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वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर धमाका, डॉग की मौत, खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ी

Mon, 19 Feb 2018 10:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 19 Feb 2018 10:53 PM IST
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Bomb Blast at varanasi cantt railway station
मौका मुआयना करते सिटी एसपी - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया स्थित जीआरपी ऑटो प्रीपेड बूथ के पास सोमवार को जोरदार धमाके के साथ धुएं का गुबार छा गया। धमाका होते ही मौजूद यात्रियों और रेल कर्मचारियों में भगदड़ मच गई। थोड़ी देर बाद माहौल सामान्य हुआ तो लोगों ने देखा कि एक कुत्ते का जबड़ा उड़ा हुआ था और उसकी मौत हो चुकी थी।
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मौके पर पहुंची जीआरपी ने सुतली बम के फटने से धमाका होना बताया। वहीं, रेलवे स्टेशन के दूसरे प्रवेश द्वार (कैंटोनमेंट की ओर से) के पास स्थित यात्री प्रतीक्षालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने आए स्वयंसेवकों के ठहरे होने के कारण सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ गई।
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कैंट रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया स्थित जीआरपी ऑटो प्रीपेड बूथ पर सोमवार को रोजाना की तरह ही माहौल सामान्य था। इसी बीच 4:30 बजे के लगभग एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया और अचानक तेज धमाका हुआ।
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धमाका इतना जबरदस्त था कि उसे तकरीबन डेढ़ सौ मीटर दूर मौजूद लोगों ने भी सुना और आसपास के काउंटर व दीवारें हिल गईं। इसके साथ ही प्रीपेड बूथ के चौतरफा धुएं का गुबार छा गया। मौजूद यात्री सहित अन्य लोग किसी अनहोनी की आशंका से इधर-उधर भागने लगे।

थोड़ी ही देर में मौके पर जीआरपी के जवान आए और बताया कि शादियों का सीजन चल रहा है। कुत्ता कहीं से सुतली बम जबड़े में फंसा कर लाया था और उसे दांतों से चबाने की कोशिश करने पर फट गया होगा।

वहीं, इस संबंध में एसपी रेलवे पीके मिश्रा ने बताया कि हमें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार सुतली बम फटने से धमाका हुआ है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

आतंकियों के निशाने पर रही है काशी

Bomb Blast at varanasi cantt railway station
घटनास्थल पर मौजूद भीड़ - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर सहित धर्म, कला, संस्कृति और पर्यटन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के कारण काशी हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही है। शीर्ष खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के लगातार आगाह किए जाने के बावजूद यहां की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति संवेदनशीलता नहीं बरती जाती।

इसके साथ ही इस संबंध में गंभीर उपाय भी नहीं किए गए। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2005 से 2010 के बीच चार बार आतंकी अपने मंसूबे में कामयाब हुए और बम धमाकों में 36 लोगों को जान गंवानी पड़ी।

वर्ष 2005 में 23 फरवरी को दशाश्वमेध घाट पर पहली बार बम धमाका हुआ। इस धमाके में सात लोगों की मौत हुई और नौ लोग घायल हुए। पुलिस और प्रशासन इसे सिलेंडर विस्फोट बताते रहे लेकिन फोरेंसिक जांच में बाद स्पष्ट हुआ कि यह आतंकी धमाका था।

इसके बाद सात मार्च 2006 को संकटमोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन में सीरियल बम धमाके में 18 लोगों की मौत हुई और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए। 23 नवंबर 2007 को कचहरी में हुए सीरियल बम विस्फोट में नौ लोगों की मौत हुई और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए।

सात दिसंबर 2010 को शीतला घाट पर हुए धमाके में एक बच्ची सहित दो लोगों की मौत हुई और 48 लोग घायल हुए। 23 अप्रैल 2016 को सर्किट हाउस में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन से पहले चंद कदम दूर दीवानी कचहरी परिसर में एक अधिवक्ता की कुर्सी के नीचे हैंडग्रेनेड बरामद हुआ तो हड़कंप मच गया।

