संसद में उठा BHU का मामला: अधिकारी बोले- PhD बुलेटिन में हुई गलती, अब सुधार हो रहा; धरना जारी
सब लैटर्न स्टडीज विषय को लेकर सेंट्रल ऑफिस पर आठ दिनों से धरने पर बैठे छात्रों का धरना समाप्त कर दिया। इन्हें आश्वासन दिया गया है कि 7-8 दिनों में एडमिशन से जुड़े संदेह और समस्याओं को सुलझा लिया जाएगा। कमेटी की जांच रिपोर्ट आ चुकी है।
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Phd Admission 2025: संसद में बीएचयू पीएचडी मामला उठने के बाद बीएचयू की परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुषमा घिल्डियाल और 6 अधिकारियों ने संयुक्त रूप से सफाई दी। कहा कि पीएचडी बुलेटिन में एक गलती हुई है। इसे अब सुधारा जा रहा है। अगले साल से ये दिक्कत नहीं होगी।
वहीं, कुलपति आवास पर छह दिनों से धरने पर बैठे शिवम सोनकर के मामले में बीएचयू ने स्पष्ट रुख नहीं दिखाया है। नियमों का हवाला देकर प्रवेश अनुचित बता रहा, लेकिन संसद में मामला आने के बाद अब दबाव भी बन गया है।
बीएचयू की परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि 1612 से ज्यादा सीटों पर पीएचडी एडमिशन होने थे। इसमें काउंसिलिंग के पहले 74 सीटों को दूसरी कटेगरी में तब्दील कर प्रवेश दिया गया था, लेकिन शिवम सोनकर का मामला काउंसिलिंग के बाद उठा, इसके चलते प्रवेश नहीं हो पाया।
अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि सब लैटर्न स्टडीज और सोशल इन्क्लूजन को लेकर कंन्फ्यूजन था। इसे दूर कर लिया गया। जो पढ़ाया जाता है अगले सत्र से वही नाम लिखेंगे। एमए सोशल इन्क्लूजन से पढ़ाया जा रहा है। लेकिन पीएचडी के लिए बुलेटिन में सब लैटर्न स्टडीज का आया। अब एमए की पढ़ाई इसमें होती ही नहीं है तो प्रवेश कैसे होगा। इस भूल को स्वीकार कर लिया गया है।
80 फीसदी विभागों के रिजल्ट जारी
रिजल्ट की देरी पर प्राे. रजनीश सिंह ने कहा कि 80 फीसदी रिजल्ट आ गए हैं। आईएएमस और कुछ दूसरे विभागों ने रिजल्ट अभी तक घोषित नहीं किए हैं, लेकिन 31 मार्च के पहले तक रिजल्ट आ जाएंगे। बीएचयू में अब तक पीएचडी की 654 सीटों पर प्रवेश हो चुके हैं। इस दौरान प्रो. राजाराम शुक्ल, प्रो. राकेश पांडेय, प्रो. भास्कर भट्टाचार्य ने भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।