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असि को बचाने लिए बड़ी पहलः नदी में उतरा जेसीबी, शुरू हो गई खुदाई
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 04 Jun 2017 03:35 PM IST
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छिटफुट विरोधों के बीच नदी को संवारने का काम आरंभ
- फोटो : अमर उजाला
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असि नदी को बचाने की दिशा में रविवार को बड़ी पहल हुई। नगर निगम की ओर से सीमांकन के बाद यमुना मिशन ने सुबह असि नदी में सफाई के लिए जेसीबी उतार दिया गया। छिटफुट विरोधों के बीच सिल्ट और कूड़े से पाटे गए नदी के तट की खुदाई शुरू हो गई। मलबा निकाला जाने लगा।
इसी के साथ असि के दोनों तटों पर हरित पट्टी के विकास का काम आरंभ हो गया। सहोदरबीर पुल से संकटमोचन के बीच नदी के दोनों किनारों पर मानसूनी बारिश के बाद पौधरोपण शुरू होगा। वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी पौराणिक काल की असि नदी की मुक्ति के लिए सतह पर आने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
वह भी ऐसे समय जब शहर के घरेलू और औद्योगिक कचरों को ढोने के लिए इसके मौलिक स्वरूप को समाप्त कर नाला के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यमुना मिशन की ओर से असि नदी के पुनरुद्धार के लिए सुबह आठ बजे जेसीबी उतारा गया। नदी के तट पर स्थित ब्रह्मा मठ के कुछ आचार्यों ने विरोध भी जताया लेकिन फिर उन्होंने इस पुनीत अभियान में अपनी सहमति जता दी।
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नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के राष्ट्रीय सलाहकार और सेवा निवृत्त डीजी (होमगार्ड्स) आरएन सिंह की मौजूदगी में असि नदी मुक्ति अभियान के कपींद्र तिवारी, आनंद प्रकाश तिवारी, अक्षयवर सिंह, संतोष कुमार सिंह, आरबी सिंह, चंद्रभूषण सिंह, राजीव शर्मा, यमुना मिशन के चंद्रशेखर सेठ के अलावा तमाम लोगों ने नदी के मलबे को हटाने में सहयोग किया।
नदी के दोनों किनारों पर हरित पट्टी का विकास किया जाएगा। हरित पट्टी के लिए असि की तलहटी से खोदी जा रही सिल्ट पाटकर नया प्लेटफार्म बनाया जा रहा है। वर्ष भर पहले शहर के 20 से अधिक सामाजिक संगठनों ने अमर उजाला की पहल पर असि नदी की मुक्ति के लिए बीएचयू के सिंहद्वार से अभियान शुरू किया था।
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इसी के साथ असि के दोनों तटों पर हरित पट्टी के विकास का काम आरंभ हो गया। सहोदरबीर पुल से संकटमोचन के बीच नदी के दोनों किनारों पर मानसूनी बारिश के बाद पौधरोपण शुरू होगा। वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी पौराणिक काल की असि नदी की मुक्ति के लिए सतह पर आने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
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वह भी ऐसे समय जब शहर के घरेलू और औद्योगिक कचरों को ढोने के लिए इसके मौलिक स्वरूप को समाप्त कर नाला के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यमुना मिशन की ओर से असि नदी के पुनरुद्धार के लिए सुबह आठ बजे जेसीबी उतारा गया। नदी के तट पर स्थित ब्रह्मा मठ के कुछ आचार्यों ने विरोध भी जताया लेकिन फिर उन्होंने इस पुनीत अभियान में अपनी सहमति जता दी।
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नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के राष्ट्रीय सलाहकार और सेवा निवृत्त डीजी (होमगार्ड्स) आरएन सिंह की मौजूदगी में असि नदी मुक्ति अभियान के कपींद्र तिवारी, आनंद प्रकाश तिवारी, अक्षयवर सिंह, संतोष कुमार सिंह, आरबी सिंह, चंद्रभूषण सिंह, राजीव शर्मा, यमुना मिशन के चंद्रशेखर सेठ के अलावा तमाम लोगों ने नदी के मलबे को हटाने में सहयोग किया।
नदी के दोनों किनारों पर हरित पट्टी का विकास किया जाएगा। हरित पट्टी के लिए असि की तलहटी से खोदी जा रही सिल्ट पाटकर नया प्लेटफार्म बनाया जा रहा है। वर्ष भर पहले शहर के 20 से अधिक सामाजिक संगठनों ने अमर उजाला की पहल पर असि नदी की मुक्ति के लिए बीएचयू के सिंहद्वार से अभियान शुरू किया था।
असि नदी को लेकर निगम दुरुस्त कराए रिकार्ड
असि नदी में उतरा जेसीबी, तटों पर बनेगी हरित पट्टी
- फोटो : अमर उजाला
असि नदी को नगर निगम और तहसील के राजस्व रिकार्ड में नाला के रूप में दर्ज किए जाने के मामले की जांच कराई जाएगी। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार आरएन सिंह ने रविवार को असि के तट पर चलाए जा रहे सफाई अभियान के दौरान यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को असि नदी के अस्तित्व से किए गए खिलवाड़ की जानकारी दी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि प्रशासन असि नदी को लेकर जल्द अपना रिकार्ड दुरुस्त कराए।
इसके लिए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता दोनों के सहयोग से असि फिर अपने मूल रूप में उद्गम से संगम स्थल तक कल-कल बहेगी।
उन्होंने बताया कि नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को असि नदी के अस्तित्व से किए गए खिलवाड़ की जानकारी दी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि प्रशासन असि नदी को लेकर जल्द अपना रिकार्ड दुरुस्त कराए।
इसके लिए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता दोनों के सहयोग से असि फिर अपने मूल रूप में उद्गम से संगम स्थल तक कल-कल बहेगी।