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BHU: पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी के इस बयान पर रार, कई लोगों की बढ़ी धुकधुकी

Tue, 28 Nov 2017 10:29 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 28 Nov 2017 10:29 AM IST
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BHU vice chancellor GC tripathi statment create new dispute
विदाई समारोह में प्रो. जीसी त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
अपने कार्यकाल के अंतिम दिन आयोजित विदाई समारोह में बीएचयू कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने जो भाषण दिया उसके बाद से चर्चाओं का बाजार गरम है। भाषण का यह वीडियो सोशल मीडिया पर छाया रहा। परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं करने के साथ ही लोग उनके कार्यकाल में हुईं नियुक्तियों पर सवाल भी उठाते रहे।
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वहीं, कुलपति से करीबी बढ़ा कर अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी दिलाने वाले, महापुरुषों के नाम पर स्थापित चेयर और सेवानिवृत्ति के बाद भी महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने वाले अधिकारियों की धुकधुकी भी बढ़ गई है। बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है। इसलिए उन्हें चिंता सताने लगी है कि यदि इस मामले ने तूल पकड़ा तो उन पर गाज गिर सकती है।
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अपने कार्यकाल के अंतिम दिन आयोजित विदाई समारोह में कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने मजबूरी में कई अयोग्य लोगों की नियुक्तियां करने का बयान दिया था। अब उनके बयान को लेकर शिक्षकों और अधिकारियों-कर्मचारियों से लेकर छात्र-छात्राओं तक में खूब चर्चाएं हो रही हैं।
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वहीं, वे लोग सकते में आ गए हैं, जिनकी नियुक्तियां उनके कार्यकाल में हुई हैं। कौन योग्य था और किनकी नियुक्तियां अयोग्य होने के बावजूद की गईं, इन सब पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और अधिकारियों के कुछ पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।

एक अधिकारी की नियुक्ति के लिए तो नया पद तक सृजित किया गया। विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर सेवा कर चुके एक अधिकारी को सलाहकार बनाया गया। इतना ही नहीं, पुलिस विभाग में बड़े पद पर आसीन रहे एक अधिकारी को भी सलाहकार बनाया गया था।

 

एमएचआरडी, यूजीसी में मामले की शिकायत, जांच की मांग

BHU vice chancellor GC tripathi statment create new dispute
bhu vc

कुछ चेयर और बड़े केंद्रों पर भी अधिकारियाें और शिक्षकों के सगे संबंधियों को अहम जिम्मेदारियां देने की चर्चाएं खूब रहीं। प्रो. जीसी के बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच हुई तो कई लोग नप सकते हैं। 

प्रो. त्रिपाठी के बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष और काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री विकास सिंह ने मानव संसाधन मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की है।

विकास ने पत्र में कहा है कि कुलपति के बयान से बीएचयू की गरिमा को ठेस पहुंची है। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अयोग्य लोगों की नियुक्तियां होना विश्वविद्यालय के शैक्षिक परिदृश्य में घातक है। विकास ने जांच कराकर भर्तियों को निरस्त करने और प्रो. त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 

सोशल मीडिया पर छाया रहा वीडियो
विदाई समारोह में अयोग्य लोगों की नियुक्तियां करने के प्रो. जीसी त्रिपाठी के बयान वाला वीडियो सोशल मीडिया पर खूब छाया रहा। व्हाट्स एप, फेसबुक, ट्विटर और यू ट्यूब पर तरह-तरह के कमेंट के साथ वीडियो चलता रहा। साथ ही छात्राें के विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी अपलोड किया गया है। 

कुलपति विहीन हो गया विश्वविद्यालय

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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
प्रो. जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म होने के बाद फिलहाल बीएचयू कुलपति विहीन हो गया है। अपने कार्यकाल में रेक्टर नियुक्त न करने वाले कुलपति ने दो अक्तूबर को छुट्टी पर जाने के दौरान कुलसचिव को जिम्मेदारी दी थी।

अंतिम दिन भी कुलसचिव को दायित्व सौंप कर चले गए। इस बीच मानव संसाधन मंत्रालय ने नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए जाने-माने अर्थशास्त्री प्रो. विजय केलकर की अध्यक्षता में सर्च कमेटी का गठन हो चुका है, जिसमें दो आईआईटी के निदेशक भी शामिल हैं। सूत्रों की माने तो अगले माह तक बीएचयू को नया कुलपति मिल सकता है। 
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