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हाईकोर्ट का आदेश, विधायक सुशील सिंह के आपराधिक इतिहास के बारे में शपथ पत्र दें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 04 May 2018 01:48 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा से भाजपा विधायक सुशील सिंह के आपराधिक इतिहास के बारे में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति रमेश सिंह की खंडपीठ ने सुशील सिंह के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों और उनकी मौजूदा स्थिति का ब्योरा भी पेश करने को कहा है। साथ ही, पूछा है कि वर्ष 2015 में हुई रामबिहारी चौबे की हत्या की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी है। मामले की सुनवाई की तिथि सात मई नियत की गई है।
चार दिसंबर 2015 की सुबह बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चौबेपुर के श्रीकंठपुर निवासी रामबिहारी चौबे की हत्या उनके घर में घुस कर की थी। रामबिहारी चौबे सेंट्रल जेल में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह के करीबियों में से एक थे।
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इस मामले में चौबेपुर पुलिस ने छह अप्रैल 2017 को एमएलसी बृजेश के करीबी अजय मरदह, नागेंद्र सिंह उर्फ राजू और आशुतोष सिंह उर्फ सनी को गिरफ्तार किया। तीनों की गिरफ्तारी का विधायक सुशील सिंह ने मौके पर पहुंच कर विरोध किया था लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने रामबिहारी चौबे की हत्या का आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में विधायक सुशील सिंह का नाम पहले से दर्ज मुकदमे में जोड़ा।
रामबिहारी चौबे के बेटे अमरनाथ चौबे का आरोप है कि पुलिस उनके पिता की हत्या की जांच पारदर्शी तरीके से नहीं कर रही है। मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की है।
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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति रमेश सिंह की खंडपीठ ने सुशील सिंह के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों और उनकी मौजूदा स्थिति का ब्योरा भी पेश करने को कहा है। साथ ही, पूछा है कि वर्ष 2015 में हुई रामबिहारी चौबे की हत्या की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी है। मामले की सुनवाई की तिथि सात मई नियत की गई है।
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चार दिसंबर 2015 की सुबह बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चौबेपुर के श्रीकंठपुर निवासी रामबिहारी चौबे की हत्या उनके घर में घुस कर की थी। रामबिहारी चौबे सेंट्रल जेल में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह के करीबियों में से एक थे।
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इस मामले में चौबेपुर पुलिस ने छह अप्रैल 2017 को एमएलसी बृजेश के करीबी अजय मरदह, नागेंद्र सिंह उर्फ राजू और आशुतोष सिंह उर्फ सनी को गिरफ्तार किया। तीनों की गिरफ्तारी का विधायक सुशील सिंह ने मौके पर पहुंच कर विरोध किया था लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने रामबिहारी चौबे की हत्या का आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में विधायक सुशील सिंह का नाम पहले से दर्ज मुकदमे में जोड़ा।
रामबिहारी चौबे के बेटे अमरनाथ चौबे का आरोप है कि पुलिस उनके पिता की हत्या की जांच पारदर्शी तरीके से नहीं कर रही है। मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की है।
2007 में थे 14 मुकदमे, 2017 में पांच
सुशील सिंह
याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते 24 अप्रैल को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने विधायक सुशील सिंह के आपराधिक इतिहास, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की मौजूदा स्थिति और रामबिहारी चौबे हत्याकांड की जांच दो साल बाद भी पूरी न होने पर मुख्य सचिव को सात मई को तलब कर व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा है।
एमएलसी बृजेश के भतीजे सुशील सिंह वर्ष 2007 में पहली बार चंदौली की धानापुर विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे। उस दौरान दाखिल शपथ पत्र के अनुसार सुशील सिंह के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज थे।
2012 में सुशील सकलडीहा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और शपथ पत्र के अनुसार उनके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज थे। वर्ष 2017 में सुशील सैयदराजा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और उनके शपथ पत्र के अनुसार नई दिल्ली, भदोही, चंदौली और वाराणसी जिले में उनके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं।
एमएलसी बृजेश के भतीजे सुशील सिंह वर्ष 2007 में पहली बार चंदौली की धानापुर विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे। उस दौरान दाखिल शपथ पत्र के अनुसार सुशील सिंह के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज थे।
2012 में सुशील सकलडीहा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और शपथ पत्र के अनुसार उनके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज थे। वर्ष 2017 में सुशील सैयदराजा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और उनके शपथ पत्र के अनुसार नई दिल्ली, भदोही, चंदौली और वाराणसी जिले में उनके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं।