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ख्यात अभिनेता मकरंद देशपांडे की बनारस में है बसने की इच्छा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 23 Oct 2017 02:31 PM IST
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मकरंद देशपांडे सहयोगी कलाकारों के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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फिल्म अभिनेता, निर्देशक और लेखक मकरंद देशपांडे की चाहत बनारस में बसने की है। वो यहीं का होकर रह जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि जितना प्यार काशी में है, उतना किसी दूसरे शहरों में नहीं। यह मोहब्बती लोगों का शहर है।
फिल्म ‘इशक’ की कभी इसी शहर में शूटिंग कर चुके मकरंद का कहना है कि वह जब भी यहां आते हैं तो फिर जाने का दिल नहीं करता। अपने नाटक ‘मां इन ट्रांजिट’ के मंचन के लिए रविवार की शाम डोमरी पहुंचे देशपांडे ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी भावनाओं को इसी अंदाज में साझा किया।
बनारस के खानपान, भाषा-संस्कृति के कायल मकरंद अपने नाटक मां इन ट्रांजिट को लेकर बेहद उत्साहित हैं। बताया कि यह एक मां और बेटे की कहानी पर आधारित नाटक है। मां की मौत के बाद भी बेटा उस पाने की जद्दोजहद में लगा रहता है। उसे अपनी ओर महसूस करता है।
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इस नाटक को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। थिएटर मेरा पहला प्यार है। 2018 में रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘गहर’में वह एक बार फिर नजर आएंगे। अभिनय की चाह रखने वाले बनारस के युवाओं से उनका कहना है कि वह मेहनत करना सीखें , अपनी प्रतिभा को तराशें।
कई लोग रियलिटी शो से प्रभावित होकर भी मुंबई चले जाते हैं। वहां उन्हें निराशा मिलती है। इसके जिम्मेदार माता-पिता भी हैं। टीवी शो देखकर वो भी अपने बच्चों को वैसा ही बनाने की सोचने लगते है। उन्हें बच्चों की रुचि पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ थोड़ा समय देना चाहिए।
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फिल्म ‘इशक’ की कभी इसी शहर में शूटिंग कर चुके मकरंद का कहना है कि वह जब भी यहां आते हैं तो फिर जाने का दिल नहीं करता। अपने नाटक ‘मां इन ट्रांजिट’ के मंचन के लिए रविवार की शाम डोमरी पहुंचे देशपांडे ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी भावनाओं को इसी अंदाज में साझा किया।
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बनारस के खानपान, भाषा-संस्कृति के कायल मकरंद अपने नाटक मां इन ट्रांजिट को लेकर बेहद उत्साहित हैं। बताया कि यह एक मां और बेटे की कहानी पर आधारित नाटक है। मां की मौत के बाद भी बेटा उस पाने की जद्दोजहद में लगा रहता है। उसे अपनी ओर महसूस करता है।
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इस नाटक को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। थिएटर मेरा पहला प्यार है। 2018 में रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘गहर’में वह एक बार फिर नजर आएंगे। अभिनय की चाह रखने वाले बनारस के युवाओं से उनका कहना है कि वह मेहनत करना सीखें , अपनी प्रतिभा को तराशें।
कई लोग रियलिटी शो से प्रभावित होकर भी मुंबई चले जाते हैं। वहां उन्हें निराशा मिलती है। इसके जिम्मेदार माता-पिता भी हैं। टीवी शो देखकर वो भी अपने बच्चों को वैसा ही बनाने की सोचने लगते है। उन्हें बच्चों की रुचि पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ थोड़ा समय देना चाहिए।