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Varanasi: रूस के एंटोन एंड्रीव ने अपनाया हिंदू धर्म, काशी में तंत्र दीक्षा के बाद बने अनंतानंद नाथ

Thu, 18 May 2023 05:58 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 18 May 2023 05:58 PM IST
सार

 रूस में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एंटोन एंड्रीव ने हिंदू धर्म अपना लिया। गुरुवार को वाराणसी में तंत्र दीक्षा के बाद वो अनंतानंद नाथ बन गए। अनंतानंद को गुरु मंत्र और गोत्र कश्यप मिला। 

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Anton Andreev from russia beacme Anantanand Nath after  Tantra Deeksha in varanasi
काशी में तंत्र दीक्षा अनुष्ठान करते एंटोन एंड्रीव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रूस के एंटोन एंड्रीव तंत्र दीक्षा के साथ ही अनंतानंद नाथ बन गए। वाराणसी के शिवाला स्थित वाग्योग चेतना पीठम में गुरुवार को आयोजित अनुष्ठान के दौरान एंटोन की तंत्र दीक्षा पूरी हुई। अनंतानंद को गुरु मंत्र और गोत्र कश्यप मिला। इसके साथ ही अनंतानंद नाथ की सनातन धर्म की यात्रा भी शुरू हो गई।

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तंत्र दीक्षा की शुरुआत आशापति शास्त्री के आचार्यत्व में पं. सत्यम शास्त्री और पं. विनीत शास्त्री ने की। पीतांबर धारण किए एंटन पूजन के दौरान सनातनी भाव में डूबे हुए नजर आए। विधि-विधान व दीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनंतानंद नाथ ने बताया कि वे परमात्मा की शरण में जाने और उच्च साधना के लिए मंत्र की दीक्षा ली है।

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रूस-यूक्रेन के युद्ध से काफी व्यथित

वर्तमान में वह रूस और यूक्रेन के युद्ध से काफी व्यथित हैं और इसकी शांति के लिए मां तारा से प्रार्थना करेंगे। एंटोन महामहोपाध्याय आचार्य वागीश शास्त्री के संपर्क में 2015 में आए थे लेकिन समय नहीं होने के कारण साधना पूरी नहीं कर सके थे। उन्होंने आशापति के सानिध्य में कुंडलिनी साधना की संपूर्ण 10 कक्षाएं पूर्ण कीं।

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80 देशों के 15 हजार विदेशी शिष्य ले चुके हैं दीक्षा

Anton Andreev from russia beacme Anantanand Nath after  Tantra Deeksha in varanasi
काशी में तंत्र दीक्षा अनुष्ठान करते एंटोन एंड्रीव - फोटो : अमर उजाला

पंडित आशापति शास्त्री ने बताया कि दुनिया में यूक्रेन और रूस से दीक्षा लेने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। गुरु वागीश शास्त्री और मेरे द्वारा अब तक 80 देशों के 15 हजार विदेशी शिष्यों को दीक्षा दी गई है। दीक्षा लेने की परंपरा 1980 में शुरू की गई थी। तब से लगातार यह काम चल रहा है। जो व्यक्ति पात्र है, उसी को दीक्षा दी जाती है।

रूस में मनोविज्ञानी हैं एंटोन

एंटोन एंड्रिव ने बताया कि वह रूस में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं। उन्हें रूस में बनारस के वागीश शास्त्री के बारे में पता चला और कुंडलिनी जागृत करने की इच्छा हुई। कुछ कक्षाएं भी लीं लेकिन पूरा नहीं कर पाए।

कई व्यवधान के बाद 2022 में गुरु वागीश शास्त्री का निधन हो गया था। 10 दिनों के ध्यान के दौरान मुझे जो अनुभूति हुई है उसको शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। यह सनातन धर्म और काशी की मिट्टी की शक्ति है, जिसने मेरी दीक्षा को पूर्ण किया।

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