये बुद्ध के साक्षात वचन हैं। संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी व डॉ. ज्योति सिंह ने किया। स्वागत प्रो. सदानंद शाही ने किया।
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