प्रधानमंत्री मोदी की जमीन मजबूत करने मैदान में उतरे अमित शाह, इस बात से बढ़ी है टेंशन
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अब से प्रति माह होने वाली पीएम मोदी की रैलियों को लेकर ना सिर्फ रणनीति तैयार की जाएगी, बल्कि पूर्वांचल समेत प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों के काम काज का फीडबैक भी लेंगे। केंद्र की मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के बाद अब सरकार की योजनाओं और परियोजनाओं को जनता के बीच पहुंचाने के लिए पार्टी ने रणनीति तैयार की है।
इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग अलग हिस्सों में रैली को संबोधित करेंगे। इसकी शुरुआत चार साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने बागपत से की और इसके बाद मगहर में रैली कर अपने अभियान को धार दिया।
चुनाव से पहले पीएम की रैलियों और केंद्र की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को घर घर पहुंचाने की रणनीति के साथ भाजपा के चाणक्य अमित शाह मैदान में उतरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा से सोशल मीडिया को हथियार बनाकर कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा जाएगा।
सबसे अहम बात यह है कि काशी दौरे में अमित शाह इस क्षेत्र के सांसदों से बात नहीं करेंगे, बल्कि उनके काम काज का फीडबैक लेंगे। कुल मिलाकर शाह का वाराणसी का यह दौरा लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की जमीन को मजबूत करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।
इस बात से भगवा खेमे में टेंशन
इस दौरे में भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले शाह यहां विपक्ष के संभावित महागठबंधन को चित करने की व्यूह रचना के साथ पार्टी के मिशन 2019 के लिए जमीन तैयार करेंगे। यूपी के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे शाह कार्यकर्ताओं को चुनावी महाभियान की तैयारियों पर खास टिप्स देंगे।
दरअसल, शहर से गांवों तक आम जन के बीच सीधी पैठ बढ़ाने के साथ ही भाजपा अध्यक्ष सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर मोर्चेबंदी की अपनी खास रणनीति से कार्यकर्ताओं को रूबरू कराएंगे।
भगवा खेमे की सबसे बड़ी टेंशन कम हो रहा वोट प्रतिशत है। 2014 में भाजपा को कुल 42.6 प्रतिशत वोट मिले थे, इस चुनाव में सपा को 22.4 और बसपा को 19.8 प्रतिशत वोट मिला था।
मगर 2017 में भाजपा को 41.6 प्रतिशत वोट मिले, जो लोकसभा चुनाव से एक प्रतिशत कम रहा। इसी चुनाव में सपा को 28.3 और बसपा को 22.4 फीसदी मत मिले थे। दोनों दलों ने 50 फीसदी से अधिक मत हासिल किए थे। वोट प्रतिशत का यह आंकड़ा भाजपा के लिए चुनौती है।