{"_id":"5fe0fde98ebc3e3b590a130f","slug":"atal-bihari-varanasi-news-vns5647783103","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजनीति में मुकाम बनाने के बाद भी बनारस से रिश्ता रहा अटल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजनीति में मुकाम बनाने के बाद भी बनारस से रिश्ता रहा अटल
विज्ञापन
वाराणसी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद भी काशी और यहां के लोगों से उनका रिश्ता अटूट रहा। अपनी वाणी से कायल बना लेने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारिता का कहहरा बनारस में ही सीखा। उनके अंदर के कवि को भी बनारस में ही सबसे पहले प्रतिष्ठा मिली थी। यही कारण है कि काशी और यहां के लोगों से रिश्ता निभाने में उन्होंने अटल मिसाल पेश की।
समाचार अखबार के संपादक रहे मोहन लाल गुप्त उर्फ भैया जी बनारसी और उनके परिवार से पूर्व पीएम अटल बिहारी का अटूट संबंध रहा। भैयाजी के पुत्र राजेंद्र गुप्त बताते हैं कि एक बार उनके चाचा के दोनों बच्चों संजय और संगीता को डिप्थीरिया बीमारी हो गई थी। उन दिनों बनारस में डिप्थीरिया का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। बिना इंजेक्शन के दोनों बच्चों की जान बचना संभव नहीं था। ऐसे में काफी संकोच करते हुए भैयाजी ने अटलजी से संपर्क किया। तब अटलजी विदेश मंत्री हुआ करते थे। अटलजी ने उसी दिन अपने एक करीबी व्यक्ति को विमान से 12 इंजेक्शनों के साथ बनारस भेजा था। इसके बाद दोनों बच्चे ठीक हुए। हालांकि संगीता का कुछ वर्ष पूर्व बीमारी से निधन हो गया, जबकि संजय अब भी रेलवे में नौकरी करते हैं
राजेंद्र गुप्त बताते हैं कि पिता भैया जी बनारसी समाचार अखबार के संपादक थे। अटल बिहारी वाजपेयी का संस्कृति और राजनीतिक संस्कार विषयक उनके आलेख सबसे पहले ‘समाचार’ अखबार में ही प्रकाशित हुए।
विज्ञापन
इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वदेश नामक एक समाचार पत्र के लिए बतौर संवाददाता भी काम किया। स्वदेश के लिए ही अटल बिहारी ने टाउनहाल में होने वाले संगीत परिषद के राष्ट्रीय आयोजन की कवरेज भी की थी।
काशी में अटल की कविताओं को मिली पहचान
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं को काशी में पहचान मिली। समाचार अखबार के साप्ताहिक अंक में अटल की कई आरंभिक कविताओं को भी स्थान मिला। इसके बाद मंचों पर उन्हें जगह मिली और वे कवि के रूप में स्थापित हुए।
विज्ञापन
समाचार अखबार के संपादक रहे मोहन लाल गुप्त उर्फ भैया जी बनारसी और उनके परिवार से पूर्व पीएम अटल बिहारी का अटूट संबंध रहा। भैयाजी के पुत्र राजेंद्र गुप्त बताते हैं कि एक बार उनके चाचा के दोनों बच्चों संजय और संगीता को डिप्थीरिया बीमारी हो गई थी। उन दिनों बनारस में डिप्थीरिया का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। बिना इंजेक्शन के दोनों बच्चों की जान बचना संभव नहीं था। ऐसे में काफी संकोच करते हुए भैयाजी ने अटलजी से संपर्क किया। तब अटलजी विदेश मंत्री हुआ करते थे। अटलजी ने उसी दिन अपने एक करीबी व्यक्ति को विमान से 12 इंजेक्शनों के साथ बनारस भेजा था। इसके बाद दोनों बच्चे ठीक हुए। हालांकि संगीता का कुछ वर्ष पूर्व बीमारी से निधन हो गया, जबकि संजय अब भी रेलवे में नौकरी करते हैं
विज्ञापन
राजेंद्र गुप्त बताते हैं कि पिता भैया जी बनारसी समाचार अखबार के संपादक थे। अटल बिहारी वाजपेयी का संस्कृति और राजनीतिक संस्कार विषयक उनके आलेख सबसे पहले ‘समाचार’ अखबार में ही प्रकाशित हुए।
विज्ञापन
इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वदेश नामक एक समाचार पत्र के लिए बतौर संवाददाता भी काम किया। स्वदेश के लिए ही अटल बिहारी ने टाउनहाल में होने वाले संगीत परिषद के राष्ट्रीय आयोजन की कवरेज भी की थी।
काशी में अटल की कविताओं को मिली पहचान
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं को काशी में पहचान मिली। समाचार अखबार के साप्ताहिक अंक में अटल की कई आरंभिक कविताओं को भी स्थान मिला। इसके बाद मंचों पर उन्हें जगह मिली और वे कवि के रूप में स्थापित हुए।