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BHU: हार्ट अटैक आने के 69 सेकेंड बाद पहुंचे डॉक्टर ने CPR देकर बचाई जान, जानें क्या है गोल्डन टाइम

Tue, 22 Jul 2025 05:35 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 22 Jul 2025 05:35 AM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू अस्पताल में हार्ट अटैक के बाद बुजुर्ग गश खाकर गिर गया। यह देख परिजन चीखने-चिल्लाने लगे। भीड़ में किसी ने पास के कमरे में बैठे डाॅक्टर को इसी जानकारी दी। डाॅक्टर ने समय रहते बुजुर्ग की जान बचा ली।

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BHU Doctor arrived 69 seconds after heart attack saved life by giving CPR golden time
बीएचयू में बुजुर्ग की बचाई जान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

BHU Hospital Varanasi: बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में हार्ट अटैक से अचेत हुए और 60 सेकेंड बाद पहुंचे डॉक्टर ने सीपीआर देकर 25-30 सेकेंड में जान बचा ली। आयुर्वेद स्थित चेस्ट वार्ड में सुबह 11 बजे 80 साल के मरीज को मरीज पहुंचे और रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास की सीढ़ी पर गिरकर अचेत हो गए। 

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भीड़ इकट्ठा हो गई और परिजन रोने लगे तभी एक कर्मचारी भागता हुआ पास की ओपीडी नंबर- 15 में पहुंचा। यहां पर प्रो. केके पांडेय मिले तो उनको इस घटना से अवगत कराया। प्रो. पांडेय ने देखा कि मरीज की न तो श्वांस चल रही और न ही नाड़ी।

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तीन मिनट का गोल्डन टाइम
भीड़ के बीच में सीपीआर की एक साइकिल (चक्र) पूरी करने से पहले ही मरीज ने आंखें खोल दी। डॉक्टरों ने वहीं मुंह खोलकर चेक किया तो कफ जमा था। तो एक रेजिडेंट से आयुर्वेदिक ऑपरेशन थिएटर भेजकर ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई गई। बाद में रोगी की स्थिति सामान्य होने पर उसके परिजन उसे इमरजेंसी ओपीडी ले गए। 

छह महीने पहले भी प्रो. केके पांडेय और उनकी टीम ने इसी आर्युवेद संकाय में 22्र वर्ष की एक छात्रा की जान सीपीआर देकर बचाई थी। प्रो. केके पांडेय ने बताया कि हार्ट अटैक में रेस्क्यू देने का गोल्डन टाइम तीन मिनट का होता है। यदि सीपीआर दे दिया तो ब्रेन को ऑक्सीजन की सप्लाई हो जाती है। ऐसे में वह चेतना में लौट आएगा। क्योंकि रक्त प्रवाह न होने से ग्लूकोज तक सप्लाई नहीं हो पाता।

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