{"_id":"58c1698a4f1c1b9465dc58f3","slug":"beware-on-this-holi-with-chemical-colour","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"होली पर कहीं चेहरे की रंगत न बिगाड़ दें केमिकल वाले रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होली पर कहीं चेहरे की रंगत न बिगाड़ दें केमिकल वाले रंग
amarujala.com/presented by उत्पल कांत
Updated Thu, 09 Mar 2017 08:11 PM IST
विज्ञापन
holi
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिना रंगों की होली की कल्पना भी बेमानी है लेकिन जब इन्हीं रंगों में केमिकल मिलता है तो यह इतना खतरनाक हो जाता है कि यह किसी आंखों की रोशनी को छीन सकता है। किसी के चेहरे को बदसूरत भी बना सकता है। इसलिए हो सके तो होली पर केमिकलरहित रंगों का प्रयोग करें।
अगर केमिकल वाले रंगो का इस्तेमाल करें भी तो सावधानी से करें ताकि आपकी वजह से किसी के जीवन में अंधेरा न हो जाए। होली का रंग आप के चेहरे का नूर बिगाड़ सकता है। होली के रंग को खरीदने से पहले इसकी परख कर लें।
हर्बल रंग की आड़ में बाजार में नकली रंग भी आप को थमाया जा सकता है। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। एक समय था जब होली हर्बल रंगों से होती थी। लोग घरों में बने रंगों से होली खेलते थे। समय बदला और हर्बल रंगों की जगह केमिकल युक्त रंगों ने ले रखी है।
विज्ञापन
केमिकलयुक्त रंगों के प्रयोग से अक्सर आंखों की रोशनी जाने और चेहरा खराब होने की सूचना मिलती है। केमिकल रंगों से जहां एलर्जी होने की संभावना होती है वहीं दूसरी तरफ इनके ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।
मेटेलिक कलर के ज्यादा इस्तेमाल से स्किन कैंसर, एल्यूमिनियम और लौह के मिश्रण युक्त रंग के ज्यादा प्रयोग से किडनी की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इन दिनों बाजार में होली के रंगों की भरमार है।
मुनाफे के चक्कर में हर्बल रंग की आड़ में बाजार में नकली रंग भी मौजूद है। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
विज्ञापन
अगर केमिकल वाले रंगो का इस्तेमाल करें भी तो सावधानी से करें ताकि आपकी वजह से किसी के जीवन में अंधेरा न हो जाए। होली का रंग आप के चेहरे का नूर बिगाड़ सकता है। होली के रंग को खरीदने से पहले इसकी परख कर लें।
विज्ञापन
हर्बल रंग की आड़ में बाजार में नकली रंग भी आप को थमाया जा सकता है। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। एक समय था जब होली हर्बल रंगों से होती थी। लोग घरों में बने रंगों से होली खेलते थे। समय बदला और हर्बल रंगों की जगह केमिकल युक्त रंगों ने ले रखी है।
विज्ञापन
केमिकलयुक्त रंगों के प्रयोग से अक्सर आंखों की रोशनी जाने और चेहरा खराब होने की सूचना मिलती है। केमिकल रंगों से जहां एलर्जी होने की संभावना होती है वहीं दूसरी तरफ इनके ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।
मेटेलिक कलर के ज्यादा इस्तेमाल से स्किन कैंसर, एल्यूमिनियम और लौह के मिश्रण युक्त रंग के ज्यादा प्रयोग से किडनी की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इन दिनों बाजार में होली के रंगों की भरमार है।
मुनाफे के चक्कर में हर्बल रंग की आड़ में बाजार में नकली रंग भी मौजूद है। होली के रंगों की चैकिंग को लेकर प्रशासन कतई भी गंभीर नहीं है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
होली के रंग
- फोटो : Internet
अगर आप बाजार के केमिकलयुक्त और नकली हर्बल रंगों के प्रयोग से बचना चाहते हैं तो घर पर ही हर्बल रंग तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपकों को कुछ पौधों के पत्तों की जरूरत होगी।
हरा रंग बनाने के लिए मेहंदी के पत्तों को सुखाकर पावडर बना लें। हल्दी और बेसन को मिलाकर भी एक अच्छा रंग बनाया जा सकता है। गेंदे के फूलों को भी सूखाकर पेस्ट बनाकर प्रयोग किया जा सकता है।
लाल चंदन का पाउडर लाल रंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
गुलाब की पंखुड़ियां भी एक अच्छा विकल्प हैं, लाल गुड़हल के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें, सुबह इसे पीसकर लाल रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
हरा रंग बनाने के लिए मेहंदी के पत्तों को सुखाकर पावडर बना लें। हल्दी और बेसन को मिलाकर भी एक अच्छा रंग बनाया जा सकता है। गेंदे के फूलों को भी सूखाकर पेस्ट बनाकर प्रयोग किया जा सकता है।
लाल चंदन का पाउडर लाल रंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
गुलाब की पंखुड़ियां भी एक अच्छा विकल्प हैं, लाल गुड़हल के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर रख दें, सुबह इसे पीसकर लाल रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।