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बीएचयू के छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर खून से लिखा पत्र
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:19 AM IST
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खून से पत्र लिखते छात्र
- फोटो : amar ujala
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बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह और छात्रों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय कार्यालय पर 11 दिन से धरना दे रहे छात्र चरणबद्ध तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को अपने खून से पत्र लिखकर उसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि को भेजकर चीफ प्रॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
धरनारत छात्रों ने बताया कि नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट, परिसर से चंदन के पेड़ काटे जाने, विभागों में चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं, इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने बताया कि मांगे पूरी होने तक केंद्रीय कार्यालय पर आंदोलन जारी रहेगा। बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह को पद से हटाने की मांग को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ।
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धरनारत छात्रों ने बताया कि नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट, परिसर से चंदन के पेड़ काटे जाने, विभागों में चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं, इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
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उन्होंने बताया कि मांगे पूरी होने तक केंद्रीय कार्यालय पर आंदोलन जारी रहेगा। बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह को पद से हटाने की मांग को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ।
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लगातार हो रहा विरोध प्रदर्शन
बीएचयू के छात्र
- फोटो : amar ujala
बताते चलें कि छात्रों ने शनिवार को मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया। केंद्रीय कार्यालय से बीएचयू विश्वनाथ मंदिर तक बनाई मानव श्रृंखला के माध्यम से छात्रों ने कुलपति से जल्द कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने कहा कि छात्र हित में कुलपति को जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई के बारे में फैसला लेना चाहिए। मांगे पूरी होने तक शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी रहेगा।
वहीं गुरुवार को कुलपति ने धरनारत छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया। छात्र बातचीत करने पहुंचे, लेकिन दो घंटे तक चली वार्ता विफल रही। समिति कक्ष में हुई बैठक में छात्र कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। जब कुलपति की ओर से कोई निर्णय नहीं हुआ तो छात्रों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया।
वहीं गुरुवार को कुलपति ने धरनारत छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया। छात्र बातचीत करने पहुंचे, लेकिन दो घंटे तक चली वार्ता विफल रही। समिति कक्ष में हुई बैठक में छात्र कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। जब कुलपति की ओर से कोई निर्णय नहीं हुआ तो छात्रों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया।