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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Bhado From celebration of Kanha birth to Kajari and Teej month filled festivity over 24 fasts and festivals

भादो मास : कान्हा के जन्मोत्सव से कजरी और तीज तक का उल्लास, मासभर में 24 से ज्यादा व्रत और त्योहार; जानें खास

Mon, 31 Aug 2026 10:05 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 31 Aug 2026 10:05 PM IST
सार

भादो मास भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर कजरी और हरितालिका तीज तक उल्लास से भरा रहेगा। इस महीने 24 से अधिक व्रत और त्योहार पड़ेंगे। जन्माष्टमी, तीज, कजरी समेत कई पर्वों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पितृपक्ष की शुरुआत होगी, जिसमें लोग पूर्वजों का तर्पण और श्राद्ध करेंगे।

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Bhado From celebration of Kanha birth to Kajari and Teej month filled festivity over 24 fasts and festivals
इस्कॉन मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी पर अभिषेक करते अर्चक। - फोटो : संवाद

विस्तार

सावन में भगवान शिव की आराधना के बाद अब भक्त भगवान श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की महिमा का गुणगान करेंगे। यानी भादो मास शनिवार को शुरू हो गया। इस मास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेशोत्सव होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा के साथ ही पितरों का तर्पण और त्रिपिंडी आदि कर्मकांड शुरू हो जाएंगे। चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के साथ कालाष्टमी और शीतलाष्टमी भी मनाई जाएगी। जबकि 14 सितंबर को गणेशोत्सव और हरतालिका तीज पर्व होगा और 17 सितंबर से सोरहिया मेला शुरू हो जाएगा। भादो मासभर 24 से अधिक व्रत व पर्व मनाए जाएंगे।

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भाद्रपद हिंदू चंद्र पंचांग और भारतीय राष्ट्रीय पंचांग का छठा माह है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के निकट चंद्रमा की स्थिति से इसका नाम लिया गया है। यह माह मानसून (वर्षा) ऋतु के अनुरूप है। भादो 26 सितंबर की पूर्णिमा तक रहेगा। 
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हिंदू धर्मग्रंथों में भाद्रपद मास में भगवान श्रीकृष्ण, श्रीगणेश और भगवान श्रीविष्णु की खासतौर पर पूजा होती है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, महिलाओं के सुहाग का पर्व हरितालिका तीज, पुत्र की मनोकामना पूर्ति के लिए लोलार्क छठ (सूर्य षष्ठी), श्रीराधा अष्टमी एवं अनंत चतुर्दशी, जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण पर्व तथा लक्ष्मीजी की महिमा में होने वाला 16 दिनों का सोरहिया मेला खास पर्व हैं। 
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भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पितृपक्ष की शुरुआत हो जाएगी। 15 दिनों तक पूर्वजों के तर्पण और श्राद्ध कर्म चलेंगे। इस मास में मान्यता है कि भगवान श्रीगणेश, श्रीकृष्ण व विष्णु जी की पूजा करने से शांति और समस्त दुखों का निवारण होता है। बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने बताया कि सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी यानी नागपंचमी से सभी पर्व शुरू हो जाते हैं। भादो के बाद आश्विन मास में नवरात्र और दशहरा, शरद पूर्णिमा तथा कार्तिक मास में धनतेरस, दिवाली, अन्नकूट, भैया दूज और छठ पूजा होगी। कार्तिक के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

दक्षिण के सावन में 12 दिन बाकी, होती है शिव-गौरी की पूजा
वाराणसी। देश के पूर्वी और पश्चिमी राज्यों में श्रावण मास खत्म हो गया है, मगर दक्षिण और पश्चिम के राज्यों में सावन के 12 दिन अभी और बचे हैं। वहां 10 सितंबर को अमावस्या पर सावन की पूर्णाहुति होगी। उनका तीसरा सोमवार 31 अगस्त और चौथा सोमवार सात सितंबर को पड़ेगा। काशी में रह रहे पंच द्रविड़ राज्यों के लोग शिव-गौरी का पूजन-अर्चन कर रहे हैं। नवविवाहिताएं विशेष उत्सव मना रही हैं। 

पंच द्रविड़ राज्यों में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात का कच्छ क्षेत्र आता है। यहां पंच द्रविड़ पंचांग में हिंदू मास अमावस्या से शुरू होकर अमावस्या को ही समाप्त होता है। श्रीकाशी महाराष्ट्र सेवा समिति के ट्रस्टी संतोष सोलापुरकर ने बताया कि सावन (श्रावण) उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में करीब 15 दिन बाद शुरू होता है। क्योंकि यहां अमांत कैलेंडर माना जाता है, जिसमें मास अमावस्या के बाद शुरू होता है। सावन पूजा-पाठ के साथ त्योहारों, खान-पान के विशेष नियमों और प्रकृति के उत्सव का महीना है। 

भादो मास के व्रत और पर्व 26 तक
31 अगस्त कजरी तृतीया, संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, दो सितंबर हलषष्ठी व्रत, तीन को श्रीशीतला सप्तमी व्रत, चार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी व्रत, सात को अजा एकादशी व्रत, आठ को प्रदोष व्रत, नौ को शिवरात्रि व्रत, 10 को श्राद्ध की अमावस्या, 11 को स्नान-दानादि की अमावस्या, 14 को हरितालिका तीज, वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, 16 को ऋषि पंचमी, 17 को सूर्य षष्ठी व्रत लोलार्क छठ, 19 को श्रीदुर्गा अष्टमी व्रत, श्रीराधा अष्टमी व सोरहिया मेला, 22 को जलझूलनी एकादशी व्रत, 23 को वामन द्वादशी, 24 को प्रदोष व्रत, 25 को अनंत चतुर्दशी और 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है।

10 दिनों तक चलेगा गणेशोत्सव
मुंबई के बाद काशी में खासकर मराठी समाज में गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा। सार्वजनिक गणेशोत्सव सात से 10 दिन तक होगा। पूजा पंडाल सजाए जाएंगे। लोग पूजन-अर्चन करेंगे। सार्वजनिक पंडालों में गणेश की मूर्तियों की स्थापना, दैनिक प्रार्थना, प्रसाद चढ़ाना और भक्ति गीत गाना शामिल है। इसके बाद प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी। वहीं, घरों और समितियों में डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच, सात और 10 दिन का उत्सव मनाया जाएगा।

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