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बीएचयू छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर को हटाने के लिए निकाला विरोध मार्च
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:06 AM IST
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विरोध मार्च निकालते छात्र
- फोटो : amar ujala
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बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह और छात्रों के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय कार्यालय पर छात्रों का धरना जारी रहा तो नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को भी कक्षाओं का बहिष्कार किया।
शाम को बिरला छात्रावास चौराहे से लंका रविदास गेट तक विरोध मार्च निकालकर छात्रों ने कुलपति से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस दौरान नारेबाजी भी की गई। विश्वविद्यालय में 29 नवंबर को नर्सिंग कॉलेज के सामने धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की पिटाई के बाद से ही विरोध जारी है।
नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर पर कार्रवाई होने तक कक्षाओं में न जाने का निर्णय लिया है, वहीं केंद्रीय कार्यालय पर धरने पर बैठे छात्र भी चीफ प्रॉक्टर को हटाए जाने तक धरना देने पर अडे़ हैं। मंगलवार को केंद्रीय कार्यालय पर छात्रों के धरने का वीडियो बना रही एक महिला डिप्टी चीफ प्रॉक्टर के साथ छात्रों की नोंकझोंक भी हुई।
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दूसरी ओर, चीफ प्रॉक्टर की पिटाई के बाद जिस छात्रा के कान का पर्दा फटा, उसके साथ ही नर्सिंग की अन्य छात्राओं पर हॉस्टल से बाहर न निकलने और मामले में कुछ भी न बोलने का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है।
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शाम को बिरला छात्रावास चौराहे से लंका रविदास गेट तक विरोध मार्च निकालकर छात्रों ने कुलपति से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस दौरान नारेबाजी भी की गई। विश्वविद्यालय में 29 नवंबर को नर्सिंग कॉलेज के सामने धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की पिटाई के बाद से ही विरोध जारी है।
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नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर पर कार्रवाई होने तक कक्षाओं में न जाने का निर्णय लिया है, वहीं केंद्रीय कार्यालय पर धरने पर बैठे छात्र भी चीफ प्रॉक्टर को हटाए जाने तक धरना देने पर अडे़ हैं। मंगलवार को केंद्रीय कार्यालय पर छात्रों के धरने का वीडियो बना रही एक महिला डिप्टी चीफ प्रॉक्टर के साथ छात्रों की नोंकझोंक भी हुई।
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दूसरी ओर, चीफ प्रॉक्टर की पिटाई के बाद जिस छात्रा के कान का पर्दा फटा, उसके साथ ही नर्सिंग की अन्य छात्राओं पर हॉस्टल से बाहर न निकलने और मामले में कुछ भी न बोलने का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है।
विवि प्रशासन ने गठित की जांच समिति
विश्वविद्यालय परिसर में चल रही घटनाओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अलग-अलग तीन जांच समितियों का गठन किया है। साथ ही छात्रों से धरना प्रदर्शन खत्म करने की अपील भी की गई है। कुल सचिव ने बताया कि भगवान दास छात्रावास से संबंधित घटनाओं के साथ ही नर्सिंग छात्रा के कान के चोट लगने की जांच के लिए समिति का गठन किया गया है।
केंद्रीय कार्यालय पर धरनारत छात्रों द्वारा की जा रही मांगों पर भी फैक्ट फाइडिंग कमेटी का गठन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। बताया कि नियमानुसार धरना-प्रदर्शन अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
केंद्रीय कार्यालय पर धरनारत छात्रों द्वारा की जा रही मांगों पर भी फैक्ट फाइडिंग कमेटी का गठन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। बताया कि नियमानुसार धरना-प्रदर्शन अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
बीएचयू में अब तक 110 दिन ही रहे कुलपति
बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर 20 नवंबर तक अपने 238 दिन के कार्यकाल में महज 110 दिन ही कैंपस में रहे हैं। इसका खुलासा विश्वविद्यालय की ओर से एक आरटीआई में दिए गए जवाब से हुआ है।
डीरेका के रुद्र विहार कालोनी निवासी संतोष कुमार सिंह ने 22 अक्तूबर को आरटीआई के माध्यम से कुलपति के विश्वविद्यालय में रहने और कार्यालय में जाने की जानकारी मांगी थी। 20 नवंबर को विश्वविद्यालय के केंद्रीय लोकसूचना अधिकारी की ओर से जो जानकारी दी गई है, उसमें कुलपति के 110 दिन तक विश्वविद्यालय में रहने का जिक्र किया गया है।
बता दें कि बतौर कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इसी साल 28 मार्च को कार्यभार ग्रहण किया था और 20 नवंबर तक कुल 238 दिन हुए, जिसमें वह 110 दिन बीएचयू में रहे हैं।
डीरेका के रुद्र विहार कालोनी निवासी संतोष कुमार सिंह ने 22 अक्तूबर को आरटीआई के माध्यम से कुलपति के विश्वविद्यालय में रहने और कार्यालय में जाने की जानकारी मांगी थी। 20 नवंबर को विश्वविद्यालय के केंद्रीय लोकसूचना अधिकारी की ओर से जो जानकारी दी गई है, उसमें कुलपति के 110 दिन तक विश्वविद्यालय में रहने का जिक्र किया गया है।
बता दें कि बतौर कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इसी साल 28 मार्च को कार्यभार ग्रहण किया था और 20 नवंबर तक कुल 238 दिन हुए, जिसमें वह 110 दिन बीएचयू में रहे हैं।