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शांति के लिए आहुति देने उमरहां में उमड़ा सैलाब
Varanasi
Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
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चौबेपुर। ध्यान-योग-प्राणायाम के साथ सोमवार की सुबह उमरहां स्थित स्वर वेद मंदिर के 89वें वार्षिकोत्सव पर 5101 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ का श्रीगणेश हो गया। देश के कोने-कोने के अलावा दूसरे देशों से पहुंचे संतों, अनुयायियों की मौजूदगी में आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने श्वेत ध्वजारोहण के साथ विहंगम योग समारोह का शुभारंभ किया। इसी के साथ ही सदगुरुवे नम: के गगनभेदी जयकारे गूंज उठे। भक्तों का सैलाब उमड़ने से उमरहां बाजार से मंदिर होते हुए गाजीपुर मार्ग तक दिन भर जाम की स्थिति बनी रही।
स्वर वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुतियों पर विशाल पंडाल में अलग-अलग राज्यों से आए अनुयायी भक्ति में मगन थे। सुबह योग-प्राणायाम की विधियां सिखाई गईं। निरोगी काया के लिए प्रशिक्षकों ने विहंगम योग की विधियों का प्रशिक्षण दिया। मानव मन की शांति और आध्यात्मिक उत्थान के लिए ब्रह्म विद्या विहंगम योग की क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा सुबह 10 से शाम छह बजे तक दी जाती रही। ब्रह्म विद्या विहंगम योग के सैद्धांतिक पक्ष की धारा भी प्रवाहित होती रही। आयुर्वेद, होम्योपैथ, पंचगव्य चिकित्सा पद्धतियों के मुफ्त शिविर भी लगे थे। शाम को यज्ञ स्थल सद्गुरु सदाफल महाराज की स्वर वेद कथा वाणी से गूंजता रहा। मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन संस्कार भी हुए। प्रवचन का लाइव टेलीकास्ट भी किया जा रहा है।
इनसेट
दुनिया भर से जमावड़ा
वाराणसी। विश्व शांति वैदिक महायज्ञ की शुरुआत के मौके पर इंडोनेशिया के धर्मगुरु के अलावा छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लता उपेंडी, झारखंड के तीन सांसदों के साथ दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, अमेरिका, केन्या, कनाडा, चीन, जर्मनी, दुबई, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया के भी भक्त मौजूद थे।
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संत वचन
विहंगम योग ध्यान आंतरिक शक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह सिर्फ मानसिक तनाव, अवसाद या रोगों को दूर कर बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने तक सीमित नहीं बल्कि बौद्धिक, आध्यात्मिक विकास की भी एक आंतरिक प्रक्रिया है। -आचार्य स्वतंत्र देव महाराज
कोट
प्रेम का अभाव होने से अहंकार अपना स्थान बना लेता है। अहंकार से घृणा, द्वेष की भावना बलवती होती है। घृणा को सिर्फ प्रेम से ही दूर किया जा सकता है। -संत विज्ञान देव महाराज
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स्वर वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुतियों पर विशाल पंडाल में अलग-अलग राज्यों से आए अनुयायी भक्ति में मगन थे। सुबह योग-प्राणायाम की विधियां सिखाई गईं। निरोगी काया के लिए प्रशिक्षकों ने विहंगम योग की विधियों का प्रशिक्षण दिया। मानव मन की शांति और आध्यात्मिक उत्थान के लिए ब्रह्म विद्या विहंगम योग की क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा सुबह 10 से शाम छह बजे तक दी जाती रही। ब्रह्म विद्या विहंगम योग के सैद्धांतिक पक्ष की धारा भी प्रवाहित होती रही। आयुर्वेद, होम्योपैथ, पंचगव्य चिकित्सा पद्धतियों के मुफ्त शिविर भी लगे थे। शाम को यज्ञ स्थल सद्गुरु सदाफल महाराज की स्वर वेद कथा वाणी से गूंजता रहा। मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन संस्कार भी हुए। प्रवचन का लाइव टेलीकास्ट भी किया जा रहा है।
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दुनिया भर से जमावड़ा
वाराणसी। विश्व शांति वैदिक महायज्ञ की शुरुआत के मौके पर इंडोनेशिया के धर्मगुरु के अलावा छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लता उपेंडी, झारखंड के तीन सांसदों के साथ दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, अमेरिका, केन्या, कनाडा, चीन, जर्मनी, दुबई, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया के भी भक्त मौजूद थे।
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विहंगम योग ध्यान आंतरिक शक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह सिर्फ मानसिक तनाव, अवसाद या रोगों को दूर कर बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने तक सीमित नहीं बल्कि बौद्धिक, आध्यात्मिक विकास की भी एक आंतरिक प्रक्रिया है। -आचार्य स्वतंत्र देव महाराज
कोट
प्रेम का अभाव होने से अहंकार अपना स्थान बना लेता है। अहंकार से घृणा, द्वेष की भावना बलवती होती है। घृणा को सिर्फ प्रेम से ही दूर किया जा सकता है। -संत विज्ञान देव महाराज