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पक्का महाल की खुदाई में एक हजार साल पुराने मृदभांड मिले

Thu, 09 Jun 2016 02:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 09 Jun 2016 02:34 AM IST
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A thousand year old pottery found in the excavation of certain Mahal
खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेष।
बनारस की पुरानी बस्ती पक्का महाल की उम्र का पता लगाने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पास पार्क में कराई जा रही खुदाई में बुधवार को करीब एक हजार वर्ष पुरानी पक्की दीवार, फर्श और संग्रह पात्र के रूप में बड़े आकार का एक घड़ा मिला है। मजदूरों और वहां खुदाई के वक्त मौजूद विशेषज्ञों का कहना है कि घड़ा खाली था। इसके अलावा मिट्टी के कुछ ठीकरे भी मिले हैं। इन मृदभांडों के नौवीं, 10वीं शताब्दी से पहले का होने का अनुमान है। खुदाई में प्राप्त पुरातात्विक महत्व के अवशेषों को ज्ञान प्रवाह के संग्रहालय में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
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गंगा तट पर राजघाट से अस्सी के बीच बसे बनारस के पक्का महाल की उम्र का पता लगाने में जुटे पुरातत्वविदों को बुधवार को पहली बार सफलता हाथ लगी है। करीब सात मीटर नीचे हो रही खुदाई के दौरान एक फर्श से लगा हुआ बड़ा घड़ा मिला। इसके अलावा कई ठीकरे और पुरानी इमारतों को नक्काशीदार बनाने में प्रयोग होने वाले पत्थरों के टुकड़े, तीन फर्श और दो प्राचीन दीवारें भी मिली हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कई बार बस्तियां वहां मिटी और अस्तित्व में आई होंगी। 

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति से विश्वनाथ मंदिर से 60 मीटर दूर सरस्वती पार्क में आठ अप्रैल से खुदाई करा रहीं बीएचयू की पुरातत्वविद प्रो. विदुला जायसवाल ने फर्श से लगे मिले घड़े को संग्रह पात्र बताया। उन्होंने इस घड़े और ठीकरों के करीब एक हजार वर्ष पूर्व का होने का अनुमान व्यक्त किया है। अब तक के अध्ययन के आधार पर उनका कहना है कि पक्के महाल की बस्ती कम से कम 2000 से 2500 साल से भी ज्यादा पुरानी हो सकती है।

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अभी कम से कम ढाई मीटर तक और खुदाई कराई जाएगी, ताकि पक्के महाल के अतीत की गुत्थी सुलझाई जा सके। बताया कि हालांकि पांच मीटर नीचे तक खुदाई के बाद से ही कुछ अवशेष मिलने लगे थे लेकिन अभी बहुत उत्साहजनक परिणाम सामने नहीं आ सके हैं। खुदाई कराने वाले पुरातत्वविदों की टीम में डॉ. मीरा शर्मा, डॉ. गार्गी चटर्जी, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. मनोज कुमार यादव शामिल हैं।

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