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काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण मामले में हाईकोर्ट ने जिला जज से रिपोर्ट की तलब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद/वाराणसी
Updated Fri, 15 Jun 2018 04:09 PM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर के पास दुकान के ध्वस्तीकरण का मामला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थगनादेश के बावजूद काशी विश्वनाथ मंदिर के पास दुकान के ऊपर ध्वस्तीकरण करने के मामले में जिला जज को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट के आदेश पर हाजिर हुए वाराणसी के कमिश्नर, डीएम, एसएसपी, मंदिर के सीईओ और अन्य पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाते हुए आगे से ध्वस्तीकरण न करने का निर्देश दिया।
ध्वस्तीकरण को लेकर डीएम और याची के दावे में विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने जिला जज वाराणसी को निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। जिला जज को तीन जुलाई तक रिपोर्ट पेश करनी है। इसके बाद याचिका की सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
मुन्नी देवी की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया। कोर्ट ने तलब किए गए सभी अधिकारियों की हाजिरी माफ कर दी है। मंदिर ट्रस्ट की तरफ से अधिवक्ता विनीत संकल्प, अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता केआर सिंह ने पक्ष रखा।
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याचिका में कहा गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए मंदिर के आसपास के कई मकानों को राज्यपाल के नाम से सरकार ने खरीद लिया है। अब इन भवनों को ध्वस्त किया जा रहा है। इन मकानों में वर्षों से रह रहे किराएदारों और दुकानदारों ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
याची के मामले में भी कोर्ट ने याचिका पर जवाब मांगते हुए एक मई 18 को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद मंदिर प्रशासन ने याची की दुकान के ऊपर एक कंपनी का ऑफिस ढहा दिया।
इससे याची की दुकान की छत टूट गई और मलबा दुकान के अंदर गिर गया। इस पर अवमानना याचिका दाखिल कर एक दर्जन अधिकारियों को दंडित करने की मांग की गई।
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ध्वस्तीकरण को लेकर डीएम और याची के दावे में विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने जिला जज वाराणसी को निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। जिला जज को तीन जुलाई तक रिपोर्ट पेश करनी है। इसके बाद याचिका की सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
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मुन्नी देवी की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया। कोर्ट ने तलब किए गए सभी अधिकारियों की हाजिरी माफ कर दी है। मंदिर ट्रस्ट की तरफ से अधिवक्ता विनीत संकल्प, अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता केआर सिंह ने पक्ष रखा।
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याचिका में कहा गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए मंदिर के आसपास के कई मकानों को राज्यपाल के नाम से सरकार ने खरीद लिया है। अब इन भवनों को ध्वस्त किया जा रहा है। इन मकानों में वर्षों से रह रहे किराएदारों और दुकानदारों ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
याची के मामले में भी कोर्ट ने याचिका पर जवाब मांगते हुए एक मई 18 को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद मंदिर प्रशासन ने याची की दुकान के ऊपर एक कंपनी का ऑफिस ढहा दिया।
इससे याची की दुकान की छत टूट गई और मलबा दुकान के अंदर गिर गया। इस पर अवमानना याचिका दाखिल कर एक दर्जन अधिकारियों को दंडित करने की मांग की गई।
जेल भेजे जाने की दी चेतावनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट ने दीपक अग्रवाल आयुक्त, योगेश्वर राम मिश्र जिलाधिकारी, एसएसपी वाराणसी आरके भारद्वाज, मंदिर के सीईओ विशाल सिंह, एएसपी ज्ञानवापी शैलेंद्र राय, सीओ नेहा तिवारी, एसएचओ चौक राहुल शुक्ल, अमन कश्यप पुलिस अधिकारी और ठेकेदार दिलीप यादव को हाजिर होने का निर्देश दिया।
गुरुवार को सभी कोर्ट में हाजिर हुए। याची ने ठेकेदार और सीईओ पर कोर्ट आदेश के खिलाफ गंभीर टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान जब इन अधिकारियों को हाईकोर्ट के स्थगन आदेश से अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसे कोर्ट के आदेश वे अपनी जेब में रखे रहते हैं।
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि कोर्ट की अवमानना पर उनको जेल भेजा जा सकता है। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में कहा गया कि वह स्वयं 13 जून को शाम आठ बजे मौके पर गए थे।
कोई ध्वस्तीकरण नहीं हो रहा था। वह कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। जब कि याची ने इस बयान के विपरीत कहा कि उसकी दुकान क्षतिग्रस्त की गई है। जिला जज की रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट होगी। मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
गुरुवार को सभी कोर्ट में हाजिर हुए। याची ने ठेकेदार और सीईओ पर कोर्ट आदेश के खिलाफ गंभीर टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान जब इन अधिकारियों को हाईकोर्ट के स्थगन आदेश से अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसे कोर्ट के आदेश वे अपनी जेब में रखे रहते हैं।
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि कोर्ट की अवमानना पर उनको जेल भेजा जा सकता है। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में कहा गया कि वह स्वयं 13 जून को शाम आठ बजे मौके पर गए थे।
कोई ध्वस्तीकरण नहीं हो रहा था। वह कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। जब कि याची ने इस बयान के विपरीत कहा कि उसकी दुकान क्षतिग्रस्त की गई है। जिला जज की रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट होगी। मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
परंपरा के साथ खिलवाड़ करने वाले एक साल के लिए होंगे निलंबित
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती के दौरान विवाद करने वाले पुजारियों पर कार्रवाई की तैयारी है। उन्हें एक साल के लिए निलंबित किया जाएगा। बुधवार की भोर में मंगला आरती में हुए विवाद के कारण देर से शुरू हुई आरती के मामले को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है।
बुधवार की भोर में यजमानों को बैठाने के लिए हुए विवाद के बाद मंगला आरती में 20 मिनट का विलंब हुआ था। इस मामले को टाटा स्काई से दिखाया गया है। इस मामले में पाली प्रभारी और प्रभारी मजिस्ट्रेट की शिकायत के बाद अधिकारियों ने सख्त रूप अपनाया है।
पुजारियों और सुरक्षा कर्मियों की मनमानी के कारण आए दिन गर्भगृह में विवाद होते रहते हैं। मंदिर के न्यास परिषद के अध्यक्ष के पास भी मंगला आरती में विलंब की कई शिकायतें पहुंची हैं।
उन्होंने बताया कि पूरे देश में टाटा स्काई के माध्यम से गर्भगृह की घटना का सजीव प्रसारण हुआ है। बाबा की मंगला आरती को रोकना बड़ा अपराध है। बाबा दरबार की परंपरा के साथ खिलवाड़ करना ठीक नहीं है।
बुधवार की भोर में यजमानों को बैठाने के लिए हुए विवाद के बाद मंगला आरती में 20 मिनट का विलंब हुआ था। इस मामले को टाटा स्काई से दिखाया गया है। इस मामले में पाली प्रभारी और प्रभारी मजिस्ट्रेट की शिकायत के बाद अधिकारियों ने सख्त रूप अपनाया है।
पुजारियों और सुरक्षा कर्मियों की मनमानी के कारण आए दिन गर्भगृह में विवाद होते रहते हैं। मंदिर के न्यास परिषद के अध्यक्ष के पास भी मंगला आरती में विलंब की कई शिकायतें पहुंची हैं।
उन्होंने बताया कि पूरे देश में टाटा स्काई के माध्यम से गर्भगृह की घटना का सजीव प्रसारण हुआ है। बाबा की मंगला आरती को रोकना बड़ा अपराध है। बाबा दरबार की परंपरा के साथ खिलवाड़ करना ठीक नहीं है।