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उत्तर प्रदेश के इस जिले में नहीं चली भाजपा की सूनामी
amarujala.com- Presented by: शैलेश कुमार शुक्ल
Updated Tue, 14 Mar 2017 05:42 PM IST
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मुलायम सिंह यादव
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समाजवादी पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में सबसे अधकि पांच सीटें जीतकर अपनी बादशाहत कायम की है। हालांकि 2012 के चुनाव में नौ सीटों पर कब्जा करने वाली सपा इस बार सिर्फ पांच सीटें ही बचा सकीं।
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सपा ने जो सीटें जीती हैं इनमें तीन सदर, गोपालपुर, मेंहनगर विधानसभा क्षेत्र सपा संरक्षक और आजमगढ़ के सांसद मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में स्थित है। जबकि इनके क्षेत्र की दो अन्य सीटों मुबारकपुर और सगड़ी के अलावा लालगंज संसदीय क्षेत्र में शामिल लालगंज तथा दीदारगंज की सीट बसपा के खाते में गई है।
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जबकि भाजपा को सिर्फ फूलपुर पवई में सिर्फ एक सीट मिली है। बता दें कि वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की आजमगढ़ जिले में नौ सीटों पर जीत मिली थी। सपा के लहर में भी सिर्फ मुबारकपुर विधान सभा सीट से बसपा प्रत्याशी शाहआलम उर्फ गुड्डू जमाली ने चुनाव जीतकर पार्टी का झंडा बुलंद किया था।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ के सदर सीट से चुनाव जीते थे। विधान सभा चुनाव में जिले से नौ सीट और लोकसभा में मुलायम सिंह यादव के सांसद चुने जाने के बाद सरकार का पूरा ध्यान आजमगढ़ के विकास कार्यों पर रहा।
इसी के चलते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्षों से बंद पड़ी सठियांव चीनी मिल चालू कराया और मुबारकपुर में बुनकर विपणन केंद्र बनवाया। वहीं अपने दम पर दीदारगंज के सपा विधायक आदिल शेख ने मार्टीनगंज को जिले की नई तहसील बनवाई।
सपा ने अपने गढ़ में फिर बरकरार की बादशाहत
bjp worker in azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा क्षेत्र में रोडवेज सहित अन्य विकास के कार्य करवाया लेकिन जनता पर इन कार्यों का कोई असर नहीं दिखा। समाजवादी पार्टी को सगड़ी विस क्षेत्र में भी जीत की उम्मीद थी। यहां वर्ष 2013 में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के बाद क्षेत्र में सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ी।
जिसका परिणाम रहा कि सपा की कट्टर प्रतिद्वंदी पार्टी बसपा को मुलायम के गढ़ माने जाने वाले मुबारकपुर, सगड़ी दीदारगंज के अलावा लालगंज की सीट बसपा के खाते में डाल दिया।
जबकि पांच सीट सदर, मेंहनगर, गोपालपुर, अतरौलिया और निजामाबाद की सीट से सपा को संतोष करना पड़ा। सपा के इस हार पर पार्टी के लोग जहां मंथन करने में जुटे हैं। वहीं बसपाई अपनी इस जीत से फूले नहीं समा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजमगढ़ में मोदी लहर के न चलने के पीछे कई कारण हैं। उनके मुताबिक बसपा को उलेमा काउंसिल का सहयोग मिला जिससे उसे मुस्लिम वोट मिला। सपा के पांच सिटिंग विधायकों को उनकी अच्छी इमेज का फायदा मिला।
वहीं आजमगढ़ में ओबीसी वोट सपा और भाजपा में बंट गए जिससे भारतीय जनता पार्टी को नुकसान हुआ। बता दें कि मुलायम सिंह के इस संसदीय क्षेत्र में सीएम अखिलेश यादव ने सात रैलियां की थी।
जिसका परिणाम रहा कि सपा की कट्टर प्रतिद्वंदी पार्टी बसपा को मुलायम के गढ़ माने जाने वाले मुबारकपुर, सगड़ी दीदारगंज के अलावा लालगंज की सीट बसपा के खाते में डाल दिया।
जबकि पांच सीट सदर, मेंहनगर, गोपालपुर, अतरौलिया और निजामाबाद की सीट से सपा को संतोष करना पड़ा। सपा के इस हार पर पार्टी के लोग जहां मंथन करने में जुटे हैं। वहीं बसपाई अपनी इस जीत से फूले नहीं समा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजमगढ़ में मोदी लहर के न चलने के पीछे कई कारण हैं। उनके मुताबिक बसपा को उलेमा काउंसिल का सहयोग मिला जिससे उसे मुस्लिम वोट मिला। सपा के पांच सिटिंग विधायकों को उनकी अच्छी इमेज का फायदा मिला।
वहीं आजमगढ़ में ओबीसी वोट सपा और भाजपा में बंट गए जिससे भारतीय जनता पार्टी को नुकसान हुआ। बता दें कि मुलायम सिंह के इस संसदीय क्षेत्र में सीएम अखिलेश यादव ने सात रैलियां की थी।