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सेना भर्ती कार्यालय ने पेपर लीक से पल्ला झाड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 26 Apr 2016 02:14 AM IST
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विनीत प्रभात
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सेना भर्ती का पेपर आउट होने के मामले में सेना के अधिकारी अब बैकफुट पर आ गए हैं। सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी के निदेशक कर्नल विनीत प्रभात ने सोमवार को इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि सेना भर्ती का पेपर आउट तो हुआ है लेकिन वाराणसी सेना भर्ती कार्यालय का इससे कोई वास्ता नहीं है। भर्ती कार्यालय का कोई कर्मचारी इसमें शामिल नहीं है। कहा कि एसटीएफ ने पेपर आउट का खुलासा करना सराहनीय है लेकिन उसका वाराणसी सेना कार्यालय पर आरोप लगाना गलत है। कहा रद हुई परीक्षा देश भर में 15 मई को कराई जा सकती है। जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी परिसर में फरवरी महीने में गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया और देवरिया जिले के अभ्यर्थियों की भर्ती हुई थी। इसमें 2244 अभ्यर्थियों ने शारीरिक और मेडिकल परीक्षा पास की थी। रविवार की सुबह नौ से दस बजे तक सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी के परिसर में इनकी लिखित परीक्षा हुई। परीक्षा समाप्त होने के कुछ देर बाद ही सेना भर्ती कार्यालय में एसटीएफ पहुंची। एसटीएफ ने सेना के अधिकारियों को बताया कि पेपर पहले ही आउट हो गया था। उनके लखनऊ के एक अधिकारी को मुखबिर के जरिए शनिवार की देर रात ही इसकी जानकारी मिली थी। मुखबिराें के जरिये उन्होंने अपने वाट्सएप पर भी पेपर मंगवाया।
वाट्सएप पर आया पेपर मूल पेपर से पूरी तरह मेल खा रहा था। ट्रेड्समैन का पेपर आउट हुआ था। एसटीएफ की मानें तो उसके पास जो पेपर समेत जो कागजात पहुंचे, उस पर सूबेदार मेजर राजेश, वाराणसी की मुहर लगी थी। इसे लेकर ही सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी के अधिकारी परेशान हैं। कर्नल विनीत प्रभात का कहना है कि किसी भी ओएमआर शीट पर मुहर नहीं लगती। दोनों पेपर के सीरियल नंबर भी अलग-अलग हैं। छपाई में भी अंतर है।
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मथुरा के मास्टर माइंड की तलाश हुई तेज
पेपर आउट मामले के सूत्रधार मथुरा निवासी दलाल प्रवीण की तलाश तेज कर दी गई है। उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए मथुरा पुलिस से भी संपर्क किया गया है। फिलहाल उसकी लोकेशन मुंबई में मिल रही है। उसने 12 से 15 लाख रुपये में पेपर बेचे हैं। यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान तक रैकेट के तार जुड़े हुए हैं।
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सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी परिसर में फरवरी महीने में गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया और देवरिया जिले के अभ्यर्थियों की भर्ती हुई थी। इसमें 2244 अभ्यर्थियों ने शारीरिक और मेडिकल परीक्षा पास की थी। रविवार की सुबह नौ से दस बजे तक सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी के परिसर में इनकी लिखित परीक्षा हुई। परीक्षा समाप्त होने के कुछ देर बाद ही सेना भर्ती कार्यालय में एसटीएफ पहुंची। एसटीएफ ने सेना के अधिकारियों को बताया कि पेपर पहले ही आउट हो गया था। उनके लखनऊ के एक अधिकारी को मुखबिर के जरिए शनिवार की देर रात ही इसकी जानकारी मिली थी। मुखबिराें के जरिये उन्होंने अपने वाट्सएप पर भी पेपर मंगवाया।
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वाट्सएप पर आया पेपर मूल पेपर से पूरी तरह मेल खा रहा था। ट्रेड्समैन का पेपर आउट हुआ था। एसटीएफ की मानें तो उसके पास जो पेपर समेत जो कागजात पहुंचे, उस पर सूबेदार मेजर राजेश, वाराणसी की मुहर लगी थी। इसे लेकर ही सेना भर्ती कार्यालय वाराणसी के अधिकारी परेशान हैं। कर्नल विनीत प्रभात का कहना है कि किसी भी ओएमआर शीट पर मुहर नहीं लगती। दोनों पेपर के सीरियल नंबर भी अलग-अलग हैं। छपाई में भी अंतर है।
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मथुरा के मास्टर माइंड की तलाश हुई तेज
पेपर आउट मामले के सूत्रधार मथुरा निवासी दलाल प्रवीण की तलाश तेज कर दी गई है। उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए मथुरा पुलिस से भी संपर्क किया गया है। फिलहाल उसकी लोकेशन मुंबई में मिल रही है। उसने 12 से 15 लाख रुपये में पेपर बेचे हैं। यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान तक रैकेट के तार जुड़े हुए हैं।