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बीएचयू में अब भूत विद्या की होगी पढ़ाई, छह महीने बाद मिलेगा सर्टिफिकेट

Wed, 25 Dec 2019 11:20 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 25 Dec 2019 11:20 AM IST
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BHU Ayurveda faculty will now study ghost education Science of Para-normal
बीएचयू में होगी भूत-प्रेत की पढ़ाई। - फोटो : अमर उजाला।

बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में अब भूत विद्या यानि साइंस आफ पैराकनॉर्मल की पढ़ाई होगी। छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसमें मनोचिकित्सा संबंधी विकारों, उपचार और मनोचिकित्सा के बारे में बताया जाएगा।

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आम तौर पर लोग इस तरह की विकृतियां आने पर भूत प्रेत का असर मानते हैं। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया कि संकाय में भूत विद्या की स्वतंत्र इकाई होगी। यह अष्टांग आयुर्वेद की आठ शाखाओं में से एक हैं। इस विषय पर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने वाला पहला संकाय है। एसोसिएट प्रोफेसर वैद्य सुशील दुबे ने बताया कि प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
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आईएमएस बीएचयू में जीरियाट्रिक मेडिसिन की पढ़ाई 
आईएमएस बीएचयू में अब जीरियाट्रिक मेडिसिन की पढ़ाई होगी। इसके लिए जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में एमडी पाठ्यक्रम शुरू हो गया है। इस तरह का पाठ्यक्रम चलाने वाला आईएमएस प्रदेश का पहला चिकित्सकीय संस्थान बन गया है। इसके पहले एम्स में एमडी मेडिसिन की पढ़ाई होती थी। इससे जहां एक ओर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई हो सकेगी, वहीं विभाग में सुविधाएं भी बढ़ेंगी।

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बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल में जीरियाट्रिक मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 60 साल से अधिक आयु वाले मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर ऑफ द एल्डरली और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

विभागाध्यक्ष डॉ. अनूप सिंह ने बताया कि अगले साल 2020 से एमडी जेरियाट्रिक के लिए तीन सीटों की अनुमति मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से मिल चुकी है। विभाग को फिलहाल सर सुंदरलाल अस्पताल में 40 बेड दिए गए हैं एवं इसकी ओपीडी प्रतिदिन होती है। बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग पंजीकरण काउंटर और जांच काउंटर की भी सुविधा है।

वृद्ध लोगों में गठिया की बढ़ती समस्या एवं गठिया के चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए जल्द ही जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में जेरियाट्रिक रूमेटोलॉजी में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम और फेलोशिप भी शुरू किया जाएगा।

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