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मैंने नामांकन किया तो अटल जी ने लगाई थी डांट
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अब तबीयत भी ठीक नहीं रहती है, थोड़ा बहुत याद है कि 1991 में कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ रही थी। कलराज मिश्र ने फोन कर नामांकन करने के लिए कहा था। नामांकन के बाद मैं प्रचार में लग गई थी। उसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी जी बनारस आए थे। लोहता स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे थे। उनसे मिली तो वह नाराज हो गए। उन्होंने डांटते हुए कहा कि तुमने किससे पूछकर नामांकन किया। मैंने बताया कि कलराज मिश्र के कहने पर। वह बिना बोले चले गए। मैं जीत गई। यह कहना है जिले से रिकॉर्ड चार बार विधायक रहीं ज्योत्सना श्रीवास्तव का।
ज्योत्सना ने बताया कि कलराज जी ने 1993 में फिर चुनाव लड़ने को कहा। इस बार भी मेरी जीत हुई थी। बाद में पता चला कि अटल जी की डांट जीत के लिए मेहनत करने के लिए थी। आपातकाल के दौरान वाजपेयी जी वाराणसी आए थे। कार्यकर्ता खाने की व्यवस्था करना भूल गए थे। मेरे पति हरीश उन्हें लेकर घर आ गए। मैं घर पर नहीं थी। पति ने टेलीफोन कर घर बुलाया और कहा कि आठ बजे के बाद वाजपेयी जी खाना नहीं खाते हैं। मैं साढ़े सात बजे घर पहुंची जल्दी-जल्दी दाल, चावल और सब्जी बनाकर दी। सब लोगों ने खाया और अगले दिन सब लोग अपने-अपने काम पर निकल गए। चार बार के पूर्व विधायक रहे शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि जब चुनाव की तैयारी कर रहा था तो उन दिनों मुझे पता चला कि शिवपुर विधानसभा से पहली महिला विधायक चुनाव जीती थी। 1957 में महनोत सज्जन देवी बहुत तेज तर्रार विधायक रहीं।
जिले से पांच महिला विधायक बनीं
1952 से लेकर अब तक हुए विधानसभा चुनाव में जिले में ज्योत्सना श्रीवास्तव एकमात्र ऐसी नेता हैं जो चार बार महिला विधायक रहीं। यह एक रिकॉड भी है। विधानसभा चुनाव में वाराणसी में चार बार महिला विधायक होने का रिकॉर्ड ज्योत्सना श्रीवास्तव के नाम पर है। इनके अलावा चार और महिला विधायक रहीं जो एक-एक बार विधायक बन चुकी हैं। इनमें महनोत सज्जन देवी, धनेश्वरी देवी, राबिया कलाम और अनुप्रिया पटेल शामिल हैं।
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जिले से ये पांच महिला विधायक चुनी गईं
-1957 के चुनाव में शिवपुर सीट से कांग्रेस की महनोत सज्जन देवी ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामनारायण को 5532 वोटों से हराया था।
-1980 में गंगापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस आई की धनेश्वरी देवी ने सीपीएम के राजकिशोर को 813 वोटों से हराया था।
-भाजपा की ज्योत्सना श्रीवास्तव ने चार बार विधायक बन चुकी हैं। 1991, 1993 2007, 2012 में विधायक रहीं।
-उत्तरी सीट से विधायक अब्दुल कलाम की मौत के बाद उनकी पत्नी राबिया कलाम उपचुनाव में विधायक बनी थीं।
-2012 में रोहनिया से अपना दल की अनुप्रिया पटेल विधायक बनी थीं। 2014 में मिर्जापुर की सांसद बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
नोट-उक्त आंकड़े चुनाव आयोग के अनुसार हैं।
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ज्योत्सना ने बताया कि कलराज जी ने 1993 में फिर चुनाव लड़ने को कहा। इस बार भी मेरी जीत हुई थी। बाद में पता चला कि अटल जी की डांट जीत के लिए मेहनत करने के लिए थी। आपातकाल के दौरान वाजपेयी जी वाराणसी आए थे। कार्यकर्ता खाने की व्यवस्था करना भूल गए थे। मेरे पति हरीश उन्हें लेकर घर आ गए। मैं घर पर नहीं थी। पति ने टेलीफोन कर घर बुलाया और कहा कि आठ बजे के बाद वाजपेयी जी खाना नहीं खाते हैं। मैं साढ़े सात बजे घर पहुंची जल्दी-जल्दी दाल, चावल और सब्जी बनाकर दी। सब लोगों ने खाया और अगले दिन सब लोग अपने-अपने काम पर निकल गए। चार बार के पूर्व विधायक रहे शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि जब चुनाव की तैयारी कर रहा था तो उन दिनों मुझे पता चला कि शिवपुर विधानसभा से पहली महिला विधायक चुनाव जीती थी। 1957 में महनोत सज्जन देवी बहुत तेज तर्रार विधायक रहीं।
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जिले से पांच महिला विधायक बनीं
1952 से लेकर अब तक हुए विधानसभा चुनाव में जिले में ज्योत्सना श्रीवास्तव एकमात्र ऐसी नेता हैं जो चार बार महिला विधायक रहीं। यह एक रिकॉड भी है। विधानसभा चुनाव में वाराणसी में चार बार महिला विधायक होने का रिकॉर्ड ज्योत्सना श्रीवास्तव के नाम पर है। इनके अलावा चार और महिला विधायक रहीं जो एक-एक बार विधायक बन चुकी हैं। इनमें महनोत सज्जन देवी, धनेश्वरी देवी, राबिया कलाम और अनुप्रिया पटेल शामिल हैं।
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जिले से ये पांच महिला विधायक चुनी गईं
-1957 के चुनाव में शिवपुर सीट से कांग्रेस की महनोत सज्जन देवी ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामनारायण को 5532 वोटों से हराया था।
-1980 में गंगापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस आई की धनेश्वरी देवी ने सीपीएम के राजकिशोर को 813 वोटों से हराया था।
-भाजपा की ज्योत्सना श्रीवास्तव ने चार बार विधायक बन चुकी हैं। 1991, 1993 2007, 2012 में विधायक रहीं।
-उत्तरी सीट से विधायक अब्दुल कलाम की मौत के बाद उनकी पत्नी राबिया कलाम उपचुनाव में विधायक बनी थीं।
-2012 में रोहनिया से अपना दल की अनुप्रिया पटेल विधायक बनी थीं। 2014 में मिर्जापुर की सांसद बनने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
नोट-उक्त आंकड़े चुनाव आयोग के अनुसार हैं।