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यूपी के इस जिले में करोड़ों का हो रहा दीयों का कारोबार, चीन में भी मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 05 Nov 2018 11:37 AM IST
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दीये
- फोटो : self
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दीपावली पर मिट्टी के दीयों की मांग इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षा पांच गुना तक बढ़ी है। यूपी के आजमगढ़ में पहले दीपावली पर एक करोड़ तक होने वाला कारोबार इस बार पांच करोड़ के पार जाने को तैयार है। कारीगर मांग के अनुरूप दीये तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
डिजाइनर दीयों के विशेष मांग है। इसे पर्यावरण के प्रति जागरूकता कहें या कला के कद्रदानों में बढ़ोतरी, लेकिन निजामाबाद में कुछ ऐसा हो रहा है। कभी एक करोड़ से भी नीचे रहने वाला मिट्टी के दीयों का व्यापार इस बार पांच करोड़ के पार हो रहा है।
निजामाबाद क्षेत्र के 150 से ज्यादा कुम्हार परिवार 70 किस्म के दीये बनाते हैं। ये कार्य लगभग 800 वर्ष पहले से हो रहा है। इस वर्ष निजामाबाद के शिल्पकार बनाए गए दीयों से लगभग पांच करोड़ का कारोबार कर चुके हैं। कारोबार अभी इससे और आगे जाने की उम्मीद है।
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डिजाइनर दीयों के विशेष मांग है। इसे पर्यावरण के प्रति जागरूकता कहें या कला के कद्रदानों में बढ़ोतरी, लेकिन निजामाबाद में कुछ ऐसा हो रहा है। कभी एक करोड़ से भी नीचे रहने वाला मिट्टी के दीयों का व्यापार इस बार पांच करोड़ के पार हो रहा है।
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निजामाबाद क्षेत्र के 150 से ज्यादा कुम्हार परिवार 70 किस्म के दीये बनाते हैं। ये कार्य लगभग 800 वर्ष पहले से हो रहा है। इस वर्ष निजामाबाद के शिल्पकार बनाए गए दीयों से लगभग पांच करोड़ का कारोबार कर चुके हैं। कारोबार अभी इससे और आगे जाने की उम्मीद है।
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बनाए जा रहे नए किस्म के दीये
diya
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार सोहित कुमार प्रजापति ने बताते हैं कि पहले शिल्पकार अपने उत्पाद को स्वयं मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, कानपुर, नागपुर, चेन्नई आदि जगहों पर भेजते या ले जाते थे। इस बार सभी प्रदेशों से व्यापारी सीधे निजामाबाद आकर इनसे माल खरीद रहे हैं। इसी से व्यापार बढ़ रहा है।
एक दिन में आठ से 10 लाख रुपये के दीयों का कारोबार हो रहा है। प्रतिदिन नई तकनीकी और नई व्यवस्थाओं के साथ नये किस्म के दीये बनाए जा रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में प्रदेश स्तरीय व्यापारी इन दिनों डेरा डालकर बैठे हैं।
कारीगर मांग के अनुरूप दीये नहीं बना पा रहे हैं। दीपावली के त्योहार से लगभग छह महीने पहले से ही दीयों को बनाने का कार्य शुरू हो जाता है। लगभग डेढ़ सौ परिवार प्रतिदिन मेहनत करके मांग को पूरा करने का प्रयास करते हैं।
एक दिन में आठ से 10 लाख रुपये के दीयों का कारोबार हो रहा है। प्रतिदिन नई तकनीकी और नई व्यवस्थाओं के साथ नये किस्म के दीये बनाए जा रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में प्रदेश स्तरीय व्यापारी इन दिनों डेरा डालकर बैठे हैं।
कारीगर मांग के अनुरूप दीये नहीं बना पा रहे हैं। दीपावली के त्योहार से लगभग छह महीने पहले से ही दीयों को बनाने का कार्य शुरू हो जाता है। लगभग डेढ़ सौ परिवार प्रतिदिन मेहनत करके मांग को पूरा करने का प्रयास करते हैं।
दीयों की मांग चाइना तक
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शिल्पकार महेंद्र प्रजापति दीयों के सबसे बड़े व्यापारी हैं। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी समस्या ट्रांसपोर्ट की है। बेहतर व्यवस्था हो तो व्यापार 10 गुना बढ़ सकता है। सबसे चौंका देने वाली बात ये है कि निजामाबाद की दीयों की मांग चाइना में भी है। चाइना के लिए थर्ड पार्टी व्यापार करने वाले कुछ व्यापारी दिल्ली और मुंबई से निजामाबाद आकर दीयों की मांग कर रहे हैं।
ये व्यापारी दिल्ली और मुंबई के माध्यम से इस माल को चाइना ले जाकर बेचेंगे। झूम दीया, लक्ष्मी-गणेश दीया थाली, कटवर दीया, टी लाइट दीया, झूला दीया, छड़ दीया, रिंग दीया, पंचमुखी दीया आदि शामिल हैं। इनकी कीमत 15 से 150 रुपये तक है।
ये व्यापारी दिल्ली और मुंबई के माध्यम से इस माल को चाइना ले जाकर बेचेंगे। झूम दीया, लक्ष्मी-गणेश दीया थाली, कटवर दीया, टी लाइट दीया, झूला दीया, छड़ दीया, रिंग दीया, पंचमुखी दीया आदि शामिल हैं। इनकी कीमत 15 से 150 रुपये तक है।