अयोध्या में ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं अब फैसला आने के बादे बनारस में भी पुलिस की सख्ती देखने को मिल रही है। ज्ञानवापी परिक्षेत्र में पुलिस का भी पहरा बढ़ा दिया गया है।
परिक्षेत्र के आसपास पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। वाराणसी में संवेदनशील इलाकों में पुलिस निगरानी कर रही है। पुलिस ज्ञानवापी परिक्षेत्र के आसपास चौकसी में लगी हुई है।
आज सुनाया गया फैसला:
सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में ढांचा विध्वंस किए जाने के मामले में बुधवार को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष अदालत के न्यायाधीश एसके यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ढांचा विध्वंस की घटना पूर्वनियोजित नहीं थी।
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बाबरी विध्वंस मामले में सभी आरोपी बरी
- फोटो : अमर उजाला
यह एक आकस्मिक घटना थी। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।
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ढांचा विध्वंस मामले में सभी आरोपी बरी
- फोटो : अमर उजाला
ये थे सभी 32 आरोपी
ढांचा विध्वंस केस में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे।