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यूपी में पुलिस और पशु तस्करों के खेल ने लील ली परिवार की सात जिंदगियां
Wed, 02 Jan 2019 11:35 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
Published by: shashikant misra
Updated Wed, 02 Jan 2019 11:35 AM IST
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झोपड़ी में घुसा ट्रक
- फोटो : amar ujala
यूपी के चंदौली में पुलिस और पशु तस्करों के खेल ने सात लोगों की जिंदगियां लील ली। जिले के इलिया थाना अतंर्गत इलिया हाटा मार्ग पर मंगलवार की भोर में पुलिस का पीछा करने पर मवेशी लदा डीसीएम (ट्रक) मालदह गांव में सड़क के किनारे स्थित झोपड़ी में घुस गई। इससे झोपड़ी में सो रहे एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मासूम गंभीर रूप से जख्मी हो गई।
घटना के बाद ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। काफी मान मनौव्वल के बाद दोपहर एक बजे ग्रामीणों ने शव को उठाने दिया। डीएम ने मृतकों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने, पांच पांच लाख रुपये मुआवजा देने, भूमि का पट्टा देने और आवास देने की घोषणा की।
वहीं एसपी ने लापरवाही पर इलिया एसओ, हल्का दरोगा और दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया चकिया कोतवाल को लाइनहाजिर किया। डायल 100 के चालक होमगार्ड के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा। वहीं चकिया सीओ के खिलाफ डीजीपी को पत्र लिखा। इसके बाद दोपहर बाद शव उठाया जा सका।
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बिहार सीमा के सटे मालदह गांव निवासी कल्लू मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। भूमिहीन होने के कारण पूरा परिवार सड़क के किनारे मड़ई बनाकर रहता था। सोमवार की रात वह स्वयं सिवान में सोने चला गया जबकि घर में उसकी पत्नी सामा देवी (55), बेटा रामकिशुन (35), रामकिशुन की पत्नी सुदामी (32), रामकिशुन के बच्चे निशा (10), मोनी उर्फ अंजली (06), गोलू (08), मोलू (2), मुन्नी (4) मड़ई में सो रहे थे।
भोर में पांच बजे एक डीसीएम पर गोवंश लादकर तस्कर माल्दह के रास्ते बिहार जा रहे थे। इस बीच डायल 100 पुलिस ने ट्रक का पीछा किया। पुलिस से बचने के चक्कर में सड़क पर बने ब्रेकर पर वाहन असंतुलित हो गया और बिजली के पोल को तोड़ते हुए मड़ई में घुस गई। मड़ई में सो रहे लोगों को रौंदते हुए ट्रक खेत में जाकर फंस गई।
घटना के बाद चालक और तस्कर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद मौके पर जुटे लोगों ने मलबा हटाया तो छह लोगों की मौत हो चुकी थी। घटना में बची मोनी उर्फ अंजली और सामा देवी को चकिया जिला संयुक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां सामा देवी की भी मौत हो गई।
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घटना के बाद ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। काफी मान मनौव्वल के बाद दोपहर एक बजे ग्रामीणों ने शव को उठाने दिया। डीएम ने मृतकों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने, पांच पांच लाख रुपये मुआवजा देने, भूमि का पट्टा देने और आवास देने की घोषणा की।
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वहीं एसपी ने लापरवाही पर इलिया एसओ, हल्का दरोगा और दो कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया चकिया कोतवाल को लाइनहाजिर किया। डायल 100 के चालक होमगार्ड के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा। वहीं चकिया सीओ के खिलाफ डीजीपी को पत्र लिखा। इसके बाद दोपहर बाद शव उठाया जा सका।
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बिहार सीमा के सटे मालदह गांव निवासी कल्लू मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। भूमिहीन होने के कारण पूरा परिवार सड़क के किनारे मड़ई बनाकर रहता था। सोमवार की रात वह स्वयं सिवान में सोने चला गया जबकि घर में उसकी पत्नी सामा देवी (55), बेटा रामकिशुन (35), रामकिशुन की पत्नी सुदामी (32), रामकिशुन के बच्चे निशा (10), मोनी उर्फ अंजली (06), गोलू (08), मोलू (2), मुन्नी (4) मड़ई में सो रहे थे।
भोर में पांच बजे एक डीसीएम पर गोवंश लादकर तस्कर माल्दह के रास्ते बिहार जा रहे थे। इस बीच डायल 100 पुलिस ने ट्रक का पीछा किया। पुलिस से बचने के चक्कर में सड़क पर बने ब्रेकर पर वाहन असंतुलित हो गया और बिजली के पोल को तोड़ते हुए मड़ई में घुस गई। मड़ई में सो रहे लोगों को रौंदते हुए ट्रक खेत में जाकर फंस गई।
घटना के बाद चालक और तस्कर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद मौके पर जुटे लोगों ने मलबा हटाया तो छह लोगों की मौत हो चुकी थी। घटना में बची मोनी उर्फ अंजली और सामा देवी को चकिया जिला संयुक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां सामा देवी की भी मौत हो गई।
पशु तस्करी का धंधा पूरे जिले में फल फूल रहा
गोवंश
- फोटो : amar ujala
पशु तस्करी का धंधा पूरे जिले में फल फूल रहा है। इसमें भी धंधे के लिए चकिया, नौगढ़ तथा इलिया थाना क्षेत्र के बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों को सेफ जोन माना जा रहा है। इन तीनों थाना क्षेत्रों में बिहार जाने के लिए कई कच्चे-पक्के रास्ते हैं। जहां से तस्करी हो रही है। इसमें पुलिस के साथ दबंग और बड़े नेता भी शामिल हैं। पशुओं को बिहार पहुंचाने के लिए पनहा के नाम पर मोटी रकम कमा रहे हैं। यही कारण है कि जनपद में पशु तस्करी का धंधा दशकों से फल-फूल रहा है।
चकिया कोतवाली क्षेत्र में मिर्जापुर की ओर से अहरौरा या अदलहाट के रास्ते पशु तस्कर वाहन से प्रवेश करते हैं तथा लेवा-इलिया मार्ग, चकिया, अहरौरा मार्ग, चकिया-इलिया मार्ग के जरिये पुलिस की मिलीभगत से वाहनों को बिहार पहुंचाने में कामयाब होते रहे हैं। वाहनों से पशु तस्करी के धंधे में लोकल लोगों की भागीदारी न के बराबर होती है।
वही पैदल पशुओं को लेकर बिहार की सीमा तक पहुंचाने में रास्ते में पड़ने वाले गांवों के दबंगों की भूमिका अधिकतम रहती है। इससे पुलिस पशु तस्करों के अलावा पनहा वसूलने वालों पर भी समय-समय पर कार्रवाई करती रही है। पशु तस्करी के धंधे में बड़ा फयदा होने के कारण इस धंधे में लगे लोग इसे छोड़ नहीं पाते। इसलिए धंधा काफी समय से जारी है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पशु तस्करी पर रोक लगाने का प्रयास किया गया लेकिन तस्करों ने दूसरा रास्ता अपना लिया। वर्तमान समय में लग्जरी वाहनों से भी तस्करी की जा रही है। यही नहीं अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में तस्कर पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं।
तीन से चार से छह पशुओं को मुश्किल से खड़े होने वाले ट्रक में बीस से 25 पशुओं को भर देते हैं। यही नहीं पशुओं को तिरपाल से ढंक कर ले चलते हैं। अक्सर ही इसका विरोध किया जाता है। बावजूद इसके पुलिस और तस्कर की गठजोड़ से यह धंधा जारी है।
चकिया कोतवाली क्षेत्र में मिर्जापुर की ओर से अहरौरा या अदलहाट के रास्ते पशु तस्कर वाहन से प्रवेश करते हैं तथा लेवा-इलिया मार्ग, चकिया, अहरौरा मार्ग, चकिया-इलिया मार्ग के जरिये पुलिस की मिलीभगत से वाहनों को बिहार पहुंचाने में कामयाब होते रहे हैं। वाहनों से पशु तस्करी के धंधे में लोकल लोगों की भागीदारी न के बराबर होती है।
वही पैदल पशुओं को लेकर बिहार की सीमा तक पहुंचाने में रास्ते में पड़ने वाले गांवों के दबंगों की भूमिका अधिकतम रहती है। इससे पुलिस पशु तस्करों के अलावा पनहा वसूलने वालों पर भी समय-समय पर कार्रवाई करती रही है। पशु तस्करी के धंधे में बड़ा फयदा होने के कारण इस धंधे में लगे लोग इसे छोड़ नहीं पाते। इसलिए धंधा काफी समय से जारी है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पशु तस्करी पर रोक लगाने का प्रयास किया गया लेकिन तस्करों ने दूसरा रास्ता अपना लिया। वर्तमान समय में लग्जरी वाहनों से भी तस्करी की जा रही है। यही नहीं अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में तस्कर पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं।
तीन से चार से छह पशुओं को मुश्किल से खड़े होने वाले ट्रक में बीस से 25 पशुओं को भर देते हैं। यही नहीं पशुओं को तिरपाल से ढंक कर ले चलते हैं। अक्सर ही इसका विरोध किया जाता है। बावजूद इसके पुलिस और तस्कर की गठजोड़ से यह धंधा जारी है।
अखिलेश यादव ने ली जानकारी
chandauli
- फोटो : amar ujala
मालदह की घटना ने पूर्व सीएम व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी झाकझोर दिया है। जानकारी होने के तुरंत बाद ही उन्होने मंगलवार की देर शाम सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायन राजभर और विधायक प्रभुनारायन सिंह यादव को फोन करके घटना की पूरी जानकारी ली।
उन्होने सपा नेताओं को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करें और इसमें किसी प्रकार की कोताही न हो। साथ ही उन्होने आश्वासन दिया है कि पार्टी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी।
उधर, सात लोगों की मौत के बाद मंगलवार को जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। सकलडीहा विधायक प्रभुनारायण यादव, पूर्व सांसद रामकिशुन यादव व बसपा जिलाध्यक्ष घनश्याम प्रधान संग कई ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। साथ ही शोक संतप्त परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
उन्होने सपा नेताओं को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करें और इसमें किसी प्रकार की कोताही न हो। साथ ही उन्होने आश्वासन दिया है कि पार्टी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी।
उधर, सात लोगों की मौत के बाद मंगलवार को जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। सकलडीहा विधायक प्रभुनारायण यादव, पूर्व सांसद रामकिशुन यादव व बसपा जिलाध्यक्ष घनश्याम प्रधान संग कई ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। साथ ही शोक संतप्त परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।