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अमर उजाला पड़ताल: बाथरूम के गेट के पास हो रही कैंसर मरीजों की ड्रेसिंग, वेटिंग हॉल में लगा ताला; BHU का हाल
Thu, 06 Jun 2024 01:15 PM IST
अमन विश्वकर्मा
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 06 Jun 2024 01:15 PM IST
सार
Varanasi News: सर्जिकल आंकोलॉजी ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए वेटिंग हाॅल बना है, लेकिन उसपर ताला लगा है। बुधवार को ताला बंद होने से मरीज जमीन पर बैठे रहे। कुछ लोग कुर्सी पर बैठे नजर आए। कुछ मरीजों ने बताया कि 15 दिन पहले जब डॉक्टर को दिखाने आए थे, तब भी वेटिंग हॉल में ताला बंद था।
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बीएचयू सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में सर्जिकल अंकोलाजी डिपार्टमेंट की ओपीडी का हाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू अस्पताल में कैंसर की सर्जरी करवा चुके मरीजों को ड्रेसिंग करवाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त जगह न होने से गलियारे में ड्रेसिंग की व्यवस्था है। वहीं, उसी जगह बाथरूम का गेट भी है। बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के भूतल पर चलने वाली सर्जिकल आंकोलॉजी ओपीडी में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला।
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बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी की ओपीडी पहले बीएचयू अस्पताल में चलती थी। कुछ दिन पहले ही इसे सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) में शिफ्ट किया गया है। यहां वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के विभिन्न जिलों और बिहार से करीब 300 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से कुछ मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें ओपीडी में ही प्राथमिक स्तर की जांच करानी पड़ती है। साथ ही पहले से सर्जरी करवा चुके मरीजों की ड्रेसिंग भी होती है।
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एसएसबी में जिस गलियारे में ड्रेसिंग टेबल लगाई गई है, वहीं पर बाथरूम भी है, उसका गेट हमेशा खुला रहता है। उसी गलियारे में बुधवार को पैरामेडिकल स्टाफ मरीज की ड्रेसिंग कर रहे थे। यहां ऊपर की फाॅलसीलिंग भी लगातार टूटी रही है। इस कारण ड्रेसिंग करते समय ऊपर रखे सामान के गिरने का भी खतरा बना रहता है।
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कुर्सी हटाते हैं डॉक्टर, तब स्ट्रेचर पर लेटते हैं मरीज
ओपीडी में दो कमरों में डॉक्टर बैठकर मरीजों को देखते हैं। यहीं पर स्ट्रेचर भी रखी रहती है, जो परामर्श के दौरान मरीज को देखने के काम आती है। जगह की कमी का आलम यह है कि डॉक्टर की तीन कुर्सी, बीच में मेज, दो स्टूल रखने के बाद मरीज की जांच के लिए डॉक्टर को पहली कुर्सी हटानी पड़ती है, तब मरीज किसी तरह स्ट्रेचर पर लेट पाता है।
केस-एक
गाजीपुर निवासी एक महिला की ड्रेसिंग करनी थी। डॉक्टर ने उसको पीछे गलियारे में पैरामेडिकल स्टाफ के पास जाने को कहा। महिला पहुंची तो देखा कि बाथरूम का गेट है। पहले तो वह रुकी तभी कर्मचारी ने पास में रखे ड्रेसिंग टेबल के पास आने को कहा। किसी तरह ड्रेसिंग करवाने के बाद महिला परिजनों के साथ बाहर आई।
केस-दो
कुछ दिन पहले ही मुंह की सर्जरी कराने वाले एक युवक को डॉक्टर ने ड्रेसिंग की सलाह दी। वह ओपीडी में ही कमरे से बाहर निकलकर गलियारे में पहुंचा और ड्रेसिंग करवाई। इस समय बाथरूम का गेट खुला था, उसको बंद करने के बाद ड्रेसिंग शुरू हो सकी।