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काशी में कृषि मंत्री: किसान गोष्ठी में बोले सूर्यप्रताप शाही, हर ग्राम पंचायत स्तर पर जरूर बनाएं एक अमृत सरोवर

Mon, 24 Jun 2024 09:03 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 24 Jun 2024 09:03 PM IST
सार

कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही सोमवार को वाराणसी में आयोजित किसान गोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति में परिवर्तन हो यही किसान गोष्ठी की सार्थकता है। कहा कि सभी सीडीओ से अपेक्षा की जाती है कि हर ग्राम पंचायत स्तर पर जरूर एक अमृत सरोवर बनाएं। 

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Agriculture Minister Surya Pratap Shahi said to bring about change in condition of farmers
किसान गोष्ठी में संबोधित करते कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के चौकाघाट स्थित गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल के सभागार में सोमवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषि मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने जय जवान जय किसान जय विज्ञान जय अनुसंधान पर जोर दिया। कहा कि सभी सीडीओ से अपेक्षा की जाती है कि हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक अमृत सरोवर जरूर बनाएं और जल संरक्षण पर भी काम करें।
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उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन होना ही इस किसान गोष्ठी की सार्थकता होगी। प्रदेश में पांच सीड पार्क की स्थापना की जाएगी। बढ़ती हुई जनसंख्या को खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित कराने, किसानों की आर्थिक स्थिति में इजाफे के लिए आगे की कार्ययोजना बनाने के लिए इस तरह की किसान गोष्ठी आयोजित की जाती है।
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उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों से उत्तर प्रदेश खाद्य उत्पादन में प्रथम स्थान बनाए हुए है और गन्ना में भी प्रदेश प्रथम स्थान बनाए हुए है। प्रदेश के पास सरप्लस खाद्य भंडार है। सरकार लगातार काला बाजारी व जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सरकार किसानों को जिप्सम, कीटनाशक साथ ही खादों पर प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। किसानों को खाद एवं बीज के लिए परेशान नही होना पड़ेगा क्योंकि इनका पर्याप्त भंडार मौजूद है। बेहतर उत्पादन के लिए किसान राज्य बीज निगम से उन्नत किस्म के बीज खरीदें।
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उन्होंने कहा कि लगभग पांच हजार करोड़ की ढैंचा खरीद आंध्र प्रदेश से सरकार करती है। यदि प्रदेश के किसान इसकी खेती करें तो दूसरे प्रदेश से आयात नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा हमें दाल अभी भी विदेशों से आयात करना पड़ता है और लगभग सवा लाख करोड़ की तिलहन विदेश से आयात की जाती है। अगर हम दलहन और तिलहन की खेती कर इनका उत्पादन बढ़ाएं तो बेहतर आय के साथ ही इन पैसों को बाहर जाने से रोका जा सकता है साथ ही हम अपनी आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं।

वर्षा के जल संचयन के क्षेत्र में लगातार कार्य करने की जरूरत पर कहा कि पौधरोपण पर भी लगातार ध्यान देने की जरूरत है। ताकि बढ़ते हुए तापमान को रोकने और वर्षाकाल को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कृषि गोष्ठी के दौरान किसानों द्वारा उठाई गई समस्याओं के फौरन समाधान करने के निर्देश संबंधित विभागीय अधिकारियों को दिए।

खरीफ फसल के बीज की दिक्कत नहीं : मंडलायुक्त

मंडलायुक्त कहा कि खरीफ-2024 के अंतर्गत कुल 78874 कुंतल बीज वितरण के सापेक्ष वर्तमान में लगभग 74000 कुंतल बीज की उपलब्धता हो चुकी है और अगले 15 दिन में बचे बीज की उपलब्धता व मिनी किट का वितरण सुनिश्चत कर लिया जाएगा। मंडल में उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है व बायोपेस्टीसाइड की उपलब्धता भी 90 प्रतिशत से ज्यादा है। मंडल में फसली ऋण खरीफ-2023 में लगभग 1350 करोड़ था जिसे इस वर्ष बढ़ाकर 1885 करोड़ किया गया है।

विशेषज्ञों ने कृषि मंत्री के सामने साझा की जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने दलहनी व तिलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती व मूल्य संवर्द्धन की तकनीकी जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि खरीफ में धान की सीधी बुवाई ड्रम सीडर और छिड़काव से करने पर कम लागत के साथ साथ पानी की आवश्यकता भी कम होती है। 

क्षेत्रीय प्रबंधक एपीडा डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि एफपीओ के माध्यम से विगत वर्ष में कृषि उत्पादों का 750 मैट्रिक टन का निर्यात खाड़ी व अन्य देशों को किया गया। डॉ. रजनीकांत, भौगोलिक संकेतक विशेषज्ञ ने बताया कि 2003 में जीआई टैग लागू हुआ जिसके अन्तर्गत प्रयागराज का सुरखा अमरूद का निर्यात हेतु पंजीकृत हुआ और अब तक प्रदेश में 75 जीआई उत्पादों की टैगिंग हो चुकी है।

खुरपका-मुंहपका की रोकथाम के लिए चल रहा टीकाकरण
प्रमुख सचिव, पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध उप्र रविंद्र ने बताया कि प्रदेश में पशुओं में खुरपका, मुंहपका आदि रोगों की रोक-थाम हेतु टीकाकरण अभियान चल रहा है। साथ ही स्वदशी गायो यथा-गिर, साहीवाल, हरियाणा, गंगातीरी व थारपारकर से निर्धारित मानक पर दुग्ध उत्पादन करने पर प्रति पशु 10 हजार से 15 हजार तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। निदेशक उद्यान एवं खाद्य प्रस्संकरण विजय बहादुर द्विवेदी ने बताया कि खरीफ में पान, मिर्च व केला के फसलों की बीमा की तिथि 30 जून तक जिस कृषक 5 प्रतिशत प्रीमियम की दर पर बीमा करा सकते हैं।
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