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काशी विश्वनाथ दरबार में लगाया गया एयर प्यूरीफायर, एक माह तक चलेगा ट्रायल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 13 Dec 2018 04:22 PM IST
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एयर प्यूरीफायर
- फोटो : अमर उजाला
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काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए चल रहे ध्वस्तीकरण से हो रहे प्रदूषण को कम करने के लिए मंदिर परिसर में बुधवार को एयर प्यूरीफायर लगाया गया। यह एक माह के फ्री ट्रायल पर है। अगर सफल रहा तो आगे भी कई मशीनें लगाई जाएंगी। बंगलूरू की कंपनी ने इस मशीन को इंस्टाल करने के बाद शाम के समय शुरू करा दिया है।
मंदिर कॉरिडोर के लिए भवनों की खरीदी के बाद उसमें से कुछ भवनों को तोड़ने का भी काम चल रहा है। इसके लिए लगभग 3000 मजदूर प्रतिदिन रात में 11 बजे से लेकर सुबह ध्वस्तीकरण का कार्य कर रहे हैं। इस ध्वस्तीकरण के चलते जो धूल उड़ रही है, उससे मंदिर और मंदिर के आसपास करीब तीन-चार किलोमीटर तक की हवा पूरी तरह से प्रदूषित हो गई है।
देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी इस धूल और प्रदूषण से परेशान हो रहे हैं। इस परेशानी को देखते हुए मंदिर प्रशासन में जिला प्रशासन के सहयोग एयर प्यूरीफायर लगाया है। इस मशीन की कीमत करीब 15 लाख बताई जा रही है।
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मंदिर कॉरिडोर के लिए भवनों की खरीदी के बाद उसमें से कुछ भवनों को तोड़ने का भी काम चल रहा है। इसके लिए लगभग 3000 मजदूर प्रतिदिन रात में 11 बजे से लेकर सुबह ध्वस्तीकरण का कार्य कर रहे हैं। इस ध्वस्तीकरण के चलते जो धूल उड़ रही है, उससे मंदिर और मंदिर के आसपास करीब तीन-चार किलोमीटर तक की हवा पूरी तरह से प्रदूषित हो गई है।
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देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी इस धूल और प्रदूषण से परेशान हो रहे हैं। इस परेशानी को देखते हुए मंदिर प्रशासन में जिला प्रशासन के सहयोग एयर प्यूरीफायर लगाया है। इस मशीन की कीमत करीब 15 लाख बताई जा रही है।
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शहर के कई स्थानों पर लगेगी मशीन
अगर यह मशीन मंदिर क्षेत्र में सफल रही तो शहर के कई स्थानों पर इस मशीन को लगा कर प्रदूषण को कम करने का काम किया जाएगा। इस मशीन की खासियत है कि जहां लगेगी वहां से करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में हवा में मिले धूल के कण को सोख लेगी जिससे हवा शुद्ध हो जाएगी। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि निजी कंपनी चार सप्ताह के ट्रायल पर मशीन लगा रही है। इसके परिणाम के बाद निर्णय किया जाएगा।
मंदिर परिसर में बनाया गया बेबी फीडिंग रूम
विश्वनाथ मंदिर परिसर में बुधवार को स्थाई बेबी फीडिंग रूम बनाया गया है, जहां महिलाएं बच्चों को दुग्धपान करा सकेंगी। इससे पहले यह कार्यालय के एक केबिन में चल रहा था, लेकिन मंदिर प्रशासन ने बुधवार को स्थाई रूप से एक कक्ष बना दिया, जहां दो महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये कर्मचारी आठ आठ घंटे अपनी सेवाएं देंगे और वहां गर्म पानी तक की सुविधा होगी।