वहीं, बीते साल नवंबर महीने के आखिरी में लखनऊ में गिरफ्तार होने से पहले लश्कर-ए-तैय्यबा का फरार अब्दुल नईम शेख बनारस में ठहरा हुआ था। उसके पास से बनारस के महत्वपूर्ण स्थलों की फोटो और वीडियो बरामद हुए थे। खुफिया एजेंसियों के अनुसार अब्दुल बनारस में अलग-अलग स्थानों पर गलत नाम, पता और धर्म बताकर ठहरा हुआ था। 

ब्लास्ट के सुबूतों पर जीआरपी ने फेरा पानी

Bomb Blast at varanasi cantt railway station
घटना स्थल को पानी से साफ किया गया - फोटो : अमर उजाला

बड़ी-बड़ी घटनाओं में पुलिस घटना के बाद पहुंचती है पर सोमवार को कैंट रेलवे स्टेशन परिसर में हुए धमाके के बाद जीआरपी ने जबरदस्त सक्रियता दिखाई। 15 मिनट के अंदर ही डॉग के शव को हटा दिया गया और पूरे घटना स्थल को साफ कर दिया।  इसके चलते बाद में जांच के दौरान समस्या का सामना करना पड़ा।

कैंट रेलवे स्टेशन परिसर में अक्सर लावारिस लाशें और जहरखुरानी के शिकार यात्री घंटो पड़े रहते हैं। विभागों के बीच मेमो का आदान प्रदान होता रहता है। कभी-कभी तो लावारिश लाशें 24 घंटे से ज्यादा समय तक परिसर में पड़ी रही हैं।

वहीं जब सोमवार को परिसर में बम धमाका हुआ तो प्रीपेड में बैठे जीआरपी सिपाही की सूचना पर विभाग सक्रिय हो गया। आनन-फानन में डॉग के शव को वहां से हटवा दिया गया। मौके को पानी से अच्छी तरह धुल दिया गया और पहले से भी ज्यादा चमका दिया गया।

इतना ही जीआरपी के सिपाहियों ने मौके से लोगों को हटा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अगर पहले ही यही तेजी दिखाते तो घटना ही न घटती। बता दें कि घटना स्थल के दोनों तरफ जीआरपी के प्रीपेड बूथ(एक तरफ ऑटो प्री-पेड बूथ और दूसरी तरफ टैक्सी प्री-पेड बूथ) हैं। 

कैंट रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे

Bomb Blast at varanasi cantt railway station
कैंट रेलवे स्टेशन - फोटो : self
कैंट रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। बम फटने के बाद भी सुरक्षा के ठेकेदार नही जागे। मुख्य द्वार हो या सेकेंड एंट्री परिसर में बने प्रवेश व निकास द्वार पर जीआरपी और आरपीएफ सुरक्षाकर्मी नहीं दिखे। यात्री बिना किसी रोक टोक के आते-जाते रहे।

यही नही आवारा पशुओं से भी आम यात्री हर रोज की तरह परेशान रहे। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में होने की वजह से रेल मंत्रालय के लिए सबसे महत्वपूर्ण बन चुके कैंट रेलवे स्टेशन की सुरक्षा को लेकर जीआरपी, आरपीएफ गंभीर नही है।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को परिसर में धमाका होने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां नहीं जागी। डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक तो मौके पर जीआरपी और आरपीएफ के जिम्मेदार अधिकारी भी नही पहुंचे।

पौने छह बजे के लगभग आरपीएफ के सहायक कमांडेंट पहुंचे। बीडीएस की टीम देर शाम जब कैंट रेलवे स्टेशन पहुंची तो जीआरपी के अधिकारी उनके साथ नजर आए। घटना के बाद भी जीआरपी और आरपीएफ के सिपाही प्रवेश व निकास द्वार पर नही दिखे।

यह नही कैंट रेलवे स्टेशन पर आम दिनों में भी प्रवेश हो निकास द्वार सुरक्षाकर्मी नही दिखते। लोग बिना रोकटोके के आते-जाते हैं। यही नही सालों से डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर की बात की जा रही है पर आज तक नही लग सका।

वहीं हैंड होल्ड मेटल डिटेक्टर भी विशेष दिनों में ही जीआरपी निकालती है। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं पर उनमें से कुछ खराब हैं। ऐसे में स्टेशन परिसर हमेशा असुरक्षित बना रहता है।
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